‘मैं BCCI के लिए कमेंट्री से संन्यास ले रहा हूं’

kabir Sharma
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दुखी मन से किया क्रिकेटलाइफ को अलविदा, भारत जैसा देश और नसलीय भेदभाव शर्मनाक, चौदह साल की उम्र में पहली बार हुआ था अहसास

नई दिल्ली। शिवरामकृष्णन का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है, लेकिन यदि प्रतिभावान क्रिकेट प्लेयर की मानें तो उनके साथ बीसीसीआई ही नहीं क्रिकेट जीवन में जो भी उनके संपर्क में उन्होंने रंगभेद के चलते उनके साथ निर्दयी व्यवहार किया। शिवरामकृष्णन ने जो कुछ एक्स पर लिखा वो उनके दिल की टीस है। भारत जैसे देश में किसी खिलाड़ी के साथ नसलीय भेदभाव को होना क्रिकेट के ठेकेदारों को डूब करना चाहिए चुल्लू भर पानी में। हम दुनिया को क्या संदेश दे रहे हैं।

कमेंट्री पैनल छोड़ा

लक्ष्मण शिवराम कृष्णन ने केवल बॉलिंग या फिल्ड में ही पहचान नहीं बनायी वो शानदार कमेंट्रेटर भी हैं। उन्होंने रंगभेद का आरोप लगाते हुए BCCI का कमेंट्री पैनल छोड़ दिया है। शिवरामकृष्णन ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा- ‘मैं BCCI के लिए कमेंट्री से संन्यास ले रहा हूं।’

लगातार नजरअंदाज किया

इस शानदार खिलाड़ी के साथ उनके क्रिकेट जीवन के दौरान भी अनेक बार अन्याय किया गया। वह इस बात से बेहद नाराज और दुखी भी हैं। वो बताते हैं कि 23 साल के करियर में उन्हें टॉस और प्रेजेंटेशन जैसे अहम मौकों के लिए इस्तेमाल नहीं किया गया, जिससे वे निराश थे। पूर्व लेग स्पिनर ने लिखा कि नए कमेंटेटरों को मौके मिलते रहे, जबकि उन्हें लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया।अ शिवरामकृष्णन ने यह भी कहा कि उनके रिटायरमेंट के पीछे TV प्रोडक्शन से जुड़ी एक बड़ी कहानी है, जो जल्द सामने आएगी।

उनकी बाॅलिंग से खाते थे खौफ लक्ष्मण शिवरामकृष्णन का अंतरराष्ट्रीय करियर भले ही लंबा न रहा हो, लेकिन उन्होंने खेल के मैदान पर अपनी फिरकी से सलीम मलिक और इमरान खान समेत कई दिग्गजों को परेशान किया। हालांकि, उनकी प्रतिभा और शुरुआती शानदार प्रदर्शन के बावजूद, वह आगे चलकर उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके। उनके साथ ही नस्लीय टिप्पणी भी थी।

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महज चौदह साल की उम्र में नसलीय हरकत

शिवरामकृष्णन ने कहा कि नस्लवाद की घटनाओं से उन्हें बार-बार गुजरना पड़ा।  शिवरामकृष्णन के जीवन के साथ पहली नस्लीय घटना तब हुई, जब वह केवल 14 वर्ष के थे। वह चेन्नई के चेपॉक स्टेडियम में भारतीय टीम के लिए नेट गेंदबाज के तौर पर शामिल हुए थे। अपनी जर्सी में ही वह स्टेडियम के एक छोटे से कमरे में कपड़े बदलने के लिए दौड़े, तभी एक वरिष्ठ भारतीय बल्लेबाज ने उन्हें पुकारा। शिवरामकृष्णन ने बताया कि उस वरिष्ठ भारतीय खिलाड़ी ने उनसे उनके जूते साफ करने को कहा। ‘मैंने बस उनकी ओर देखा और कहा- यह मेरा काम नहीं है, आप जो करना चाहते हैं वह करें।’ उन्होंने स्पष्ट किया कि उस वरिष्ठ खिलाड़ी ने उन्हें ग्राउंड स्टाफ समझ लिया था। शिवरामकृष्णन ने बताया, ‘मुझे नहीं पता था कि नस्लवाद या रंग भेद क्या होता है। मैं बस सोच रहा था कि इस आदमी को इस तरह से प्रतिक्रिया क्यों करनी पड़ी।’

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