
योग विज्ञान संस्थान का होली उत्सव, नाटिका का भावपूर्ण मंचन, योग को बताया जीवन को जीने की कला
मेरठ। योग विज्ञान संस्थान, पूर्वी जिला मेरठ द्वारा रंगा रंग होली उत्सव “फागफुहार” कार्यक्रम का आयोजन सात फेरे बैंक्विट हाल में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. सम्यक जैन एवं विशिष्ट अतिथि डॉ. वाचसमति मिश्र मेरठ कालेज संस्कृत विभागाध्यक्ष द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। मंच संचालन जिला मंत्री अक्षमा एवं कर्मठ योग साधिका इंद्रा राजवंशी ने किया।
योग संस्थान, पूर्वी जिले के विभिन्न केंद्रों से सैकड़ों की संख्या में साधकों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति की रंगारंग प्रस्तुतियां दी गईं, जिनमें हास्य गीत, नृत्य, योग-प्रस्तुतियां तथा योगिक चुटकुलों से हंसी की फुहारों ने सभी का मन मोह लिया।
नाटिका का मंचन
मीनू शर्मा टोली बी ए वी योग केंद्र द्वारा चीर हरण के दौरान द्रोपदी की भावपूर्ण पुकार पर भगवान कृष्ण द्वारा मदद के दृश्य का नाटिका द्वारा मंचाकन किया गया। अनिता शर्मा करण पब्लिक स्कूल योग केंद्र की साधिका द्वारा होली के फागुन पर्व पर फूलों के माध्यम से भावपूर्ण प्रस्तुति दी गई। रेखा गुप्ता आर्य समाज योग केंद्र की टोली और उनके साधकों द्वारा भगवान शिव के फक्कड़ भोले रूप का नाटिका के माध्यम से मंचन किया गया। संतोष वाटिका योग केंद्र की सारिका सिंघल टोली ने हास्य नाटिका द्वारा कार्यक्रम में खुशियों के रंगों से सबको सरोबार कर दिया।
फाल्गुन की मस्ती
लालकुर्ती योग केंद्र की साधिका सोनिया गोयल ने फाल्गुन की मस्ती में सबको अपने नृत्य से प्रभावित कर दिया। कार्यक्रम में योग संस्थान के प्रांतीय प्रधान प्रदीप गुप्ता, उत्तरी जिले के मंत्री महेश जोशी, एवं उनके जिले से लोकेश जी, अनु गोयल जी दक्षिणी जिले के प्रधान जेपी गर्ग ने अपनी गरिमाई उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाईl होली की मस्ती में सरोबार सैकड़ो योगियों ने फूलों की होली खेली। पूर्वी जिले के प्रधान सुनील सैन ने बताया कि योग द्वारा मन एवं तन प्रफुल्लित रहता है , जीवन रंगीन और सुखद लगता है।
योग जीवन जीने की कला
डॉ. सम्यक जैन ने बताया कि योग जीवन जीने की कला है, जिससे तन-मन स्वस्थ रहने में बहुत सहायता मिलती है। डॉ वाचसमति ने कहा कि होली उत्सव भारतीय संस्कृति का ऐसा पर्व है जो जीवन को रंगों से भर देता है।
संस्थान के पूर्वी जिले के साधकों ने अपने सांस्कृतिक गीत, संगीत व नृत्य-नाटिकाओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति की आध्यात्मिक विरासत को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में राजेन्द्र कुमार, विपुल सिंघल, देवकरण गर्ग, लोकेश, प्रकाश, सतीश, रोहित, सुनीती, प्रिंस, सारिका आदि का विशेष सहयोग रहा। यह जानकारी विपुल सिंहल सात फेरे ने दी।