देश की साठ फीसदी LPG होती है इंपोर्ट, ग्रे मार्केट में भी नहीं या फिर बहुत महंगा, हाेटल बंद होने से जा रही नौकरीं
नई दिल्ली। सरकार का दावा है कि LPG की कोई कमी नहीं है तो फिर गरीबों की रसाेई ओर होटलों पर इसका असर क्यों देखा जा रहा है। सरकार और तेल कंपनियां (IOCL आदि) कह रही हैं – घरेलू सिलेंडर की सप्लाई जारी है, सिर्फ कमर्शियल में प्राथमिकता घरों को दी गई है। लेकिन होटल मालिकों का कहना है कि स्टॉक खत्म हो गया, ग्रे मार्केट में भी नहीं मिल रहा।सरकार का दावा है कि देश में घरेलू रसोई गैस (LPG) की कोई कमी नहीं है और सप्लाई सामान्य है। लेकिन वास्तविकता यह है कि कमर्शियल LPG सिलेंडर (होटल, रेस्टोरेंट, कैंटीन, हॉस्टल आदि के लिए) की भारी किल्लत हो गई है, जिससे देशभर में सैकड़ों होटल और रेस्टोरेंट बंद हो रहे हैं या मेन्यू सीमित कर रहे हैं।
साठ फीसदी LPG इंपोर्ट
देश में साठ फीसदी LPG इंपोर्ट होता है, लेकिन मिडिल ईस्ट (ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध) के चलते LPG आयात प्रभावित हुआ है। भारत अपनी जरूरत का करीब 60% LPG विदेश से मंगाता है। सरकार ने Essential Commodities Act के तहत घरेलू उपयोग को प्राथमिकता दी है और कमर्शियल/औद्योगिक सप्लाई पर रोक या सीमा लगा दी। रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के आदेश दिए गए, लेकिन ग्राउंड पर कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल रहे। इसके अलावा पैनिक बाइंग और कालाबाजारी भी समस्या बढ़ा रही है। जिसका सीधा असर होटल इंडस्ट्रीज पर पड़ा है। तमाम होटलों में मेन्यू शार्ट कर दिए गए हैं या कुछ होटेल्स बंद होने की नौबत आ गयी है।
बड़े शहरों में होटल बंद
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में LPG संकट का व्यापक असर देखा जा रहा है। 20-50% होटल/रेस्टोरेंट बंद या आंशिक बंद। होटल बंद होने से रोजगार भी जारहे हैं। अकेले 800 से ज्यादा तो होटल थाणे में बंद होने की कगार पर। कई जगह शटर डाउन, मेन्यू में बदलाव। इनके अलावा बेंगलुरू, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे समेत देश के तमाम बड़े शहरों में कई रेस्टोरेंट बंद, मेन्यू में सिर्फ चाय-कॉफी बचा, कुछ ने लकड़ी/कोयला/इंडक्शन का सहारा लिया। तेलंगाना होटल एसोसिएशन का दावा – 48 घंटे में 90% बंद हो सकते हैं। इसके इतर दिल्ली, लखनऊ, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, वाराणसी, मथुरा व वृंदावन समेत अन्य धार्मिक स्थलों की यदि बात की जाए तो होटल-ढाबे-भंडारे बंद, स्टूडेंट हॉस्टल प्रभावित। कुछ जगह रेलवे नाश्ता भी बंद।