जमानत के बाद भी IPS सलाखों के पीछे

kabir Sharma
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जबरिया रिटायर्ड आईपीएस को मिली जमानत, एक पूर्व आईपीएस, जो कानून की रक्षा करता था, खुद कानून की मार झेल रहा

नई दिल्ली/वाराणसी/देवरिया। जबरिया रिटायर्ड आईपीएस अमिताभ ठाकुर जमानत मिलने के बाद भी सलाखों के पीछे रहेंगे। उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है और जेल से उन्हें इलाज के लिए लखनऊ PGI भेजा गया है। वाराणसी की जिला जज संजीव शुक्ला की अदालत ने चौक थाने में दर्ज एक मानहानि मामले में उनकी जमानत अर्जी मंजूर कर ली। अदालत ने उन्हें रिहा करने का आदेश दिया। लेकिन वह अभी भी देवरिया जेल में ही बंद रहेंगे, क्योंकि एक पुराने (1999 केस) में जमानत नहीं मिली है और उनकी तबीयत भी बिगड़ गई है। एक पूर्व आईपीएस, जो कानून की रक्षा करता था, खुद कानून की मार झेल रहा है।

बार-बार सलाखों के पीछे

एक आईपीएस को बार-बार सलाखों के पीछे डालना सिस्टम चलाने वालों पर बड़े सवाल खड़ा करता है, हालांकि उनको जमानत की खबर परिवार व समर्थकों के लिए खुशी की बात है, लेकिन साथ ही देश की न्याय व्यवस्था पर गहरा सवाल भी खड़ा करती है। एक ऐसे अधिकारी, जिन्होंने हमेशा भ्रष्टाचार और गलत नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। को बार-बार सलाखों के पीछे डालना क्या न्याय है या राजनीतिक रेवेन्ज। अमिताभ ठाकुर 1992 बैच के आईपीएस थे, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख के लिए जाने जाते थे। उन्होंने कई बार यूपी सरकारों से टकराव किया, RTI और PIL के जरिए सिस्टम को चुनौती दी। 2021 में अनिवार्य रिटायरमेंट के बाद उन्होंने आजाद अधिकार सेना बनाई। उनके समर्थक इसे राजनीतिक साजिश बताते हैं, जहां ईमानदार अधिकारी को दबाया जा रहा है।

मामला क्या है?

  • वाराणसी मानहानि केस: हिंदू युवा वाहिनी के नेता अंबरीश सिंह भोला ने 9 दिसंबर 2025 को शिकायत दर्ज कराई कि अमिताभ ठाकुर ने 30 नवंबर को सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्हें अपराधों में शामिल बताकर झूठी और भ्रामक जानकारी फैलाई गई। बचाव पक्ष के वकील अनुज यादव ने दलील दी कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है और इसमें कोई गंभीर अपराध नहीं है। अदालत ने बहस सुनने के बाद जमानत मंजूर की।
  • मुख्य देवरिया केस (1999): अमिताभ ठाकुर पर आरोप है कि 1999 में देवरिया के एसपी रहते हुए उन्होंने अपनी पत्नी डॉ. नूतन ठाकुर के नाम औद्योगिक प्लॉट फर्जी दस्तावेजों और नाम हेरफेर (नूतन देवी, पति का नाम अभिजात) से हासिल किया। यह केस सितंबर 2025 में लखनऊ के तालकटोरा थाने में दर्ज हुआ, SIT ने जांच की और 10 दिसंबर 2025 को शाहजहांपुर से गिरफ्तारी हुई। देवरिया CJM कोर्ट ने जमानत खारिज की, रिमांड 21 जनवरी तक बढ़ाई गई।
  • स्वास्थ्य संकट: जेल में रहते हुए अमिताभ ठाकुर को 7 जनवरी को सीने में तेज दर्द हुआ। उन्हें पहले देवरिया मेडिकल कॉलेज, फिर गोरखपुर BRD मेडिकल कॉलेज और अब लखनऊ PGI में भर्ती किया गया। डॉक्टरों का कहना है कि हृदय संबंधी समस्या है और वे नियमित दवाएं नहीं ले पा रहे थे।

यह घटना देश के लिए शर्मिंदगी है –

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