करीब चार लाख भवनों से 150 करोड़ की रिकबरी का टारगेट, नगरायुक्त ने फिल्ड में उतरा हुआ है नगर निगम का पूरा अमला,म
दी कॉन्टीनेंटल सबसे बड़ा कर्जदार, मामला कोर्ट में विचाराधीन होने के चलते रोकी गई रिकबरी, महानगर के सभी वार्डों में रिकबरी के लिए रिकबरी शिविर
मेरठ। नगर निगम क्षेत्र के करीब चाल लाख भवनों से डेढ़ करोड़ रुपए की रिकबरी का लक्ष्य तय किया गया है। इसमें से अस्सी फीसदी टारगेट ३१ मार्च तक पूरा कर लिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर नगरायुक्त सौरभ गंगवार ने हाउस टैक्स रिकबरी के लिए नगर निगम का पूरा अमला मैदान में उतारा हुआ है। रिकबरी का लक्ष्य हासिल करने के लिए निगम के गृहकर मित्र तथा दूसरा स्टाफ सभी वार्ड में कैंप लगा रहे हैं। निगम के टैक्स अफसरों का प्रयास शतप्रतिशत लक्ष्य हासिल करने का है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि अस्सी फीसदी हर दशा में हासिल कर लिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर निगम के सबसे बड़े हाउस टैक्स कर्जदार की बात की जाए तो वो मोदी कान्टीनेंटल है, हालांकि मामला कोर्ट में विचाराधीन होने के चलते रिकबरी की कार्रबाई अभी रोकी हुई है।
पार्षदों लगवा रहे हैं कैंप
तमाम पार्षद अपने वार्ड में जिन मामलों को भवन स्वामी विवादित टैक्स बता रहे हैं उनके समाधान के लिए कैंप लगवा रहे हैं। इनमें हाउस टैक्स का स्टाफ पहुंच रहा है। इससे भवन स्वामी और निगम के स्टाफ को भी राहत मिल रही है। दरअसल हो यह रहा है कि ज्यादातर मामलों में सालों से टैक्स नहीं जमा किए गए हैं और जब नगरायुक्त ने रिकबरी को लेकर सख्ती की और ताबड़तोड़ बिल पहुंचने शुरू हो गए तो तमाम भवन स्वामी इन बिलों को लेकर नगर निगम पहुंचने शुरू हाे गए। मुख्य कर निधार्रण अधिकारी शिव कुमार गौतम के ऑफिस में ऐसे दिन भर में ऐसे सैकड़ों मामले पहुंचने लगे। लेकिन सबसे बड़ी मुसीबत तब हुई जब चीजों को समझाने के बाद भी भवन स्वामी चीजों को समझने के बजाए हाउस टैक्स गलत भेजे जाने की रट लगाए रहे और बिल कम किए जाने पर जोर देते रहे। ऐसे तमाम भवन स्वामी जिनमें महिलाओं की संख्या अधिक है मुख्य कर निधार्रण अधिकारी के कक्ष में पहुंचने लगीं। इसके चलते बाकि के काम बुरी तरह से प्रभावित होने लगे। उसके निगम प्रशासन ने वार्ड स्तर पर हाउस टैक्स की शंका के समाधान कैंपों का आयोजन शुरू किया।
निगम स्टाफ रहता है मौजूद
