
सांस लेना भी हो रहा है दुश्वार, शहर के पुराने इलाके में फैल सकती है महामारी, कई बार कर चुके हैं पार्षद धरने प्रदर्शन,
मेरठ। महानगर खासतौर से शहर में जगह-जगह कूडे़ के पहाड़ और सफाई कर्मचारियों द्वारा बजाए उठाने के कूड़ा जलाने से हो रहे प्रदूषण के चलते बीमारियां फैल रही हैं। इससे बीमारियां फैल रही हैं। पुराने शहर के लिसाड़ी रोड व हापुड रोड सरीखे इलाकों में तो घर-घर में लाेग बीमार हैं।कूड़े के पहाड़ से उठने वाला धुआं और बदबू इतनी ज्यादा है कि सुबह-शाम सांस लेना मुश्किल हो जाता है। इलाके लोगों ने कई बार शिकायत की, लेकिन नगर निगम कूड़े के पहाड़ को जला रहा है और कोई समाधान नहीं निकल रहा है, जिससे स्वच्छ भारत अभियान पर सवाल उठ रहे हैं। ह स्थिति मेरठ के कई इलाकों में एक गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकट पैदा कर रही है, जिससे लोगों का जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
केवल इतना भर काम
बीते दिनों मंडलायुक्त और डीएम के बारिश के पानी में उतरने के बाद इतना तो जरूर हुआ है कि इस बार नगर निगम अफसर नाला सफाई के लिए गंभीर नजर आ रहे हैं। दिसंबर का आधा माह बीत चुका है। हालांकि जाड़ों में भी बारिशें होती हैं, लेकिन निगम के नाला सफाई अभियान की यदि बात करें तो प्रयास है कि मानसूनी बारिश यानि अगले साल होने वाली बारिशों के शुरू होने से पहले नालों की तल्ली झाड़ सफाई करा दी जाएं। नालों की सफाई तो हो रही है, लेकिन नालों की सफाई के बाद उसमें से निकाले जाने वाले कूडा कचरा को स्टाफ सड़क पर ही छोड़ देता है जिससे सड़कों पर कूडे के पहाड़ नजर आ रहे हैं। हालांकि एक दिन पहले हापुड़ रोड पर पूर्व पार्षद अब्दुल गफ्फार समेत कई पार्षदों की शिकायत पर निरीक्षण को पहुंचे नगरायुक्त सौरभ गंगवार ने सड़क लगे कूडे के पहाड़ों को लेकर कड़ी सफाई निरीक्षकों को कड़ी फटकार लगायी थी। इसका असर तो हुआ लेकिन उतना असर नहीं जितना नगरायुक्त सरीखे अफसर की फटकार पर होना चाहिए था। नालों के सड़क पर बने कूडे के पहाड़ हटाए तो हैं, लेकिन आधे अधूरे।
एनजीटी जता चुका है नाराजगी
नगर निगम क्षेत्र में कूडे के निस्तारण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूलन निगम के प्रति नाराजगी जता चुका है। हालांकि इस मामले में निगम अफसरों ने एनजीटी से छह माह की मोहलत मांगी है। लेकिन जो ढर्रा नजर आ रहा है उससे तो लगता है कि एनजीटी के एक नहीं कई चाबुकों की जरूरत है उसके बाद ही निगम का सिस्टम कूडा निस्तारण को लेकर शायद दुरूस्त हो सकता है। वहीं दूसरी ओर लोहियानगर के कूड़ा प्लांट का काम अधर में अटका हुआ है। निगम की ऐसी कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए अनेकों बार जाहिदपुर, लोहियानगर, घोसीपुर, हाफिजपुर आदि के निवासी हंगामा कर चुके हैं।
यह कहना है इनका
नगरायुक्त सौरभ गंगवार ने बताया कि सभी सफाई निरीक्षकों को हिदायत दी गयी है। पूर्व पार्षद अब्दुल गफ्फार का कहना है कि कूड़े के पहाड़ों से लोग बीमार हो रहे हैं। शहर के पुरानी व घनी आबादी वाले इलाकों में घर-घर में लाेग बीमार हैं। बेगमपुल व्यापार संघ के पूर्व अध्यक्ष पुनीत शर्मा, खंदक बाजार हैण्डलूम व्यापारी संघ के प्रधान अंंकुर गुप्ता, संयुक्त व्यापार संघ के मंत्री अंकित गुप्ता मनु, व्यापारी नेता ललित अमूल का कहना है कि नालों से निकाल कर सिल्ट सीधे ट्राली में डाली जानी चाहिए।