हे श्रीराम चाहते क्या हो..

kabir Sharma
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मेरठ। सांसद जी अरुण गोविल जी आपने सीएम योगी को प्रदेश भर में जमीन के दोहरे उपयोग के लिए पत्र लिखा, जिसमें हमने कहा था कि सांसद ने वो कर दिखाया जो किसी ने सोचा भी नहीं था, आपके पत्र का सीएम ने तत्काल संज्ञान लिया और पूरे प्रदेश में दोहरे भू-उपयोग के आदेश जारी कर दिए। इसमें कोई दो राय नहीं कि दोहरे भू-उपयोग के जो फायदे आपने गिनाए थे वो वाकई लाजवाब थे। अपने चार प्रमुख चीजों का उल्लेख करते हुए दोहरे भू-उपयोग के फायदे गिनाए जिन पर इससे पहले संभवत चर्चा नहीं की कई होगी। इसमें कोई दो राय नहीं कि उनका संज्ञान लिया जाना चाहिए था और हुआ भी वैसा ही। पूरे प्रदेश के लिए जो आप चाहते थे वो हो गया। इसके बाद आपने रैपिड रेल का मामला उठाया। एमडी शलभ कुमार आपने दिल्ली आवास पर मिलने पहुंचे। उन्हें आपने के मेरठ की जनता की आशंकाओं से अवत करा दिया। दो दिन बाद खबर आयी कि यदि सब कुछ प्लान के अनुसार हुआ तो शीघ्र ही मोदीपुरम तक रैपिड शुरू कर दी जाएगी। यह मेरठ वालों के लिए किसी बड़ी खबर व गिफ्ट से कम नहीं, क्योंकि इसका अरसे से इंतजार किया जा रहा था। ऐसा नहीं कि पहले किसी अन्य ने काम नहीं कराया। काम तो कराया, लेकिन रैपिड के लिए जो स्पीड आपने दिखाई, उसका असर दो दिनों में ही सामने आ गया, इसीलिए हमें पूछना पड़ा कि हे श्रीराम कि आप कहां जाकर रुकोगे। दो दिन में आपकी दो डिमांड पर सरकार के अफसरों ने जिस प्रकार से रेस्पांस दिखाया, उसके बाद पूछा जाना तो बनता है कि हे श्रीराम आखिर क्या चाहते हो..वैसे आप जो भी चाहते हो या कर रहे हो, उसका सीधा फायद तो पब्लिक को ही हो रहा है। आपकी एक ओर खासियत देखी वाे यह कि अभी आप टाइप पास वाली खूबियों से काफी दूरी बनाकर चल रहे हो। शायद इसलिए भी अफसर रैपिड की स्पीड से एक्शन मोड में आते हैं। अब तो यह पूछा जाना मुनासिब है ना कि हे श्रीराम आखिर चाहते क्या हो…

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