यूरोप के कई देश दे रहे FIFA 2026 बॉयकाट का धमकी, अमेरिका में भी होने हैं टूर्नामेंट, FIFA 2026 बॉयकाट के पीछे ग्रीनलैंड की छाया
नई दिल्ली/न्यूयार्क। अमेरिका के प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड की जिद ने FIFA 2026 बॉयकाट का शगूफा छेड़ दिया है। यूरोप के कई देश FIFA 2026 बॉयकाट का अभियान चला रहे हैं। इसके पीछे सिर्फ और सिर्फ डोनाल्ड ट्रंप पर प्रेशर बनाना है। FIFA कप खेल की दुनिया का सबसे बड़ा टूर्नामेंट माना जाता है। अमेरिका, कनाडा, मैक्सिको में होने वाले टूर्नामेंट पर कई यूरोपीय देशों और फुटबॉल अधिकारियों से बॉयकॉट की जोरदार मांग उठ रही है। जर्मन फुटबॉल एसोसिएशन के एक सीनियर अधिकारी ने खुलकर कहा कि ट्रंप प्रशासन की ग्रीनलैंड खरीदने की धमकी, इमिग्रेशन पॉलिसी और अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के विरोध में यूरोपीय टीमों को विश्व कप से हटने पर विचार करना चाहिए, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप पर इसका कोई असर पड़ेगा ऐसा कतई नहीं लगता।
खेल जगत का होगा काला दिन
FIFA 2026 बॉयकाट यदि किया जाता है तो यह दुनिया के खेल जगत के लिए सबसे काला दिन माना जाएगा। यूरोपीय देश (जैसे जर्मनी, फ्रांस, इंग्लैंड) ने बॉयकॉट किया तो यह फुटबॉल इतिहास का सबसे बड़ा झटका होगा—48 टीमों वाला पहला विश्व कप अधूरा रह सकता है। वहीं अमेरिकी और दक्षिण अमेरिकी फेडरेशन्स इसे “राजनीति को खेल से दूर रखने” की बात कर रहे हैं। लेकिन कोई भी ग्रीनलैंड पर डोनाल्ड ट्रंप पर प्रेशर की बात नहीं कर रहा है। FIFA 2026 बॉयकाट का प्रचार अब तेज होता जा रहा है। FIFA 2026 बॉयकाट से फुटबाल के तमाम नामी खिलाड़ी दुखी हैं लेकिन वो यह भी नहीं चाहते कि ग्रीनलैंड पर ट्रंप मानमानी पर उतर आएं।
कई सरकारों ने जतायी चिंता
FIFA 2026 बॉयकाट पर यूरोप की कई सरकारों ने चिंता जतायी है। फ्रांस, जर्मनी और अन्य यूरोपीय सरकारों ने भी इस पर चिंता जताई है। फ्रेंच सरकार ने स्पष्ट किया कि वे बॉयकॉट के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन कई फुटबॉल एक्सपर्ट्स और फैंस इसे “सबसे बड़ा राजनीतिक संकट” बता रहे हैं। FIFA ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक टिकट रिक्वेस्ट्स 500 मिलियन से ज्यादा पहुंच चुकी हैं—फिर भी यह विवाद मैचों की तैयारी पर साया डाल रहा है। FIFA 2026 बॉयकाट होता है तो यह खेल जगत की बड़ी हानि होगी। FIFA 2026 बॉयकाट को चलते यह भी हो सकता है कि ट्रंप vs यूरोप ना हो जाए।