देश के इतिहास में पहली बार, टीएमसी कर रही है लीड, कांग्रेस समेत तमाम विपक्ष दे रहा है समर्थन
नई दिल्ली। देश और खासतौर से चुनाव आयोग के इतिहास में यह पहली बार होगा जब किसी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाअभियोग लाया जाएगा, लेकिन ऐसा पक्की तौर पर होने जा रहा है। पूरा विपक्ष मिलकर यह करेगा। इम्पीचमेंट यानि महाअभियोग को लीड टीएमसी कर रही है और कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष का टीएमसी को साथ मिल रहा है। बताया जाता है कि CEC को सुप्रीम कोर्ट जज की तरह हटाया जा सकता है (Article 324(5)) – “प्रूवन मिसबीहेवियर या इनकैपेसिटी” पर। मोशन किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) में पेश हो सकता है। यदि ऐसा हो गया तो यह देश के इतिहास में बड़ी घटना होगी।
राज्यसभा में लाया जा सकता है
(CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इम्पीचमेंट को लेकर बुलायी गयी विपक्षी दलों की बैठक में टीएमसी के सताब्दी रॉय ने प्रस्ताव रखा। TMC MP सौगत रॉय ने कहा – “हम कुछ दिनों में राज्यसभा में इसे लाएंगे।” कांग्रेस और अन्य दल समर्थन दे रहे हैं। इस प्रस्ताव को लेकर आम आदमी पार्टी भी कम उत्साहित नहीं। आम आदमी पार्टी का कहना है कि नजीर पेश की जानी चाहिए।
पर्याप्त हैं आधार
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाअभियोग प्रस्ताव लाए जाने को लेकर टीएमसी ने दावा किया है कि इसके पर्याप्त आधार हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त पर सबसे बड़ा आरोप Special Intensive Revision (SIR) में पक्षपात – पश्चिम बंगाल में 58-62 लाख वोटर्स डिलीट/अडजुडिकेशन लिस्ट में, जो TMC के अनुसार “वोट चोरी” और “मतदाता अधिकारों पर हमला” है। विपक्ष कहता है कि CEC “पूरी तरह पक्षपाती” हैं और ECI ने संवैधानिक कर्तव्य निभाने में विफल रहे। वह इस संवैधानिक पद पर रहने के काबिल नहीं हैं। वह भाजपा के कार्यकर्ता की भांति काम कर रहे हैं। यह शर्मसार करने वाला है।
सदन में स्थिति
लोकसभा में 100 MPs और राज्यसभा में 50 MPs के हस्ताक्षर जरूरी। पास होने के लिए स्पेशल मेजॉरिटी (टोटल मेंबरशिप का बहुमत + मौजूद और वोटिंग में 2/3) चाहिए। NDA के पास बहुमत होने से पास होने की संभावना बहुत कम है – यह राजनीतिक प्रेशर/प्रदर्शन ज्यादा है।