नई दिल्ली। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हार्दिक पटेल जिस उम्मीद के साथ भाजपा में शामिल हुए थे, लगता है कि वो चीजे नहीं हो सकीं। उनको हाशिए पर डाल दिया गया। इसी के चलते वह काफी खिन्न हैं। केवल हार्दिक ही नहीं उनके समय कालीन जो जो भी भाजपा में शामिल हुआ था, इन दिनों उन सब का कुछ ऐसा ही हाल है। अपने हाल से हार्दिक समेत तमाम नेता बेहाल बताए जा रहे हैं। ऐसा राजनीतिक विशलेषकों का मानना है। माना जा रहा है कि इसी से खिन्न होकर हार्दिक ने कुछ नाराजगी जाहिर करते हुए अपने ही सीएम के खिलाफ आंदोलन की बात कही है। उन्हें खुली चेतावनी दे डाली है। उनका लहजा बेहद सख्त है। हार्दिक ने गुजरात के सीएम भूपेंद्र पटेल को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने परियोजनाओं का काम शुरू न होने की बात से मुख्यमंत्री को अवगत कराया है और अन्य समस्याओं के निदान की मांग की है। हार्दिक ने समस्याओं का समाधान नहीं होने पर अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठने की भी चेतावनी दी है। ताज्जुब की बात ये है कि हार्दिक खुद अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अपने क्षेत्र में होने वाले करोड़ों के विकास कार्यों का जिक्र कर चुके हैं। र्दिक में सीएम को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि 7 महीने पहले मुख्यमंत्री द्वारा जिस अंडर ड्रेनेज लाइन और अंडर वाटर ड्रेनेज लाइन सिस्टम के काम का शिलान्यास किया गया था, उसका एक फीसदी काम भी पूरा नहीं हुआ है। हार्दिक ने ये भी आरोप लगाया कि उनके विधानसभा क्षेत्र विरमगाम में नालियां ओवरफ्लो हो रही हैं और घरों में गंदा पानी घुस रहा है। हार्दिक ने कहा कि 11 केवी की अंडरग्राउंड लाइट का एक प्रतिशत काम भी पूरा नहीं हुआ है। हार्दिक ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर विरमगाम के लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वह अपने लोगों के सात मजबूती से खड़े होंगे और जरूरत पड़ी तो धरना भी देंगे। जानकारों का कहना है कि जिन बातों को लेकर हार्दिक ने पत्र लिख दिया है और धरने पर बैठने की चेतावनी दी है, वो मामले इतने बडे़ नहीं हैं, लगता है कि कुंठा ज्यादा है। हार्दिक पटेल पाटीदार आंदोलन से चर्चा में आए थे और फिर 2020 में कांग्रेस में शामिल हो गए थे। लेकिन 2022 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था। वह विरमगाम से विधायक चुने गए थे।