कैंट बंगला 62 ऐसी भी क्या जल्दी है

kabir Sharma
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ब्रुक स्ट्रीट बंगला 62 ऐसी भी क्या जल्दी है, छुट्टी के दिन फोर्स को डीईओ खुद जा बैठे थाना लाल कुर्ती में

गंगानगर और माल रोड पर इंस्टीट्यूट संचालक भाजपा नेता ने की है बड़ी डील

मेरठ। छावनी के ब्रुक स्ट्रीट स्थित बंगला नंबर ६२ को लेकर ऐसी भी क्या जल्दी है जो छुट्टी का दिन होते हुए भी पुलिस फोर्स के नाम पर डीईओ खुद थाना लालकुर्ती में जा बैठे। यहां तक नौबत होती तो भी गनीमत थी। खुद तो थाने में जाकर बैठे ही कैंट बोर्ड से भी ध्वस्तीकरण अमला थाने में बुला लिया। कैंट बोर्ड के जेई जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्राली लेकर शनिवार को सुबह करीब ११ बजे थाना लालकुर्ती जा पहुंचे। लोग सवाल कर रहे हैं कि ऐसी भी क्या मजबूरी थी जो डीईओ पुलिस फोर्स के लिए खुद ही थाने में जाकर बैठ गए। कई घंटे वहां बैठे रहे। पुलिस फोर्स को तो इंतजाम कर लिया गया, लेकिन मजिस्ट्रेट की उपलब्धता नहीं हो सकी। आज के घटनाक्रम को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं हैं। सबसे ज्यादा चर्चा गंगानगर में एक बड़े इंस्टीट्यूट संचालक को मदद किए जाने को लेकर हो रही है। कहा जा रहा है कि ब्रुक स्ट्रीट स्थित बंगला नंबर ६२ का सौदा गंगानगर के इंस्टीट्यूट संचालक कर लिया है। चर्चा आम है कि इंस्टीट्यूट संचालक चाहता है कि इस बंगले को खाली करा दिया जाए। इसके लिए वो जो कुछ कर सकता है वो करने पर उतारू है। यह भी बताया गया है कि ओल्डग्रांट के इस बंगले को लेकर जिनका नाम जीएलआर में चढ़ा हुआ है उनका उनका अरसे पहले निधन होने की बात बतायी जाती है।

बंगले का स्टेटस

इस बंगले के स्टेटस की यदि बात की जाए तो इस बंगले में कई परिवार रहा करते थे। उनमें से ज्यादातर को तो ले देकर बंगले का बड़ा हिस्सा खाली करा लिया गया है, लेकिन अभी भी दो परिवार यहां पर मौजूद हैं, जो खाली नहीं कर रहे हैं। इसके अलावा अशोका गैराजा समेत एक अन्य गैराज है। यह बंगला माल रोड से स्टे चिराग नर्सिंगहोम के ठीक सामने पड़ता है। बंगले में रहने वालों का कहना था कि उन्हें किसी भी सूरत सोमवार तक की मोहलत मिल जाए। माना जा रहा है कि सोमवार को जिनको बंगले से बेदल करना चाहते हैं उन्हें हाईकोर्ट से स्टे मिल जाएगा।

आखिर क्या वजह है

छावनी के बु्रक स्ट्रीट बंगला ६२ को लेकर ऐसी कोई इमरजैंसी सरीखी स्थिति नहीं नजर आ रही है जिसके चलते यह बात गले उतरे कि डीईओ यादि खुद थाने में जाकर ना बैठते तो अनर्थ हो जाता। बात ज्यादा पुरानी नहीं है। छावनी के ओल्डग्रांट के करीब १९ बंगलों को लेकर कुछ अरसे पहले समाचार पत्रों में एक विज्ञापन प्रकाशित कराया गया था। उस विज्ञापन के प्रकाशित होने के बाद तमाम स्कूल संचालक व अन्य लोग डीईओ ऑफिस की परिक्रम करते देखे गए। वो पूरा मामला उन बंगलों में अवैध निर्माण, चेज ऑफ परपज और सब डिवीजन ऑफ साइट से जुड़ा हुआ था। उस मामले का यहा ंउल्लेख करने का मकसद जिन बंगलों को लेकर विज्ञापन का प्रकाशन हुआ था जितना गंभीर मामला उनसे जुड़ा था, उतना गंभीर कम से कम ब्रुक स्ट्रीट बंगला ६२ से नजर नहीं आ रहा है। खैर वजह कुछ भी हो लेकिन इस बंगले को लेकर डीईओ की अति सक्रियता इस बंगले के बाहर जमा लोगों के गले नहीं उतर रही थी। नाम न छापे जाने की शर्त पर इन तमाम लोगों ने बताया कि कुछ तो ऐसा है जिसकी पर्दादारी है वर्ना ब्रुक स्ट्रीट बंगला नंबर 62 ऐसी भी क्या जल्दी है..

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