मर्चेंट नेवी के नाम पर मानव तस्करी

kabir Sharma
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भारत सरकार बे-खबर, विश्व हिंदू महासंघ के मंंत्री ने उठायी आवाज, केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल को कराया अवगत, मंत्री ने मांगी महकमे से रिपोर्ट

नई दिल्ली। 383 भारतीय नाविकों की मृत्यु तथा 84 के लापता हैं और भारत सरकार को कोई चिंता ही नहीं है। आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में सरकार आंकड़े तो दे रही है, लेकिन इस मामले में जमीनी स्तर पर कुछ नहीं किया जा रहा है। इस बेहद गंभीर और बड़े मामले में अब सरकार को नींद से जगाने का का विश्व हिंदू महासंघ के राष्ट्रीय मंत्री विनोद कुमार ने किया है।

केंद्रीय मंत्री से मिले विनोद कुमार

विश्व हिंदू महासंघ के राष्ट्रीय मंत्री विनोद कुमार इस गंभीर विषय को लेकर केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल से मिले हैं। इतना ही नहीं उन्होंने इसको लेकर विश्व हिंदू महासंघ ने बुधवार को नई दिल्ली पहुंचकर केंद्रीय मंत्री को ज्ञापन दिया। महासंघ के राष्ट्रीय मंत्री विनोद कुमार के द्वारा दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि आरपीएसएल-लाइसेंस प्राप्त शिप मैनेजमेंट कंपनियों द्वारा भारतीय नाविकों के मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन, मर्चेंट शिपिंग अधिनियम, 1958 की अवहेलना, अवैध प्रवासन, मानव तस्करी, धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) तथा विदेशी ध्वज वाले जहाजों पर सैकड़ों भारतीय नाविकों की रहस्यमय मौतों से जुड़े अत्यंत गंभीर प्रकरण को लेकर केंद्रीय मंत्री (पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार) से उनके आवास पर व्यक्तिगत भेंट कर ब्यौरा ज्ञापन के जरिये सौंपा गया। विनोद कुमार ने ज्ञापन में कहा है कि डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग, मुंबई द्वारा लाइसेंस प्राप्त कई शिप मैनेजमेंट कंपनियां भारतीय नाविकों को झूठे एवं कपटपूर्ण रोजगार अनुबंधों के माध्यम से विदेशी ध्वज वाले जहाजों पर भेज रही हैं, जो कि मर्चेंट शिपिंग अधिनियम, 1958, मर्चेंट शिपिंग (सीफैरर्स की भर्ती एवं नियुक्ति) नियम, 2016, समुद्री श्रम सम्मेलन, 2006, कोड का खुला उल्लंघन है।

भारत सरकार के आंकड़ों का किया उल्लेख

ज्ञापन में आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि वर्ष 2018 से 2022 के बीच 383 भारतीय नाविकों की मृत्यु तथा 84 नाविकों के लापता होने के मामले दर्ज हुए हैं। इसके अतिरिक्त, कुछ प्रमुख शिप मैनेजमेंट कंपनियों द्वारा संचालित जहाजों पर दर्जनों भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि स्वयं कंपनियों एवं डीजी शिपिंग के अभिलेखों में की गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि अधिकांश मौतों को ‘हृदयाघात या ‘प्राकृतिक कारण बताकर दर्ज किया गया है, जबकि कठोर मेडिकल फिटनेस मानकों के होते हुए यह आंकड़े गंभीर संदेह उत्पन्न करते हैं।

अवैध कटौतियां क्यों

यह भी उल्लेख किया गया कि मर्चेंट शिपिंग नोटिस संख्या 7/2020 के प्रावधानों के बावजूद, अवैध कटौतियाँ की जा रही हैं तथा सीफैरर्स वेलफेयर फंड और सीमेन प्रोविडेंट फंड (स्क्कस्नह्र) से संबंधित अभिलेखों का अभाव वित्तीय गबन एवं मनी लॉन्ड्रिंग की ओर संकेत करता है। इसके साथ ही मृत नाविकों के परिजनों को मिलने वाले मुआवज़े में कटौती, बिचौलियों के माध्यम से भुगतान तथा कानूनी कार्यवाही से रोकने हेतु दबाव बनाए जाने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय मंत्री ने मामले का संज्ञान में लेते हुए शिपिंग मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव को तत्काल जांच कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए। उन्होंने आश्वस्त किया कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा, उनके अधिकारों एवं सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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लापता की कराएं तलाश

विनोद कुमार ने मांग की है कि भारतीय नाविकों की मृत्यु एवं लापता मामलों की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषी शिप मैनेजमेंट कंपनियों एवं संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई हो तथा पीड़ित परिवारों को न्याय एवं पूर्ण मुआवज़ा सुनिश्चित किया जाए।

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