नई दिल्ली/ देहरादून। पुलिस कस्टडी में मौत का सिलसिला उत्तराखंड में थमता नजर नहीं आ रहा है। कार्रवाई के नाम पर जांच के आदेश और लाइन हाजिर। एक भी मामला ऐसा नहीं है जिसमें जांच के बाद किसी को कसूरवार ठहरा कर सजा दिलायी गयी हो। या कोई जांच नतीजे पर पहुंची हो। जो हालत बने हुए हैं उसके चलते धामी की पुलिस और पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। जिनके अपनों की मौत पुलिस कस्टडी में हो रही है वो भी सवाल पूछ रहे हैं कि यह सिलसिला आखिरकार थमेगा तो कब। ताजा मामला पीआरडी जवान सुनील रतूडी का है जिसकी कस्टडी में मौत हो गयी है। पुलिस इसको आत्महत्या तो परिवार वाले हत्या बता रहे हैं।
हर बार की तरह फिर वही पुरानी कहानी
पुलिस कस्टडी में पूर्व में हुई मौत की घटनाओं की तर्ज पर पुलिस भी इसको हदसा यानि आत्महत्या का हादसा बता रही है। फिर सवाल उठता है कि यदि आत्महत्या की गयी है तो फिर थानाध्यक्ष समेत चार पुलिस वालों को लाइन हाजिर क्याें कर दिया गया। दरअसल उत्तराखंड में पुलिस कस्टडी में हर एक मौत के बाद लाइन हाजिर की रिवायत हो गयी है। इस प्रकार की कार्रवाई पर सवाल उठाने वालों का आरोप है कि लाइन हाजिर यानि दोषी पुलिस वालों को बचाने की स्क्रिप्ट।
यह है पूरा मामला
मृतक युवक सुनील रतूड़ी (45 वर्ष) प्रांतीयक्षक दल (पीआरडी) के युवा कल्याण विभाग में तैनात कर्मचारी था। पुलिस को इलाके में झगड़े की सूचना मिली थी, जिसके बाद टीम मौके पर पहुंची और संबंधित युवक को हिरासत में लिया गया। बताया गया कि वह पास के किसी पेट्रोल पंप पर नकली पिस्टल से वहां के कर्मचारियों को धमका रहा था। युवक नशे की हालत में था और सार्वजनिक रूप से उपद्रव कर रहा था। इसी आधार पर पुलिस ने उसे ड्रिंक एंड ड्राइव और झगड़े के मामले में पकड़कर थाने की हवालात में बंद कर दिया था। पुलिस ने जो कहानी तैयार की है उसके मुताबिक हिरासत के दौरान युवक ने हवालात के भीतर ही आत्मघाती कदम उठा लिया। उसने हवालात में रखे कंबल को फाड़ा और गले मे फंसा लिया। घटना का पता चलते ही पुलिस कर्मियों में अफरा-तफरी मच गई और तत्काल उच्च अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई।घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है। हालांकि परिवार वाले इसको हत्या करार दे रहे हैं।