इंटरनेट की अजीब लत पर गजब फैसला

kabir Sharma
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अदालती फैसले का लोग जमकर स्वागत कर रहे हैं, गूगल और मेटा ने कर भी दी है हद, दुनिया के करोड़ों लोगों का किया मानसिक बीमार

नई दिल्ली/लॉस एजलिस। अमेरिकी कोर्ट के इस फैसले की दुनिया भर में तारीफ की जा रही है। लोग कह रहे हैं कि महिला को लगी अजीब ओ गरीब लत पर कोर्ट ने गजब फैसला दिया है। हालांकि दुनिया भर में अपना जाल बिछा चुके मेटा और गूगल ने कोर्ट के इस फैसले पर आपत्ति दर्ज की है। उनका कहना है कि वो इसके लिए कैसे जिम्मेदर हो सकते हैं। साथ ही उन्होंने इस बात का भी अंदेश जताया है कि कोर्ट के इस फैसले से दुनिया भर में उनके खिलाफ एक गलत शुरूआत हो सकती है। वहीं दूसरी ओर यह मुकदमा पहली बार यह जांचने के लिए किया गया था कि क्या बड़ी तकनीकी कंपनियों को उन एप के डिजाइन के लिए उत्तरदायी ठहराया जा सकता है, जिन पर युवाओं के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने का आरोप है?

मेटा, स्नैपचैट और उसकी मूल कंपनी स्नैप इंक, गूगल के यूट्यूब, टिकटाक और उसकी मूल कंपनी बाइटडांस पर संघीय और राज्य अदालतों में हजारों मुकदमे चल रहे हैं। इन कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर अपने प्लेटफार्म को ऐसी विशेषताओं के साथ डिजाइन किया है जो बच्चों और किशोरों को अभ्यस्त बनाती हैं, जिससे मानसिक स्वास्थ्य संकट पैदा होता है।

मेटा व गूगल दोनों बराबर के कसूरवार

अमेरिका के लॉस ऐजलिस की इस कोर्ट ने पूरी दुनिया में नजीर कायम करने वाली अपने फैसले में इंटरनेट मीडिया की लत से जुड़े मुकदमे में मेटा और गूगल को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने केवल यह फैसला ही नहीं सुनाया है बल्कि याचिकाकर्ता कैली जीएम को 60 लाख अमेरिकी डालर का हर्जाना देने का आदेश दिया।

क्या कहती हैं कैली जमी

कैली जीएम 20 साल की हैं और उन्होंने कहा कि इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म के आकर्षक डिजाइन के कारण कम उम्र में ही उन्हें इनकी लत लग गई थी। इसके बाद उन्हें अवसाद ने घेर लिया और आत्महत्या के विचार आने लगे थे। अदालत ने पाया कि मेटा और गूगल दोनों ने अपने प्लेटफार्म को डिजाइन करने में लापरवाही बरती और यूजर को उनके जोखिमों के बारे में चेतावनी देने में विफल रहे। इस सप्ताह मेटा के खिलाफ दूसरा फैसला है। इससे पहले न्यू मेक्सिको में एक जूरी ने फैसला सुनाया था कि कंपनी राज्य कानून का उल्लंघन करते हुए बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को नुकसान पहुंचा रही है। जूरी ने कहा कि मेटा और यूट्यूब को पता था कि उनके प्लेटफार्म का डिजाइन इस तरह का है कि यह नाबालिगों के लिए खतरनाक हो सकता है। इस मामले में टिकटाक और स्नैपचैट ने मुकदमे की सुनवाई शुरू होने से पहले ही समझौता कर लिया था।

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यह है मामला

यह पूरा मामला जो आज पूरी दुनिया में ट्रेंड कर रहा है 20 वर्षीय युवती से जुड़ा है, उसका कहना है कि गूगल के यूट्यूब और मेटा के इंस्टाग्राम के आकर्षक डिजाइन के कारण वह कम उम्र में ही इनकी आदी हो गई थी। यूट्यूब के इस्तेमाल ने उनके अवसाद को बढ़ा दिया। वह छह साल की उम्र से ही दिनभर इंटरनेट मीडिया का इस्तेमाल करती थीं।

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