मेरठ मदरसो में छात्रवृत्ति गवन के आरोपियों की याचिका खारिज, जाना पड़ेगा जेल, खत्म हुई बेल
प्रयागराज/मेरठ। इलाहाबाद हाई कोर्ट में मेरठ में 3 करोड रुपए छात्रवृति गबन के मामले में मदरसा उस्मानिया अरबिया उलउलूम,मेवगढी मजीदनगर मेरठ के प्रिंसिपल शमशाद पर 248 बच्चो के 2,48,000 रुपये छात्रवृति गबन के आरोप और एक अन्य मदरशा जियाउल कुरान परिछित गढ़ ,मेरठ जिसमे शफीक उल हसन प्रधानाचार्य के ऊपर 440 छात्रों की 7,66,000 रुपये गबन का आरोप है जिन्होंने आरोप पत्र व तलब किये जाने के आदेश को 2 अलग अलग याचिका दाखिल कर चुनौती दी ।हाइकोर्ट ने दोनो याचिकाओं को खारिज कर दिया।
यह आदेश न्यायमूर्ति समीर जैन ने याचीगण की ओर से अधिवक्ता अख्तर अली को सुनकर दिया है। याचीगढ़ के अधिवक्ता अख्तर अली ने दलील दी कि उस समय 2010-2011 के छात्रवृत्ति गबन के मामले में कई एफ आई आर हुई थी, जो कोर्ट के आदेश पर आपस मे समाहित हो गई । तत्तकालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सुमनं गौतम व सहायक बाबू संजय त्यागी की देखरेख में उनके निर्देश पर छात्रवृति का वितरण हुआ था । अधिवक्ता अख्तर अली ने दलील दी कि एक अन्य एफआई आर में हाइकोर्ट के आदेश पर संजय त्यागी तत्कालीन बाबू के विरुद्ध चल रही न्यायिक कार्यवाही पर रोक लगाई गई है क्योकि उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही पर हाइकोर्ट के आदेश पर रोक लगी है, उसी आधार पर याचीगण के विरुद्ध भी न्यायिक कार्यवाही पर रोक लगाई जाए और पूरे केस में कही भी कोई भी सबूत नही मिले जिससे पता चल सके कि याचीगण ने कोई अपराध किया है।इसलिए आरोपपत्र व तलबी के आदेश को रद्द किया जाए। सरकार की ओर से जवाब में अपर शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि याचीगण मदरशो में प्रिंसिपल थे इसलिये यह नही कहा जा सकता कि इन्होंने कोई अपराध नही किया है। विवेचना अधिकारी ने विवेचना में पाया कि याचीगण व अन्य अभियुक्तों ने बिना सत्यापन के छात्रवृत्ति गबन की नीयत से फर्जी वितरण दिखा कर छात्रों की पूरी छात्रवृत्ति गबन कर भ्रस्टाचार किया।
दोनों पक्ष को सुनकर न्यायालय ने निष्कर्ष में कहा कि आरोपियों के ऊपर बहुत ही गंभीर छात्रवृत्ति के गबन का आरोप है याचीगढ़ मदरसे में प्रिंसिपल के रूप में थे विवेचना अधिकारी ने कई व्यक्तियों के बयान दर्ज किया जिसमें पाया कि याचीगण बिना भौतिक व प्रपत्रों के सत्यापन किए हुए छात्रवृति का अन्य आरोपियों से मिलकर जो सरकारी सेवक थे छात्रवृत्ति का गबन किया है प्रथम दृष्ट्या यह नहीं कहा जा सकता की आरोपीगणों ने कोई भी अपराध नहीं किया है याचीगणों का कहना कि अन्य आरोपी संजय त्यागी जो की सरकारी सेवक है , उसकी न्यायिक कार्रवाई पर हाई कोर्ट के द्वारा रोक लगाई गई है क्योंकि विभागीय कार्रवाई की अनुमति पर रोक लगी हुई है । इस आधार पर भी याचीगणों को कोई भी लाभ नहीं दिया जा सकता क्योंकि याचीगणो के अनुमति का कोई भी मामला नहीं है। कानून में बहुत ही कम ऐसे केस हैं जहां प्रथम दृष्टया कोई भी अपराध होना नहीं पाया जाता जिस पर प्रारंभिक स्टेज पर ही आरोप पत्र रद्द हो सके ।यह कहते हुए याचीगढो के विरुद्ध ऐसा नहीं कहा जा सकता कि कोई भी अपराध प्रथम दृष्टिया नहीं बनता ,कहते हुए दोनो आरोपियो की याचिका खारिज कर दी।