RSS ने किया जगह-जगह आयोजन, बड़ी संख्या में शामिल हुए लोग, संघ के शताब्दी वर्ष पर 11 से जनवरी से 15 फरवरी तक कार्यक्रमों का सिलसिला
मेरठ। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ शताब्दी वर्ष में 11 जनवरी से 15 फरवरी तक मेरठ प्रान्त में हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इसीक्रम में रविवार को महानगर में भी अनेक स्थानों पर हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सूरज कुंड गाँधी नगर में कैलाश शिव मंदिर में आयोजित किए गए हिन्दू सम्मेलन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। हिन्दू सम्मेलन में संत शाश्वत सरस्वती ने कहा की विश्व की अनेकों सभ्यता नष्ट हो गयी हैं, परन्तु भारतीय संस्कृति का विनाश नहीं हो सका क्योंकि भारतीय संस्कृति का मूल धर्म है, आज भारतीय संस्कृति के मूल को समाप्त करने का प्रयास चल रहा है। इसकी जड़ों को काटा जा रहा है, यह एक प्रश्न है कि हिंदू कौन है, उन्होंने कहा कि ‘विराट सागर समाज अपना, हम सब इसके सिंधु है, सनातन आर्य बौद्ध जैन सिख हम सब हिंदू हैं ‘ ,हमारा इतिहास बड़ा गौरवशाली है।
कभी विश्व में केवल थे हिंदू
कभी पूरे विश्व में हिंदू ही हिंदू हुआ करता था, सऊदी के मक्का में भी हिंदू था, ईरान, इराक, अफगानिस्तान में भी हिंदू था, आज भी इंडोनेशिया, थाईलैंड चीन में हिंदू मंदिर है हिंदू जीवन शैली है, परंतु यह विचारणीय है कि पूरे विश्व का हिंदू आज एक छोटे से देश में समा रहा है, आज सत्ता परिवर्तन की वजह से पलायन रुका है लेकिन कब तक। हमकंो लड़ना पड़ेगा, हम लड़ेंगे,अड़ेंगे और आगे बढ़ेंगे। हमको अपने समाज की कुछ कुरीतियों को भी छोड़ना पड़ेगा। आज हिंदू समाज के सामने सबसे बड़ी कुरीति जातिवाद है हिंदू जाति में बंट गया है। इस जातिवाद में हिंदू समाज को बहुत कमजोर किया है, जाति को छोड़कर धर्म की ओर बढ़ना पड़ेगा, हिंदू समाज जनसंख्या में बहुत कम होता जा रहा है अगर पूरे विश्व में हिंदू घटेगा तो मानवता खत्म होगी, क्योंकि हिंदू संस्कृति में ही मानवता सुरक्षित है।
देश लाखों साल पुराना
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत से सद्भाव संयोजक अरुण जिंदल ने कहा कि भारत देश लाखों वर्ष पुराना है, विदेश से थोड़े से लोग आते और हम पर राज करते, हमारे पशुधन, स्त्री धन को लूट कर ले जाते। उसके बाद अंग्रेज आए उन्होंने हमको हमारी जड़ों से ही काट दिया। परिणाम यह हुआ कि हम गुड मॉर्निंग गुड इवनिंग बोलने लगे और हम राम-राम, जय सियाराम भूल गए। परिणाम यह हुआ कि भारत के लोग यह भूल गए कि भारत हमारा देश है। ऐसे में 1889 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक केशव बलिराम का जन्म हुआ, उनके मन में यह प्रश्न था कि विश्व गुरु भारत गुलाम क्यों हुआ, उन्होंने पाया कि इतना विशाल हिंदू समाज आज जाति में, पंथ में, क्षेत्र वाद में बट गया है।
ताकि भारत बन सके विश्व गुरू
हिंदू समाज को एक करने के लिए भारत माता को पुन: विश्व गुरु बनाने के लिए 1925 में डॉक्टर केशव ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनेकों संगठन सेवा भारती,विद्या भारती,वनवासी कल्याण आश्रम, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद,विश्व हिंदू परिषद अपने-अपने क्षेत्र में सर्वोच्च संगठन के रूप में भारत माता की सेवा कर रहे हैं। संघ के स्वयंसेवक ने बिना किसी की आज्ञा के केवल एक स्वयंसेवक के नाते कोरोना काल में स्वत: ही पूरे देश की सेवा की। उन्होंने े शताब्दी वर्ष में पंच परिवर्तन के विषय पर समाज से आग्रह किया कि हम राम जी की गिलहरी के रूप में पंच परिवर्तन के माध्यम से समाज की सुरक्षा का वचन लें।
ये रहे मौजूद
समिति के अध्यक्ष कैप्टन राजेश शर्मा ने सभी का धन्यवाद दिया, कार्यक्रम को सफल बनाने में समिति के अध्यक्ष कैप्टन राजेश शर्मा, महामंत्री अमित शर्मा, अभिषेक गर्ग, वर्षा सैनी का विशेष योगदान रहा। इसके अलावा रविवार को महानगर के मलियाना, कंकर खेड़ा, प्रताप नगर, जागृति विहार में भी कार्यक्रम हुए।