जिंदगी ना मिलेगी दोबारा, इसलिए शुगर वाले बेहद सावधानी बरते, शुगर उन्हें अंधा भी कर सकती है, इंसुलिन के साइड इफैक्ट बहुत ज्यादा हैं।
नई दिल्ली। यदि आपको शुगर है ताे सावधान रहें। आप अंधे हो सकते हैं या फिर जान भी जा सकती है। सोते-सोते भी अचानक सांसें रूक सकती हैं। परिजनों को जब तक पता चलेगा तब तक आप दूसरी दुनिया में पहुंच चुके होगे। ये बात डराने की नहीं बल्कि सावधान करने के लिए है। क्योंकि जिंदगी ना मिलेगी दोबारा। दरअसल में मधुमेह के बढ़ते मरीजों के साथ अंधत्व का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। एक अध्ययन में सामने आया है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 100 मधुमेह रोगियों में 30 को अंधत्व की बीमारी मिल रही है। जिसे डायबिटिक रेटिनोपैथी कहते हैं। शुगर लेवल अनियंत्रित रहने पर इसके लक्षण उभर रहे हैं। धुंधला दिखाई देने पर आंखों की रेटिना की जांच में बीमारी पकड़ में आ रही है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह है कि मधुमेह रोगियों को हर तीसरे महीने आंखों की जांच करानी चाहिए। यह अध्ययन लाला लाजपत राय मेडिकल कालेज के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डा. अरविंद कुमार ने किया है। फरवरी से जुलाई तक चले अध्ययन में 400 मधुमेह रोगियों में से 120 में डायबिटिक रेटिनोपैथी पायी गई। 30 प्रतिशत को यह बीमारी मिलीं। ये मरीज पांच से 10 साल से मधुमेह से पीड़ित हैं। इनकी उम्र 40 से 60 साल के बीच है। अधिकांश टाइप-2 मधुमेह से पीड़ित हैं। इन मरीजों का शुगर लेवल अनियंत्रित और रक्तचाप भी बढ़ा हुआ पाया गया। उक्त रोगी आंखों से धुंधला दिखाई देने पर मेडिसिन विभाग की ओपीडी पहुंचे थे। रेटिना क्लीनिक में नेत्र रोग विशेषज्ञों की जांच में मरीजों की आंख के पर्दे में खून के धब्बे, सूजन और मोतियाबिंद की स्थिति पायी गई। जो डायबिटिक रेटिनोपैथी के लक्षण हैं। इन मरीजों का उपचार मेडिसिन और नेत्र रोग विभाग मिलकर कर रहे हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों का कहना है कि लंबे समय तक शुगर अनियंत्रित रहने पर रेटिना की रक्त वाहिकाओं की दीवारें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। रक्त प्लाज्मा का रिसाव होने से रेटिना में सूजन आ जाती है। रक्त वाहिकाओं के अवरुद्ध होने से रेटिना के ऊतकों में रक्त और आक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है। जिससे दिखना कम होने लगता है।
ये सावधानियां बेहद है जरूरी
हर तीसरे महीने शुगर, रेटिना, किडनी फंक्शन, ईसीजी जांच अनिवार्य रूप से कराएं। शुगर नियंत्रित रखने के लिए नियमित व्यायाम, योगा व संतुलित खानपान अपनाएं। एक साथ अत्यधिक भोजन व खाली पेट रहना दोनों ही नुकसानदायक है। दिन में भोजन तीन से चार बार में करें। थोड़ा-थोड़ा खाएं। खाने में फल और सलाद जरूर लें। मीठे फलों का सेवन न करें। नाशपाती, सेब, अमरूद ले सकते हैं। संतरा का जूस बल्क में न लें। चीनी, गुड़ और किसी तरह की मिठाई खाने से बचें। सात से आठ घंटे की नींद अवश्य लें।
ये हैं सिम्टम बरतें सावधानी
दृष्टि में उतार-चढ़ाव। धुंधला दिखना। रात में देखने में कठिनाई। पर्दे में खून के धब्बे, सूजन। सीधी रेखाएं टेढ़ी-मेढ़ी दिखाई देना। रंग पहचानने में परेशानी। अचानक आंखों की रोशनी का पूरी तरह से चले जाना
लाला लाजपत राय मेडिकल कालेज के वरिष्ठ फिजिशियन डा. अरविंद कुमार ने बताया कि मेरठ,मुजफ्फरनगर, बागपत सहित आसपास के जनपदों से बड़ी संख्या में मधुमेह रोगी प्रतिदिन ओपीडी में आते हैं। शरीर में शुगर अनियंत्रित होने से आंख, हृदय, गुर्दे, तंत्रिका तंत्र, दिमाग प्रभावित होते हैं। टाइप -2 मधुमेह रोगियों में डायबिटिक रेटिनोपैथी अधिक पायी जा रही है। बचाव के लिए शुगर लेवल को नियंत्रित रखें और 40 साल के बाद लोगों को शुगर और आंख की जांच कराएं। मेडिकल कालेज में नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. प्रियांक गर्ग कहते हैं कि मधुमेह होने के पांच साल बाद डायबिटिक रेटिनोपैथी के लक्षण उभरते हैं। सबसे पहले आंखों में धुंधलापन, फिर पर्दे में खून के धब्बे, सूजन और मोतियाबिंद हो जाता है। पर्दे में खून आने पर सर्जरी की जाती है। सूजन होने पर इंजेक्शन दिए जाते हैं। यदि समय पर उपचार न हुआ और शुगर अनियंत्रित रही तो आंखों की रोशनी जाने का खतरा होता है।