मोदीनगर, मुरादनगर, सिवालखास, खरखौदा, किठौर पर RLD का दावा संभव, वेस्ट यूपी की राजनीति में अच्छी पकड़, भाजपाई विधायक परेशान
नई दिल्ली। जनता दल यूनाइटेड छोड़कर रालोद में शामिल हुए केसी त्यागी ने मेरठ और आसपास के कई जिलों में भाजपा के कई विधायकों को टेंशन दे दी है। केसी त्यागी को खांटी समाजवादी माना जाता है। साल 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं। वेस्ट यूपी के कई ऐसे गांव हैं जहां त्यागी निर्णायक स्थिति में है। केसी त्यागी के आने का फायदा रालोद को त्यागी बाहुल्य विधानसभा क्षेत्राें में मिलेगा। केसी त्यागी इससे अंजान कतई नहीं। माना जा रहा है कि इसी के चलते वह बेस्ट यूपी के कुछ विधानसभा सीटों पर अपने करीबियों के लिए जयंत चौधरी से सौदा कर सकते हैं।
भाजपा पर साइड इफैक्ट तय
केसी त्यागी के रालोद में शामिल होने के बाद भाजपा को नुकसान की बात कही जा रही है। केवल भाजपा ही नहीं सपा को भी नुकसान की बात कही जा रही है, लेकिन उतना नुकसान नहीं दिख रहा है जितना भाजपा को दिख रहा है। गठबंधन होने के बावजूद वेस्ट यूपी (मेरठ, गाजियाबाद, बागपत आदि) में सीट शेयरिंग और टिकट बंटवारे पर असर पड़ सकता है। BJP खेमे में “टेंशन” की बात महसूस की जा रही है।
आरएलडी को फायदा
राजनीति नजरिये से केसी त्यागी की ज्वाइनिंग से रालोद को फायदा तय माना जा रहा है। केसी त्यागी गाजियाबाद-हापुड़ क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं और जाट/त्यागी समुदाय में अच्छी पकड़ रखते हैं। उनका अनुभव (1989 में सांसद, राज्यसभा आदि) RLD को संगठनात्मक मजबूती देगा। पार्टी को जाट वोट बैंक और किसान वोट में और बढ़ोतरी की उम्मीद। राजनीतिक जानकारी इसको सही भी मान रहे हैं। तमाम ऐसी सीटें हैं जहां जाट व त्यागी निर्णायक हैं। इससे रालोद की सीटें तो बढ़ेंगी लेकिन भाजपा की सीटें कम होने का खतरा है। ” मोदीनगर, मुरादनगर, सिवालखास जैसी सीटों पर RLD का दावा बढ़ सकता है, जिससे BJP के कुछ स्थानीय नेताओं/विधायकों में टेंशन है।