मुंबई के मैदानों से की शुरूआत, पसीना बहाने के बाद भी डेब्यू नहीं, सिएटल ने दिया मौका तो चमका भाग्य
नई दिल्ली/मुंबई। करीब तीस साला खिलाड़ी शुभम रांजणे की चर्चा आज चारों ओर है। खासकर जो क्रिकेट को जीते हैं और जानते हैं। यह खिलाड़ी USA की ओर से भारत के खिलाफ खेलने आए हैं। क्रिकेट के अपने सफर को लेकर वो कहते हैं कि “मुंबई में अवसर कम थे, USA ने नई उम्मीद दी। वाे बेहिचक कहते हैं कि अपनी टीम के लिए खेलने किसी के लिए गौरव पूर्ण है। USA का नाम वह नीचे नहीं होनें देगे। वो शानदार क्रिकेट खेलने के लिए यहां आए हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि बचपन में वो मुंबई के मैदानों पर क्रिकेट खेला करते थे। वानखेड़े पर भारत vs USA मैच से पहले शुभम “गूजबंप्स” महसूस कर रहे हैं।
सिएटल में हुए सपने साकार
शुभम रांजणे बताते हैं कि मुंबई में जब कैरियर परवान नहीं चढ़ा तो वह सीधे प्लेन में चढ़ गए और पत्नी मौसम पटेल के साथ अमेरिका के सिएटल पहुंच गए। जहां उनको अवसर दिए गए। उनकी प्रतिभा को भी पहचाना गया। वो बताते हैं कि अपने परिवार की वो तीसरी पीढ़ि हैं जो क्रिकेट खेल रही है। हालांकि अब घर लौटकर विश्व कप खेलना वाकई मेटली चुनौती तो हैं, लेकिन खेल में ये चीजे मायने नहीं रखतीं।
भारत के लिए खेलने का देखा था सपना
शुभम USA टीम के लिए ICC Men’s T20 World Cup 2026 में खेल रहे हैं – और वो भी मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में, जहां कभी भारत के लिए खेलने का सपना देखा था, लेकिन उनका नसीब उन्हें सिएटल ले गया, जहां भाग्य ने साथ दिया और मौका भी मिला। उनके लिए आज उनका क्लब और सिएटल ज्यादा मायने रखता है। उन्होंने वार्म-अप मैचों में अच्छा प्रदर्शन – न्यूजीलैंड और इंडिया A के खिलाफ विकेट लिए।
मिली मुंह मांगी मुराद
उल्लेखनीय है कि शुभम परिवार की तीसरी पीढ़ी हैं, जो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल रहे हैं। उनके दादा वसंत रांजणे भारत के लिए टेस्ट मैच खेले थे, पिता सुभाष रांजणे फर्स्ट-क्लास क्रिकेटर रहे। शुभम ने महाराष्ट्र अंडर-19 से शुरुआत की, लेकिन बड़ा ब्रेकआउट नहीं हुआ।उसी के तलाश में वह सिएटल जा पहुंचे, जहां मुंह मांगी मुराद मिली