इन कैंपों में संबंधित वार्ड के पार्षद या फिर इलाके का कोई प्रभावशाली शख्स अपने साथ निगम के स्टाफ को लेकर बैठता और भवन स्वामियों की शंका का समाधान किया जाता। शिव कुमार गौतम ने बताया कि इस प्रकार के कैंप नियमित रूप से लगवाए जा रहे हैं, ऐसा लोगोंं की मदद के मकसद से नगरायुक्त ने व्यवस्था बनायी है ताकि उन्हें नगर निगम तक ना आना पड़े और उनकी समस्या का समाधान उनके घर के द्वार पर ही हो जाए। इस कार्य की निगरानी टीएस कर रहे हैं और इसमें गृहकर मित्र व दूसरे लिपिक मौजूद रहते हैं। लेकिन इस व्यवस्था के किए जाने के बाद भी बड़ी संख्या में लोग नगर निगम पहुंच रहे हैं। ऐसे ही लोगोंं की वजह से शत प्रतिशत टैक्स टारगेट रिकबरी में कुछ कमी की बात कही जा रही है, लेकिन उसके बाद भी अस्सी फीसदी से अधिक रिकबरी तय मानी जा रही है।
अनमैच बिल लगा रहे निगम को फटका
जीआईएस सर्वे के बाद तमाम ऐसे हाउस टैक्स बिल भी भेजे गए हैं जो निगम को तगड़ा फटका लगा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर जीआईएस सर्वे के बाद किसी को अनमैच बिल एक हजार का भेजा गया, लेकिन जब जीआईएस सर्वे के आधार पर संशोधित बिल भेजा गया तो वह पांच हजार से ज्यादा का बैठा। ऐसे एक सो या सौ पचास मामले नहीं बल्कि इनकी संख्या हजारों में है। ऐसे तमाम बिलों को ठीक कराए जाने के निर्देश संबंधित लिपिकों दिए गए हैं।
बढ़े हुए बिल देखकर दौड़ रहे निगम
महानगर के तमाम वार्डों में जहां जीआईएस सर्वे के बाद बढ़े हुए बिल भेजे गए हैं उन बिलों को देखकर गृहकर स्वामियों की सिटीपिटी गुम है। इन बिलों को लेकर ये लोग सीधे मुख्य कर निधार्रण अधिकारी शिव कुमार गौतम के कक्ष तक दौड़ लगा रहे हैं। नौबत यही तक होती तो भी गनीमत थी। मुसीबत इससे भी ज्यादा यह है कि आपत्तियां लेकर पहुंंचने वाले समझने को तैयार नहीं कि जीआईएस सर्वे के बाद शासन के निर्देश पर बढ़े हुए बिल भेजे जा रहे हैं। यह सारा कार्य लखनऊ में बैठे अफसरों की निगरानी में हुआ है। इसमें किसी प्रकार की छूट या कम किए जाने की गुंजाइश नहीं है। पूरा दिन इसी तरह के मामलों से माथापच्ची में गुजर रहा है। लेकिन ऐसे मामले अभी तो कम होते नजर नहीं आ रहे हैं।
पुराने बकाए पर नहीं कोई राहत
बड़ी संख्या में ऐसे भी भवन स्वामी नगर निगम पहुंच रहे हैं जिन्होंने कई साल से या फिर एक बार भी बिल जमा नहीं कराया है। उनके पुराने बिल जमा करने की अंतिम तिथि 31 मार्च 2025 जो निगले हुए एक साल बीत चु का है। ऐसे भवन स्वामी चाहते हैं कि उनको राहत दी जाए लेकिन मुख्य कर निधार्रण अधिकारी ने साफ कर दिया है कि किसी भी पुराने बिल पर किसी प्रकार की छूट का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे बिलों की पूरी रकम जमा करनी होगी। लेकिन ज्यादातर लोग इसको समझने को तैयार नहीं।
पचास हजार से ज्यादा के डिफाल्टर बड़ी संख्या में
हाउस टैक्स के ऐसे डिफाल्टरों की संख्या काफी ज्यादा है जिन पर नगर निगम की पांच हजार से ज्यादा की रकम बकाया है। इनको बार-बार नोटिस भेजे जा रहे हैं, हालांकि ऐसे लोगों की संख्या काफी ज्यादा है जिन्होंने बिलों को जमा किया है। लेकिन इसके बाद भी बड़ी संख्या ऐसे बकाएदारों की है जिन पर निगम की पचास हजार से ज्यादा की रकम बकाया है।