मुसीबत में तेइस कर्मचारी, फर्जी नियुक्तियां पकड़ रही तूल, हाईकोर्ट ने तलब की केस डायरी, सीबीसीआईडी व एसएसपी को करना है जवाब दाखिल
इलाहाबाद/मेरठ। नगर निगम में तेइस कर्मचारियों की फर्जी नियुक्ति के मामले में सीबीसीआईडी द्वारा दर्ज करायी गयी एफआईआर की केस डायरी हाईकोर्ट ने तलब कर ली है। इस संबंध में 22 जनवरी को आदेश जारी किए गए हैं। आदेश के दो सप्ताह के भीतर सीबीसीआईडी की एसपी और एसएसपी मेरठ को इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं। दररअसल तेइस कर्मचारियों की पेराशूट के जरिये नियुक्ति के मामले में जांच ऐजेंसी सीबीसीआईडी आगरा ने मेरठ के थाना देहलीगगेट में 24 अप्रैल 2024 को मुकदमा दर्ज कराने के बाद फिर पलट कर नहीं दिखा। इसके अलावा नगर निगम व प्रशासन तथा पुलिस के स्तर से भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गयी, जबकि इसको लेकर शासन स्तर तेइस कर्मचारियों को बर्खास्त कर उनसे सेलरी की रिकबरी के आदेश दिए गए हैं। लेकिन शासन के आदेशों के बाद भी इस संबंध में निगम प्रशासन और पुलिस के स्तर से कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी। तेइस कर्मचारियों की अवैध नियुक्ति मामले का पर्दाफाश करने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट बीके गुप्ता ने बताया कि मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में चल रही थी। इस मामले की अंतिम सुनवाई साल 2024 को हुई थी। उसके बाद से कोई प्रगति नहीं हुई। इसको लेकर उन्होंनेक अपने वकील के माध्यम से हाईकोर्ट से फरियाद की जिसके बाद आज २२ जनवरी को हाईकोर्ट ने यह आदेश जारी किए हैं। तेइस कर्मचारियों के भर्ती घोटाले में निगम प्रशासन मसलन नगरायुक्त के स्तर पर जो कार्रवाई की जानी है अभी उसका इंतजार है। इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में रिट दायर करने वाले निगम के पूर्व नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. प्रेम सिंह का कहना है कि शासन की जांच, मंडालयुक्त व डीएम के स्तर से कराई गईं जांच के अलावा शासन के द्वारा इन कर्मचारियों को बर्खास्त कर उनसे रिकबरी किए जाने के आदशे और इन सब के इतर हाईकोर्ट के आदेश, उसके बाद भी निगम प्रशासन के स्तर से कार्रवाई का ना किया जाना यह बता रहा है कि निगम अफसरों को हाईकोर्ट की का कोई खौफ बाकि नहीं रह गया है। वर्ना क्या वजह है कि शासन के लगातार आदेशों के बाद भी निगम के अफसर उन आदेशों का अनुपालन करने के बजाए उन पर कुंडली मारकर बैठ गए हैं।
बैक डोर से जिनकी की गई भर्ती
जावेद पुत्र यूनुस चालक, अमरदेव पुत्र रामपाल लिपिक, महमूद अली पुत्र शमीउरहमान चालक, मनोज गौड़ पुत्र शिव कुमार चालक, सुनील कुमार पुत्र सोती सिंह सुपरवाइजर, दिनेश कुमार पुत्र रघुवीर सिंह लिपिक, मो. परवेज पुत्र यूनुस चालक, धर्मेंन्द्र उर्फ धर्मेंश पुत्र पारसनाथ लिपिकि, आलोक शर्मा पुत्र नरेन्द्र शर्मा कंप्यूटर ऑपरेटर, सुनील शर्मा पुत्र नरेन्द्र शर्मा कंप्यूटर ऑपरेटर, राजकुमार पटवारी, रूद्रेश पुत्र नानकचंदर पटवारी, मनोज पुत्र बुद्ध प्रकाश चालक, संजय पुत्र सुरेश, शम्स आरिफ पुत्र अब्दुल हकीम चालक, सतीश पुत्र निर्मल सिंह चालक, राजेश कुमार पुत्र पारस नाथ चालक, नौशाद अहमद अनुचर, नकुल वत्स योगेन्द्र शर्मा, हरबीर पुत्र रामकला लिपिक, शकेब खान पूर्व स्टैनो का साला, राजेन्द्र कोरी शामिल हैं।
इनके खिलाफ दर्ज है एफआईआर
सीबीसीआईडी के जांच अधिकारी नागेन्द्र सिंह ने जिनके खिलाफ थाना देहलीगेट में मुकदमा कराया है। उनमें नगर निगम का नियुक्ति अधिकारी (नाम किसी का नहीं), जावेद, अमरदेव, महमूद अली, मनोज कुमार गौड़, सुनील कुमार, दिनेश कुमार, मोहम्मद परवेज, धर्मेंद्र, आलोक शर्मा, सुनील शर्मा, सुनील दत्त शर्मा, राजकुमार, मनोज कुमार, संजय शर्मा, आरिफ, सतीश कुमार, राजेश कुमार, नौशाद, नुकुल वत्स, हरवीर सिंह, साकिब खांन, राजेन्द्र कुमार शामिल हैं। जिन नगर निगम के अफसरों पर इस मामले में शिकंजे की आशंका है उनमें जिन अफसरों के कार्यकाल में ये नियुक्तियां की गई हैं उनमें तेजपाल सिंह, नरेन्द्र कुशवाह, संजय कृष्ण, जेपी त्रिवेदी, विनोद यदुवंशी, संजय कृष्ण शामिल हैं। पुलिस को इनके खिलाफ ही कार्रवाई करनी है तथा हाईकोर्ट को अवगत कराना है।