हाईकोर्ट का पति से वसूली आदेश पर बैरियर

kabir Sharma
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अपर परिवार न्यायाधीश ,परिवार न्यायालय ने पत्नी के पक्ष में दिए थे आदेश, ससुर पर लगाया था छेड़खानी का आरोप, 19 साल पहले शादी तीन बच्चे

नई दिल्ली/इलाहाबाद/मेरठ। हाईकोर्ट ने अपर परिवार न्यायाधीश/परिवार न्यायालय के आदेश पर पति से हर माह पति से किए जाने वाले वसूली आदेश पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने उक्त आदेश को एकतरफा माना है। मोनिका शर्मा पत्नी सौरभ शर्मा निवासी ग्राम नारंगपुर थाना परीक्षितगढ़ जिला मेरठ की ओर से भरण पोषण हेतु दाखिल वाद में एक पक्षीय आदेश 8 दिसंबर 2023 के बाद वसूली हेतु दाखिल इजरा वाद में लगभग 4,50,000 रुपये वसूली आदेश को पति सौरभ शर्मा पुत्र राजपाल शर्मा निवासी गरिमा गार्डन पसवाड़ा थाना टीलामोड जिला गाजियाबाद ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

सुनील चौधरी ने की पैरवी

याची की ओर से अधिवक्ता सुनील चौधरी ने न्यायमूर्ति नंद प्रभा शुक्ला के समक्ष बहस में बताया कि याची का विवाह 17 फरवरी 2009 में हिन्दू रीति रिवाज से सम्पन हुआ था। विवाह के पश्चात 3 बच्चे भी पैदा हुए। पत्नी के द्वारा ससुर पर छेड़खानी व हत्या के प्रयास का मुकदमा वर्ष 2000 में दर्ज कराने के पश्चात ससुर के द्वारा याची व उसकी पत्नी को संपत्ति से बेदखल कर घर से बाहर निकाल दिया ।

पत्नी के द्वारा भरण पोषण वाद में एक पक्षीय आदेश में 8000 रुपये प्रतिमाह भरण पोषण प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने के 24 नवंबर 2021 से अदा करने का आदेश 8 दिसंबर 2023 को पारित किया गया था। याचि यानि पति को जानकारी होने पर आदेश को रिकॉल करने हेतु 24 अप्रैल .2025 को प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया जिस पर न्यायालय ने याची को 2000 रुपये हर्जे तथा 50,000 रुपये एक मुस्त भरण पोषण की धनराशि व विपक्षी को 8,000 रुपये प्रतिमाह वाद के अंतिम निस्तारण तक अंतरिम भरण पोषण भत्ता अदा किए जाने के प्रतिबंध पर रिकॉल प्रार्थना पत्र को स्वीकार किया गया, लेकिन याची ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दिया जिस हाइकोर्ट ने याची को अपना शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया था, लेकिन परिवार न्यायालय के द्वारा उसके आदेश का अनुपालन न करने पर पत्रावली दाखिल दफ्तर कर इजरा की कार्रवाई को अग्रसारित करने का निर्देश दिया गया, जिस पर लगभग साढे चार लाख रुपए की वसूली हेतु अपर प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय के द्वारा वसूली हेतु 2 जनवरी 2026 को आदेश जारी किया गया जिसे यांची ने न्यायालय के समक्ष चुनौती दी। याची अधिवक्ता सुनील चौधरी ने आगे बताया कि याची को बिना सुने ही याची के विरुद्ध उत्पीड़न की कार्यवाही चल रही जबकि याची अपने साथ 3 बच्चो को लेकर मुरादाबाद में किराए के मकान में रहकर किसी तरह गुजर बसर कर रहा ।

ना छोड़ना चाहती ना साथ रहना

याची प्राइवेट नौकरी से लगभग 20 हजार रुपये की आमदनी करके करके अपने 3 बच्चो की फीस ,घर का किराया आदि में कुल रुपये खर्च कर देता है ।पत्नी न साथ रहना चाहती है और न ही छोड़ना चाहती है ।जिस पर न्यायालय ने याची के विरुद्ध वसूली के आदेश पर उत्पीड़न की कार्यवाही पर

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