नॉटो देश कायर हैं हम इसको हमेशा याद रखेंगे, नॉटो देशों का ट्रंप के कहने पर सेना भेजने से इंकार, अकेले ईरान का मुकाबला नहीं कर पा रहे ट्रंप
नई दिल्ली। ईरान के साठ फीसदी कब्जे वाले हार्मूज जलडमरूमध्य मार्ग को ईरानी मिसाइलों के शिकंजे से आजाद कराने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बार-बार आग्रह के बाद भी यूरोपियन यूनियन और नॉटो देशों ने सेनाएं भेजने से साफ इंकार कर दिया। कुछ तो तेा लड़ाई का ठीकरा ही ट्रंप पर फोड़ा। यूरोपियनप यूनियन और नॉटो देशों के रवैये से ट्रंप बुरी तरह से उखड़ गए हैं। उनका दिमागी संतुलन बिगड़ गया लगता है। आज उन्होंने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किया, “नाटो देश कायर हैं, और हम इसे याद रखेंगे!” उन्होंने नॉटो देशों को कागजी शेर बताया और कहा कि ये अमेरिका के बगैर अधूरे हैं।
यह भी बोले ट्रंप
उन्होंने लिखा। “अब जब लड़ाई सैन्य रूप से जीत ली गई है और उनके लिए खतरा बहुत कम है, तो वे तेल की ऊंची कीमतों की शिकायत करते हैं, जो उन्हें चुकाने के लिए मजबूर होना पड़ता है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने में मदद नहीं करना चाहते, जो एक साधारण सैन्य कार्रवाई है और तेल की ऊंची कीमतों का एकमात्र कारण है। उनके लिए यह करना कितना आसान है, और इसमें जोखिम भी बहुत कम है,” इसके बाद भी किसी भी देश ने सेना भेजने की बात नहीं कही है।
डरे हुए हैं ट्रंप के सहयोगी
ईरान बार-बार कह रहा है कि अमेरिका के किसी भी मित्र देश ने यदि हार्मूज जलडमरूमध्य की ओर से गुजरने का साहस किया तो उसकी मिसाइलें समुंद्र में डूबो देंगे। ईरानी मिसाइलें उनका स्वागत करेंगी। ईरान पहले ऐसे कर भी चुका है। इसके अलावा ईरानी मिसाइलों को अमेरिका के मित्र देशों के गैस संयत्रों पर हमलों के बाद अब कोई भी देश अमेरिका के साथ आने की बात नहीं कह रहा है। वहीं दूसरी ओर ट्रंप को भी इजरायल को कहना पड़ा की वह ईरान के गैस संयंत्रों पर हमले करने की गलती ना करे।
ओमान का ट्रंप पर बड़ा हमला लड़ाई को बताया यूएस की विनाशकारी भूल
ओमान के विदेश मंत्री बदर अलबुसैदी ने दावा किया है कि इजरायल ने अमेरिका को ईरान के साथ युद्ध करने के लिए राजी किया। द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, ओमान के मंत्री ने इस संघर्ष को एक गंभीर भूल और विनाशकारी बताया। बदर अलबुसैदी ने द इकोनॉमिस्ट में लिखा, ‘अमेरिका ने अपनी विदेश नीति पर से नियंत्रण खो दिया है और ईरान के साथ संभावित परमाणु समझौते के बावजूद वह इस संघर्ष में खिंच गया।’ओमान के विदेश मंत्री अलबुसैदी ने दावा किया है कि फरवरी में जेनेवा में हुई परमाणु वार्ता के दौरान ईरान और अमेरिका समझौते के करीब थे।