ओल्ड पेंशन स्कमी की मांग के साथ विपक्ष, मोदी सरकार की न्यू पेंशन स्कीम से देश के बुजुर्ग आशंकित, नयी स्कीम बुजुर्गों की पेंशन पर डाके के मानिंद
नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार की बुजुर्गों के लिए लायी गई न्यू पेंशन स्कीम को ओल्ड पेंशन स्कीम पर डाका डालने वाला करार दिया जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि सरकार की न्यू पेंशन स्कीम बुजुर्गों के लिए जोर का झटका धीरे से है। हालांकि विपक्ष ने इसके खिलाफ आवाज उठायी है और ओल्ड पेंशन स्कीम लागू किए जाने की मांग की है। केंद्र सरकार की नई पेंशन नीति और न्यू पेंशन स्कीम (NPS) के तहत बाजार आधारित निवेश ने लाखों रिटायर्ड कर्मचारियों और सीनियर सिटीजन की पेंशन पर ‘डाका’ डालने जैसा असर डाला है। जहां एक तरफ ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) की बहाली की मांग जोर पकड़ रही है, वहीं NPS के उतार-चढ़ाव ने बुजुर्गों को अनिश्चितता की चपेट में ला दिया है।
ग्लोबल पेंशन इंडेक्स का भारत को डी ग्रेड
ग्लोबल पेंशन इंडेक्स 2025 में भारत को ‘D’ ग्रेड मिलना इस संकट की गहराई को दर्शाता है, जहां रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी महंगाई, स्वास्थ्य खर्च और स्कैम्स के जोखिम से घिरी हुई है। न्यू पेंशन स्कीम की पैरवी करेन वालों का कहना है कि 2026 में पेंशन सिस्टम में कुछ सकारात्मक बदलाव दिख रहे हैं, जैसे NPS में लचीलापन और नई योजनाओं का विस्तार, लेकिन आम बुजुर्गों के लिए खतरा कम नहीं हुआ है।
OPS vs NPS
पुरानी पेंशन या कहें ओल्ड पेंशन स्कीम में जहां रिटायरमेंट के बाद आखिरी सैलरी का 50% पेंशन के रूप में मिलता था। यह राज्य की गारंटी पर आधारित थी, जो बुजुर्गों को स्थिर आय देती थी। इसे ‘वित्तीय बोझ’ बताकर बंद कर दिया। न्यू पेंशन स्कीम जो साल 2004 में शुरू हुई यह योजना कर्मचारी और सरकार के योगदान पर आधारित है, जहां फंड बाजार में निवेश होता है। बाजार के उतार-चढ़ाव से पेंशन राशि घट सकती है, जो बुजुर्गों के लिए ‘डाका’ जैसा है। पेंशन फंड रेगुलेटरी अथॉरिटी (PFRDA) ने इसे ‘आधुनिक’ बताया, लेकिन विपक्ष इसे ‘फ्रॉड’ कहता है। 2026 के बजट में EPS-95 पेंशन बढ़ोतरी की संभावना है, जहां न्यूनतम पेंशन 7,500-10,000 रुपये तक हो सकती है। केंद्र सरकार OPS को जनवरी 2026 से बहाल करने की दिशा में विचार कर रही है, लेकिन यह अभी अफवाहों तक सीमित है। राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड और हिमाचल जैसे राज्य OPS पर वापस लौट चुके हैं, लेकिन केंद्र की चुप्पी से कर्मचारियों में असंतोष है।
सिर्फ और सिर्फ खतरे ही खतरे
न्यू पेंशन स्कीम को जानकार बुजुर्गों के लिए आर्थिक खतरा करार दे रहे हैं। उनका तर्क है कि NPS में शेयर बाजार का उतार-चढ़ाव पेंशन को 30-40% तक घटा सकता है। 2025 में स्कैम्स ने रिटायरमेंट फंड्स को खतरे में डाला।बिहार में पेंशन सिस्टम ने बुजुर्गों को ‘मृत’ घोषित कर दिया, दिल्ली में 2 महीने से पेंशन नहीं मिली। रिश्वत देकर पेंशन लेनी पड़ती है। नेता और सांसदों को आजीवन पेंशन और सुविधाएं, लेकिन आम कर्मचारी या सिपाही को नहीं। अग्निवीर योजना में 4 साल बाद 75% युवाओं को बिना पेंशन छोड़ दिया जाता है। राजस्थान में OPS पर खतरा मंडरा रहा, केरल में फिस्कल सस्टेनेबिलिटी की चिंता। ओडिशा और MP में बुजुर्गों को पेंशन के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
विपक्ष पुरानी पेंशन के बचाव में
विपक्षी नेता जैसे चंद्रशेखर आजाद और कांग्रेस ने NPS को ‘असंवैधानिक’ बताया, अनुच्छेद 21 और 41 का हवाला देकर OPS बहाली की मांग की। तुर्की की तरह भारत में भी बुजुर्ग पेंशनर्स ‘धमकी’ वाली रणनीतियां अपनाने की सोच रहे हैं। झारखंड में सर्वजन पेंशन जैसी योजनाएं सफल हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर एक समान नीति की जरूरत है। सरकार का दावा है कि NPS से वित्तीय स्थिरता आएगी, लेकिन बुजुर्गों की टेंशन बताती है कि नीति में सुधार जरूरी है। क्या 2026 का बजट OPS बहाल करेगा? या खतरा और बढ़ेगा? फैंस और विशेषज्ञों की नजरें अब इसी पर टिकी हैं।