सबसे ज्यादा नुकसान इजरायल का, लड़ाई की स्ट्रेटजी से ट्रंप परेशान, पूरी दुनिया में गैस और तेल की किल्लत, दाम आसमान पर
नई दिल्ली/तेहरान/तेल अबीब। अमेरिका और इजरायल के ईरान से हो रही लड़ाई में तो ना तो इजरायल अब तक भारी पड़ा है और ना ही अमेरिका के मुतबिक जंग लड़ी जा रही है। यह बात खुद डोनाल्ड ट्रंप भी मान चुके हैं। सबसे बड़ी मुसीबत तो यह है कि ट्रंप बार-बार जंग खत्म करने की कोशिश करते हैं और ईरान उनकी कोशिशों पर भारी पड़ जाता है। इरान और इज़राइल (US के साथ) के बीच चल रही जंग अब अपने 12वें दिन में प्रवेश कर चुकी है (फरवरी 28, 2026 से शुरू)। यह मुख्य रूप से US-Israel vs Iran का संघर्ष है, जिसमें ईरान ने जवाबी हमले तेज किए हैं। ईरान के हमलों ने तेल अबीब का हुलिया बिगाउ़ कर रख दिया है।
कहां से आ रहे हैं हथियार
लड़ाई में जिन हथियारों को इस्तेमाल किया जा रहा है, वो हथियार ईरान के पास नहीं है। हालांकि इसमें दो राय नहीं कि उसके पास विनाशक मिसाइलें हैं। जिसका उसने अभी तक यूज नहीं किया है। लेकिन दो दिनों के दौरान ईरान ने जिन हथियारों को इस्तेमाल किया है, वो हथियार ईरान ने नहीं बनाए हैं, फिर कहां से वो हथियार ईरानी सेना यूज कर रही है। माना जा रहा है कि चीन और रूस ईरान की मदद कर रहे हैं। ये हथियार लड़ाई में ईरान के लिए काफी कारगर साबित हो रहे हैं।
तेल अबीब को भारी नुकसान
ईरान ने इज़राइल पर सबसे भारी मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं, जिसमें क्लस्टर वारहेड मिसाइलें शामिल हैं। तेल अवीव, हाइफा, जेरूसलम और अन्य शहरों में सायरन बजे। कई मिसाइलें इंटरसेप्ट हुईं, लेकिन कुछ इम्पैक्ट रिपोर्ट हुए। इरान ने गल्फ देशों (सऊदी, UAE, कुवैत) और US बेस पर भी हमले किए। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर हमले बढ़े, माइन बिछाने की कोशिशें हुईं (US ने 16 इरानी माइन-लेइंग जहाज नष्ट किए)। इन हमलों के बाद भी ईरानी फौज के हौसलों में कमी नहीं देखी जा रही है। हालांकि इज़राइल और US ने तेहरान, इस्फहान, शिराज सहित इरानी सैन्य ठिकानों, मिसाइल साइट्स, एयर डिफेंस और सिविलियन एरिया पर नए वेव ऑफ स्ट्राइक्स किए। तेहरान में रेसिडेंशियल बिल्डिंग्स और एयरपोर्ट के पास नुकसान। लेबनान (बेरूत) में भी इज़राइल ने हिजबुल्लाह टारगेट्स पर हमले किए। ईरानी कमांडरों का कहना है कि वो दस साल तक अमेरिका और इजरायल से जंग की तैयारी किए हुए हैं। ईरानी कमांडरों ने इस प्रकार के एलान अमेरिका और इजरायल को सांसत में डाल देते हैं।
दोनों खेमों को नुकसान
दोनों खेमों को यदि नुकसान की बात करें तो ईरान में अब तक 12 सौ से ज्यादा सिविलियनों की मौत बंबारी में हो चुकी है, जबकि इजरायल में मौत का आंकड़ा पचास को छू रहा है। मरने वालो में अब अमेरिकनों का भी नंबर बढ़ रहा है। इज़राइल ने शुरुआत में ज्यादा सक्सेस क्लेम की, लेकिन अब इरान की रेसिलिएंस और मल्टी-फ्रंट अटैक्स से स्ट्रैटेजिक चैलेंजेस हैं। ट्रंप ने “जल्द खत्म” कहा, लेकिन फाइट जारी।