ईरान से अमेरिका व इजराइल के युद्ध के साइड इफैक्ट, तेल के दाम पहुंच रहे आसमान पर, दामों में 45 फीसदी तक का आया उछाल
नई दिल्ली/तेहरान/तेलअबीब/न्यूयार्क। ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के पांचवें दिन दुनिया भर के बाजारों में दहशत का माहौल है। निवेशकों के करोड़ों करोड़ डूब रहे हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें। निवेशकों की मानेंं तो बाजार से अपनी मनी को निकालना कोई उपाय नहीं, बल्कि इससे बाजार और डूब जाएगा। इसलिए वो चाहते हैं कि किसी भी कीमत पर युद्ध खत्म होना चाहिए, लेकिन जो हालात बने हुए हैं उनके चलते अब अमेरिका को समझ में आ गया है कि यह दो तीन दिन तक लड़ने वाला ईरान नहीं रहा है। इस बार ईरान की तैयारियों को अमेरिका और इजरायल पहले से समझ नहीं सके और युद्ध में फंस गए हैं। इजरायल अब तक भारी नुकसान उठा चुका है।
दुनिया के बाजारों पर बुरा असर
लड़ाई का दुनिया के बाजारों पर बुरा असर पड़ रहा है। स्टॉक मार्केट क्रैश हो रहे हैं। एशिया में पैनिक, कोरियन स्टॉक्स सबसे ज्यादा गिरे हैं। इसके अलावा अब तक हजारों फ्लाइट्स कैंसल, अमेरिकी नागरिक मिडिल ईस्ट में फंसे हुए हैं। ऑयल फैसिलिटी पर अटैक से एनर्जी क्राइसिस गहरा रही है। इसके लिए ट्रंप को जिम्मेदार ठहराया जा रह है।
यूएन में ट्रंप की फजीहत
चीन और रूस ने एनएन की इमरजैंसी मिटिंग कराकर ट्रक की बुरी फजीहत की। उन्होंने दुनिया को बताया कि ईरान के पास एटमबम के कोई सबूत नहीं मिले हैं। ट्रंप जो कुछ कह रहे हैं वो बकवास से ज्यादा कुछ नहीं। अब आम लोग कहने लगे हैं जो अमेरिका ने जो कुछ झूठ ईराक के बारे में दुनिया को परोसा था वहीं झूठ अब ईरान के बारे में अमेरिका दुनिया के सामने परोस रहा है।
अमेरिकी सांसदों के निशाने पर ट्रंप
अमेरिकी संसद कांग्रेस के तमाम सदस्य खासतौर से डेमोक्रेट्स के निशाने पर प्रेसीडेंट ट्रंप हैं। इसके अलाव अमेरिका की करीब साठ फीसदी जनता ईरान से युद्ध के पक्ष में नहीं है। अमेरिका में ट्रंप की इमेज युद्ध अपराधी सरीखी बन गयी है। यूएस सिनेटर्स खासतौर से डेमोक्रेटस खासकर डेमोक्रेट्स चिंतित हैं कि युद्ध लंबा खिंचेगा और “boots on the ground” (जमीनी फौज) की जरूरत पड़ सकती है। ट्रंप ने कहा है कि “big one is coming” और US नेवी टैंकरों की एस्कॉर्ट करेगी। इसमें खर्च के अलावा अमेरिकी फौजियों का बड़ी तादात में मरना तय माना जा रहा है। सबसे बड़ी मुसीबत तो इजरायल के साथ है। अब उसको हिजबुल्ला से भी लड़ना पड़ रहा हे। आम इजरायली इसके सख्त खिलाफ हैं।
अमेरिकी फौजियों के लिए खोले नर्क के द्वारा
अमेरिकी धमकियों पर तीखी प्रतिक्रिया ईरानी की सेना के अफसर व्यक्त कर रहे हैं। ईरान की IRGC के अफसरों ने अमेरिका को धमकी दी है कि “gates of hell” खुलेंगे और “biggest-ever strike” जल्द आएगा। जर्मनी के चांसलर मेर्ज़ ने ट्रंप से मुलाकात की, “day after” की बात की। रूस-चीन ने UN में हमलों की निंदा की।यह युद्ध अब मिडिल ईस्ट से आगे फैल रहा है और WW3 जैसी आशंकाएं बढ़ रही हैं। दुनिया के तमाम देश इससे डरे हुए हैं। गल्फ में जो अमेरिका के मित्र देश हैं वो लड़ाई को ट्रंप का पागलपन बता रहे हैं।