कैंट बोर्ड में बाबू चल रहे एम्पायमेंट एक्सचेज, कैंट एक्ट 2021 का एक साल का नियम भी तार-तार, ना बोर्ड में प्रस्ताव ना जीओसी की अनुमति
मेरठ/ बोर्ड से प्रस्ताव नहीं और जीओसी की अनुमति नहीं कैंट बोर्ड के बाबू ही अपना समानांतर एम्पाइमेंट एक्सचेंज चला रहे हैं। कई कर्मचारियों को उनके रिटायरमेंट के अगले ही दिन भर्ती कर लिया। इतना ही नहीं यह स्थिति तो तब है जब आॅफिस में सरप्लस स्टॉफ है। यहां हैरानी इस बात की है कि फरवरी माह में हुई बोर्ड की बैठक में अध्यक्ष ब्रिगेडियर निखिल देशपांडे इस पर आपत्ति कर चुके हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि केवल तकनीकि काबलियत रखने वालों को ही रखा जाए। उनकी आपत्ति के बाद दोबारा यह प्रस्ताव बोर्ड में रखा ही नहीं गया। कैंट एक्ट नियमावली 2021 में स्पष्ट प्रावधान है कि एक साल से आउटसोर्स कर्मचारी को नहीं रखा जा सकता। साथ ही यह भी कि यदि किसी कर्मचारी की जरूरत है तो उसके लिए बाकायदा विज्ञापन जारी किया जाए, जो अभ्यार्थी आए उनका साक्षात्कार हो, सेलरी तय की जाए। यह सब परदर्शी तरीके से तय किया जाना चाहिए। बोर्ड से प्रस्ताव पास कर तब जीओसी लखनऊ को भेजा जाए वहां से अनुमति मिलने के बाद ही किसी भी कर्मचारी के रखा जा सकता है, केवल विशिष्ट योग्यता वाले शख्स को ही एडवाइजर के तौर पर रखा जा सकता है। सबसे प्रमुख यह कि साठ साल की आयु पार कर चुके किसी भी शख्स को नौकरी पर नहीं रखा जा सकता। इन तमाम नियमों के उलट पूर्व ओएस ब्रिजेश सिंहल (जिनकी शैक्षणिक योग्यता भी जांच का विषय है), सलीम स्टोर, राकेश चपरासी, किरन बाला और अब आरके शर्मा कंपनी बाग। इन सभी को रिटायर होने के अगले ही दिन रख लिया गया। कैंट एक्ट नियमावली 2021 में जो प्रावधान दिए गए हैं उनका एक भी मामले में पालन नहीं किया गया है। ऐसी कोई भी भर्ती केवल एक साल के लिए होती है। इस नियम का भी पालन नहीं किया गया। किसी भी भर्ती का प्रस्ताव आॅफिस सुप्रीटेंडेंट की मार्फत सीईओ तक जाता है वह बोर्ड में रखते हैं उसके बाद बाकि प्रक्रियाएं। इस प्रकार की भर्तियों के लिए कौन जिम्मेदार है यह जांच का विषय है। सबसे बड़ी बात एक तो नियम विरुद्ध भर्ती दूसरे सरकारी खाते से इनकी सेलरी यह सीधा-सीधा रेवेन्यू घोटाला है। इसके अलावा नौकरी खत्म होने के बाद जो सरकारी क्वार्टर इन्हें अलाट किए गए उन पर भी ये काबिज हैं।
वर्जन
इस पूरे मामले को लेकर सीईओ मेरठ कैंट जाकिर हुसैन व कार्यालय अधीक्षक जयपाल तोमर से उनका पक्ष जानने के लिए उनके वाट्सअप पर मैसेज डाला तो उनकी ओर से किसी प्रकार का रेस्पांस चौबीस घंटे बाद तक नहीं मिला। कैंट बोर्ड अध्यक्ष से भी संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनका मोबाइल नंबर नहीं मिल सका। अब यह पूरा मामला जीओसी लखनऊ के X पर डाला गया है