भाजपा में रहे, लेकिन खटते रहे खरी-खरी कहने वाले खांटी जाट नेता, मेरठ कालेज से शुरूआत, कई राज्यों के रहे राजपाल
नई दिल्ली। वेस्ट यूपी के प्रसिद्ध मेरठ कालेज से राजनीतिक सफर की शुरूआत कर कई राज्यों के राज्यपाल रहे सतपाल मलिक का यूं दुनिया के विदा हो जाना उनके करीबियों और खासतौर से वेस्ट यूपी के जाटों को बहुत खटक रह है। वह काफी अरसे से बीमार चल रहे थे, दिल्ली के बड़े हास्पिटल में एडमिट थे। उनका राजनीतिक सफर कई बड़े राजनीतिक दलों से होता हुआ अंत में भाजपा में खत्म हुआ, लगभग सभी दलों में रहे. उन्होंने लोकदल से लेकर जनता दल और समाजवादी पार्टी होते हुए बीजेपी का दामन थामा, लेकिन किसी दल के दायरे में सिमटकर नहीं रह सके। चौधरी चरण सिंह और वीपी सिंह के वह बहुत करीबियों में गिने जाते थे। लेकिन वो हमेशा ही भाजपाइयों की आंखों में खटका करते थे। चिर निद्रा में लीन होने से पहले सतपाल मलिक ने जो खुलासे किए थे, खासतौर से जम्मु-कश्मीर में आतंकी वारदातों के संदर्भ में उन खुलासों ने पीएमओ तक को कठघरे में खड़ा कर दिया, यह बात अलग है कि भाजपा के आईटी सेल और नेशनल गोदी मीडिया के चलते उन खुलासों को दफन कर दिया गया, बल्कि इनकी कारगुजारियों की वजह से उल्टे सतपाल मलिक पर ही सवाल खड़े किए गए। आज सतपाल मलिक दुनिया से विदा हो गए, लेकिन उनको लेकर जो उनके करीबी रहे हैं वो भले ही उनके धुर विरोधी हो, उनके अफसाने जरूर सुना रहे हैं। जानकारों की मानें तो वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। दिल्ली के आरएमएल अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली। दोपहर 1 बजकर 12 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके सहयोगी कंवर सिंह राणा ने निधन की पुष्टि की है। आज मंगलवार को कंवर सिंह राणा ने बताया कि पूर्व राज्यपाल ने दोपहर 1 बजकर 12 बजे दिल्ली के आरएमएल अस्पताल में अंतिम सांस ली।

उनके निधन पर कांग्रेस जाट नेता चौधरी यशपाल सिंह, शहर कांग्रेस के अध्यक्ष रंजन शर्मा प्रभाकर, जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष व AICC के अवनीश काजला, भाकियू टिकैत के राजकुमार शर्मा समेत तमाम लोगों ने दुख व्यक्त किया। उन्हें श्रद्धांजली दी है।