काली पट्टी बांधकर मनाया विरोध दिवस, निजीकरण के विराेध में 12 को देश भर में हड़ताल, निजीकरण से बाज आए सरकार
नई दिल्ली/लखनऊ/मेरठ। बिजली के निजीकरण के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर बिजली कर्मियों ने नए साल का स्वागत विरोध प्रदर्शन कर किया। वहीं दूसरी ओर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने 12 फरवरी को राष्ट्र व्यापी हड़ताल का एलान किया है। हड़ताल में लाखाें कर्मचारी शामिल होंगे। संयुक्त संघर्ष समिति ने सरकार से निजीकरण से बाज आने को कहा है। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण के प्रयासों को नहीं रोका गया तो इसके दूरगामी और घातक परिणाम सामने आएंगे जिसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 से पीछे हटे सरकार
संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक आलोक त्रिपाठी ने बताया कि बिजली के निजीकरण के विरोध में 12 फरवरी को सभी कर्मचारी राष्ट्रव्यापी हड़ताल में शामिल होंगे। उप्र के बिजली कर्मचारियों ने नए साल के पहले दिन बिजली कर्मियों ने काली पट्टी बांध कर “विरोध दिवस” मनाकर किया। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने ऐलान किया है कि उप्र में बिजली के निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के विरोध में आगामी 12 फरवरी को होने वाली राष्ट्रव्यापी हड़ताल में अकेले उत्तर प्रदेश से ही एक लाख से अधिक बिजली कर्मी सम्मिलित होंगे। निजीकरण के विरोध में लगातार चल रहे आंदोलन के 400 दिन पूरे होने पर आज बिजली कर्मियों ने काली पट्टी बांध कर प्रदेश भर में “विरोध दिवस” मनाया।
देश भर के सत्ताइस लाख कर्मचारी
नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स ने यह निर्णय लिया है कि उप्र में चल रही बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया रद्द कराने और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के विरोध आगामी 12 फरवरी को देश के 27 लाख बिजली कर्मी एक दिन की हड़ताल करेंगे। आलोक त्रिपाठी ने बताया कि संघर्ष समिति की कोर कमेटी की मीटिंग में यह निर्णय लिया गया कि निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में चल रहा विरोध प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता।
छह महापंचायतों का एलान
संघर्ष समिति के आलोक त्रिपाठी ने बताया कि निर्णय लिया कि 12 फरवरी की प्रस्तावित हड़ताल की तैयारी हेतु जनवरी माह में प्रदेश में छह बिजली महापंचायत आयोजित की जाएगी। बिजली महापंचायत वाराणसी, ओबरा/अनपरा,आगरा, केस्को, मेरठ और लखनऊ में होगी। बिजली महापंचायत में बिजली कर्मियों के साथ किसान, आम उपभोक्ता और केन्द्रीय ट्रेड यूनियन भी सम्मिलित होंगे। जनवरी माह में संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारी निजीकरण के विरोध में प्रांत व्यापी सघन दौरा करेंगे।
संघर्ष समिति ने कहा कि 25 नवंबर 2024 को पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का एकतरफा निर्णय घोषित कर पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन ने ऊर्जा निगमों में कार्य का वातावरण पूरी तरह बिगाड़ दिया है। बिजली कर्मी संघर्ष में उपभोक्ताओं के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता पर अटेंड कर रहे हैं। अब समय आ गया है जब पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन को निजीकरण का निर्णय निरस्त कर आंदोलन के फलस्वरूप की गई समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस लेना चाहिए। बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर काली पट्टी बांध कर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया।
नोट
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