गाजा में ट्रंप की नियत पर संदेह

kabir Sharma
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ट्रंप का पीस ऑफ बोर्ड में बड़ा एलान, करीब पचास देशों के प्रतिनिधि मौजूद, साथ ही हजारों विदेशी सैनिकों को स्थिरीकरण बल के रूप में भेजने की योजना

गाजा के लिए बोर्ड ऑफ पीस के देशों ने की पांच बिलियन की मदद की घोषणा, लेकिन इजरायल के हमले बड़ी बाधा

नई दिल्ली/वाशिंगटन DC। गाजा और पश्चिमी एशिया में शांति के लिए आज अमेरिका के प्रसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप पीस बोर्ड की बैठक कर रहे हैं। इस बैठक का मकसद गाजा में शांति की स्थापना करना और वहां पुनर्निर्माण, मानवीय सहायता और अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल बनाने पर है। हालांकि गाजा के इलाकों पर इजरायल के लगातार हमलों के बाद इस बैठक यानी पीस ऑफ बोर्ड की अहमियत पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

पांच से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि मौजूद

पीएस ऑफ बोर्ड की बैठक में पंचास से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि मौजूद हैं। इनमें कई मिडिल ईस्ट, एशिया और कुछ यूरोपीय देश भी शामिल हैं। गाजा में चल रहे कमजोर सीजफायर के बीच पुनर्निर्माण फंड और इंटरनेशनल फोर्स पर चर्चा। ट्रंप इसे “प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट” बता रहे हैं, यानी यह दिखाना कि उनका बोर्ड काम कर सकता है।

यूरोप के देश सतर्क

कई अमेरिकी सहयोगी देश खासकर यूरोप इस नए बोर्ड से सतर्क हैं, क्योंकि यह UN या मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को बाइपास करता लगता है। कुछ विश्लेषक कह रहे हैं कि इजराइल पर दबाव डालना जरूरी है, वरना प्रगति मुश्किल। ट्रंप ने इजराइल-हमास सीजफायर को मजबूत करने का दावा किया है। सीज फायर के बाद भी इजरायल के हमले रूकने का नाम नहीं ले रहे हैं।

ट्रंप की ईरान को फिर धमकी

ट्रंप ने ईरान को एक बार फिर से धमकी दे डाली है। आज ही ट्रंप जॉर्जिया जा रहे हैं, जहां वे इकोनॉमी और अफोर्डेबिलिटी पर फोकस करेंगे (मिडटर्म इलेक्शन से पहले रिपब्लिकन्स को बूस्ट देने के लिए)। साथ ही ईरान के साथ तनाव बढ़ रहा है – अमेरिका ने ईरान को “डील करने की सलाह” दी है, वरना मिलिट्री एक्शन की धमकी। मिडिल ईस्ट में बड़ा US मिलिट्री बिल्डअप एयरक्राफ्ट कैरियर, फाइटर जेट्स हो रहा है। हालांकि ईरान कह चुका है कि वह ट्रंप की कार्रवाई का उसी की शक्ल में जवाब देगा।

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