रंगीन होती आयी है व्यापारियों की होली, इस साल होली मिलन समारोह भी नहीं, रोजी रोजी छिन जाने के सदमे से बेहाल
मेरठ। इस साल सेंट्रल मार्केट की होली बदरंग और फीकी है। रोजी रोजगार छिन जाने के सदमें में यहां के व्यापारी सदमें में हैं। कई व्यापारियों के ऐसे परिवार हैं जहां इस साल होली की खुशी नहीं हैं। घर परिवार के सदस्य रोजगार छिन जाने के सदमे से दुखी और बेहाल हैं। सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों को दुख और दर्द दोहरा है। उनका कहना है कि यह तो ठीक है कि जो होगा उसको अब नसीब मानने के अलावा कोई चारा नहीं, लेकिन उनका सबसे बड़ा दुख ये है कि जो नेता एक ईंट भी ना टूटने देने का दावा करते थे। कांप्लेक्स के ध्वस्त होने के बाद व्यापारियों के बीच आकर टसुएं बहाकर नौटंकी किया करते थे वो भी अब उनकी सुध लेने के लिए नहीं आ रहे हैं।
भरोसे की चुका रहे कीमत
नाम ना छापे जाने की शर्त पर सेंट्रल मार्केट के व्यापारी जिनकी दुकान 31 उन दुकानों की जद में हैं जिन पर सुप्रीमकोर्ट ने बुलडोजर चलाने का हुकूमनामा जारी कर दिया है, ने बताया कि जो कुछ हो रहा है नेताओं पर भरोसा करने की वजह से हो रहा है। यदि व्यापारी इस मामले में शुरू से ही कानूनी लड़ाई का रास्ता अपनाते और सरकार पर भी कानून की मार्फत ही प्रेशर बनाते तो शायद आज ये दिन ना देखना पड़ता। एक अन्य कारेाबारी जिन्होंने अपना कांप्लैक्स में कई व्यापारियों को किराए पर दिया हुआ है, उनका कहना है कि इस सारे फसाद की जड़ सेंट्रल मार्केट का वो व्यापारी नेता है जिसने कई साल पहले आवास विकास के अधिकारियों से मारपीट की। उसकी वजह से ही सेंट्रल मार्केट का कांप्लैक्स ध्वस्त हुआ। उस व्यापारी नेता कांप्लैक्स गिरा और 21 व्यापारी सड़क पर आ गए। इस सारे मामले की शुरूआत वहीं से हुई है। व्यापारियों का कहना है कि उनकी समझ में नहीं आ रहा है कि जाएं तो जाएं कहां करें तो करें क्या।
अपने हाथों से पड़ रहा है उजाड़ना
व्यापारियों का कहना है कि उन्हें अपने हाथों से ही अपना रोजी रोजगार उजाड़ना पड़ रहा है। जो लोग इस मामले में अब तक लड़ाई का दम भर रहे थे, एक व्यापारी ने कहा कि उन्होंने भी ठीक से काम नहीं किया। वो लोग यदि कायदे का वकील सुप्रीमकोर्ट में खड़ा करते तो यह लड़ाई जीती भी जा सकती थी। सुप्रीम कोर्ट के ध्वस्तीकरण संबंधी आदेश के बाद व्यापारियों में असमंजस और चिंता का माहौल है। बाजार में कई दुकानदारों ने अपनी दुकानों के बाहर किया गया अतिक्रमण स्वयं हटाना शुरू कर दिया है। छज्जे तोड़े जा रहे हैं और आगे बढ़ाए गए हिस्सों को ध्वस्त किया जा रहा है। कई कारोबारियों ने अपने आवास में संचालित हो रही दुकानों के शटर हटाकर दोबारा दरवाजे लगवाने शुरू कर दिए हैं, ताकि भवन को मूल स्वरूप में दिखाया जा सके। वहीं कुछ दुकानों के बाहर “बिकाऊ है” के पोस्टर और बैनर भी दिखाई देने लगे हैं। टीन शेड और अन्य निर्माण सामग्री भी बिक्री के लिए रखी जा रही है। सेंट्रल मार्केट में पसरा सन्नाटा और बदलती तस्वीर शहरवासियों के लिए भी चिंता का विषय बनी हुई है। आने वाले दिनों में प्रशासनिक कार्रवाई किस दिशा में जाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
बेरोनक है सेंट्रल मार्केट
ऊंची इमारतों में स्थापित नामी ब्रांड्स के शोरूम, जो कभी लोगों को आकर्षित करते थे, अब अपने साइन बोर्ड और लाइटें हटाने लगे हैं। शाम के समय जिस बाजार में दुपहिया वाहन निकालना भी मुश्किल होता था, वहां अब पहले जैसी भीड़ नजर नहीं आ रही। दूसरी ओर व्यापारियों में आक्रोश भी देखने को मिल रहा है। व्यापारियों ने शहर के तीन थानों में प्रदर्शन कर आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। उनका आरोप है कि लगातार शिकायतों के चलते ही यह कार्रवाई तेज हुई है।
नेताओं से नहीं अब कोई राहत
सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों को अब नेताओं से कोई उम्मीद नहीं है। उनका कहना है कि नुकसान तो नेताओं की वजह से ही हुआ है। ना इनकी बातों में फंसते ना ये दिन देखने को मिलता। जो वक्त नेताओं के झांसे में आकर लड्डू बांटने में निकाला उस दौरान यदि कोर्ट के जरिये रास्ता निकाला होता तो आज अपने दुकानों के शटर खुद ही ना उखाड़ने पड़ते।