मुस्तफिजुर से मोहबत पड़ी केसी को महंगी

kabir Sharma
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बंगलादेशी खिलाड़ी की पैरवी पर जेडीयू से बाहर, पार्टी ने किया केसी के बयान से किनारा, कुछ दिन पहले नीतीश के लिए मांगा था भारत रत्न

नई दिल्ली/पटना। बिहार की सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड से केसी त्यागी को उठाकर बाहर कर दिया गया है। दरअसल केसी को बंगलादेशी खिलाड़ी मुस्तफिजुर रहमान की पैरवी महंगी पड़ गईं। राजनीति में नीतीश बाबू को मध्यमार्गी माना जाता है। किसी ने सोचा नहीं था कि केसी त्यागी की मुस्तफिजुर रहमान की पैरवी इतनी नागंवार गुजरेगी कि उन्हें सत्ताधारी पार्टी बाहर का रास्ता दिखा देगी। करीबियों का कहना है कि बात इतनी बड़ी भी नहीं थी कि संगठन से ही बाहर का रास्त दिखा दिया। केसी को जेडीयू से बाहर करने की जानकारी प्रवक्ता राजीव रंजन ने दी और कहा कि केसी से अब कोई औपचारिक संबंध नहीं है और उनके बयान पार्टी की आधिकारिक राय नहीं माने जाएंगे। यह फैसला ऐसे समय आया है जब त्यागी ने हाल ही में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए भारत रत्न की मांग की थी, जिसे पार्टी ने उनकी ‘व्यक्तिगत राय’ बताकर दूरी बना ली।

राष्ट्रीय महासचिव रहे चुके हैं केसी

केसी त्यागी, जो कभी जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव और प्रवक्ता रह चुके हैं, लंबे समय से पार्टी के संकटमोचक माने जाते थे। लेकिन पिछले कुछ महीनों में उनके बयानों ने पार्टी को असहज कर दिया था। जेडीयू के सूत्रों के मुताबिक, त्यागी की निष्कासन की कई वजह हैं। बताया जाता है कि उनका नीतीश के लिए भारत रत्न मांगना भी खला है। इसके लिए उन्होंने पीएम का खत तक लिख डाला था। यह मांग नीतीश कुमार को भी पसंद नहीं आई, क्योंकि यह उनके ‘विनम्र’ इमेज के विपरीत थी। आईपीएल में बांग्लादेशी गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को खेलने की अनुमति देने की वकालत की थी। उन्होंने कहा था कि ‘खेल और राजनीति को अलग रखना चाहिए’ और बांग्लादेश ने एक हिंदू को अपना कप्तान बनाया है।

ये नाराज थे केसी से

सत्ताधारी दल जेडीयू के शीर्ष नेतृत्व, जिसमें संजय झा और ललन सिंह जैसे नेता शामिल हैं, त्यागी की ‘स्वतंत्र’ बयानबाजी से नाराज थे। त्यागी अक्सर टीवी डिबेट्स में बीजेपी को घेरते नजर आते थे, जो एनडीए गठबंधन के लिए मुश्किलें पैदा कर रही थीं, जिसके बाद केसी त्यागी को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

अब क्या करेंगे केसी त्यागी

केसी त्यागी का राजनीतिक सफर काफी लंबा और उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में जन्मे त्यागी ने 1970 के दशक में छात्र राजनीति से शुरुआत की। वे जनता दल, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी जैसी पार्टियों से जुड़े रहे। 2013 में जेडीयू में शामिल हुए और जल्द ही नीतीश कुमार के करीबी बन गए। वे राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं। लालू यादव की पार्टी आरजेडी में त्यागी की एंट्री संभव है। आरजेडी की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका भारती ने त्यागी के निष्कासन पर टिप्पणी की है, जिसमें उन्होंने जेडीयू की आलोचना की। त्यागी के बीजेपी-विरोधी बयान आरजेडी की विचारधारा से मेल खाते हैं। सूत्रों का कहना है कि लालू परिवार त्यागी को राज्यसभा भेज सकता है। केसी का पुराना जुड़ाव एसपी से है। अखिलेश यादव उन्हें यूपी में मजबूत कर सकते हैं। या फिर कांग्रेस में शामिल होकर राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका निभा सकते हैं। निष्कासन के बाद त्यागी की अगली चाल पर सबकी नजरें टिकी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केसी ज्यादा समय बिना पार्टी के नहीं रहेंगे।

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बिहार में राजनीतिक हलचल

जेडीयू के इस फैसले से बिहार की राजनीति में हलचल मच गई है। नीतीश कुमार की छवि पर इसका क्या असर पड़ेगा, यह आने वाला समय बताएगा। फिलहाल, त्यागी ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन उनके करीबियों का कहना है कि वे जल्द ही अपना अगला कदम उठाएंगे।

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