जंग के चलते तेल व गैस संकट आसन्न, प्रशासन का नहीं कोई कमी का दावा, फिर भी ब्लैक में दो हजार का एलपीजी रसोई गैस सिलेंडर,
नई दिल्ली/मेरठ। ईरान की अमेरिका और इजरायल से चल रही लड़ाई के चलते रसोई गैस और तेल संकट आसन्न है। तेल संकट का असर अभी जमीन पर तो नजर नहीं आ रहा है। मसलन अभी पुराने ही रेटों पर पंपों पर तेल मिल रहा है और मारामारी सरीखे हालात नहीं है, लेकिन डर बना हुआ है। रसोईगैस को लेकर ऐसा कुछ नहीं कहा जा सकता क्योंकि रसोईगैस का संकट बना हुआ है। शासन प्रशासन का दावा कोई कमी नहीं का है, जब कोई कमी नहीं है तो फिर क्यों ब्लैक में दो हजार तक खर्च करना पड़ रहा है। इसके इतर पंपों पर क्यों लंबी-लंबी कतारें लगी हैं। कुछ तो है जिसकी पर्दादारी की जा रही है।
आम आदमी पर सीधा असर
ईरान के साथ चल रही लड़ाई का असर अब सीधा आम आदमी पर पड़ने लगा है। और रसोईगैस तो घर में यूज की जाने वाली ऐसी चीज है जिसके बगैर गुजारा ही नहीं भले ही ब्लैक में ही क्यों ना लेनी पड़े। क्योंकि अब रसोई के नाम पर चूल्हा या फिर अंगीठी बूते से बाहर की बात है। काम तो गैस से ही चलना है और जो मिल नहीं रही है।
एलपीजी सिलंडरों को लेकर मारामारी
लड़ाई के असर की शुरूआत गैस से हुई है। देशभर में (खासकर UP, Bihar, Delhi-NCR, Maharashtra आदि में)। एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें, कालाबाजारी (1883 का सिलेंडर 2500+ में बिक रहा)। कई इलाकों में PNG/CNG भी प्रभावित हो रहे हैं। जबरदस्त मारामारी मची है। समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें। शासन और प्रशासन यहां तक कि केंद्र के स्तर से भी गैस की कोई कमी ना होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन गैस ऐजेंसियों पर लगी कतारे कुछ और ही कह रही हैं।