आरटीओ रोड पर लगाए भवनों पर लाल निशान, सेंट्रल मार्केट में बात राहत की आ रही है आफत, चौबीस फुट के दायरे के भवन रडार पर
शासन की नयी आवास नीति में भी नहीं व्यापारियों को कोई राहत, व्यापारियों को नहीं पता इधर जाएं या उधर जाएं
मेरठ। सुप्रीमकोर्ट के आदेश से आफत की चपेट में आए व्यापारियों से एक ओर तो राहत दिलाए जाने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर आवास विकास परिषद ने शास्त्रीनगर में आरटीओ रोड पर कुछ भवनों पर डिमार्केशन यानि लाल निशान लगा दिए हैं। ये लाल निशान उन भवनों पर लगाए गए हैं जो आवासीय में पास हैं, लेकिन बाद में उनका व्यवसायिक यूज किया जाने लगा। आवास विकास परिषद की डिमार्केशन की कार्रवाई से व्यापारियों में दहशत है। डिमार्केशन की यह कार्रवाई आरटीओ रोड से बुद्धागार्डन नाले तक की गयी है। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि इस कार्रवाई का सुप्रीमकोर्ट के ध्वस्तीकरण आदेश से कुछ लेना देना नहीं है।
शास्त्री नगर में नयी आफत
जो डिमार्केशन किया गया है इसको यहां के व्यापारियों पर नयी आफत बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि अब आवास विकास परिषद को १२ मीटर तक की रोड चाहिए। जिसके चलते आज केवल व्यवसायिक प्रतिष्ठान ही नहीं बल्कि तमाम आवासों पर भी लाल निशान लगा दिए गए हैं। व्यापारियों ने बताया कि जो लाल निशान लगाए गए हैं उसमें यह भी कह दिया गया है कि या तो स्वयं ही अपने अवैध निर्माण को ध्वस्त कर लो अन्यथा आवास विकास परिषद की जेसीबी इन्हें ध्वस्त कर देगी। जिस प्रकार से लाल निशान लगाए गए हैं, उनमें तमाम भवनों के बड़े हिस्से आ रहे हैं। इस रोड पर कई शोरूम भी हैं जिनका बड़ा हिस्सा ध्वस्त होने के दायरे में आ रहा है। इस रोड पर स्थित जिन भवनों पर का काफी पहले बड़ा हिस्सा अवैध माना जा रहा है जिसको गिराए जाने के लिए लाल निशान लगाए गए हैं।
नयी आवास नीति में राहत की तलाश
सुप्रीमकोर्ट के आदेश पर जिन व्यापारियों पर ध्वस्तीकरण की तलवार लटक रही है वो सभी नयी आवास नीति में राहत की तलाश कर रहे हैं। हालांकि यह आवास नीति एक साल पहले प्रदेश सरकार ने लागू कर दी थी, यह बात अलग है कि जिन विभागों से पब्लिक का वास्ता पड़ता है, उन्होंने इसको या तो लागू ही नहीं किया है या फिर आधा अधूरा लागू किया है। जो हालात बने हुए हैं उनसे व्यापारियों को यह समझ में आ गया है कि जो नेता राहत की बात कर रहे हैं उनका ध्यान केवल 22 फरवरी के पीएम मोदी के कार्यक्रम पर है।
22 फरवरी के बाद क्या होगा
भाजपा के तमाम नेता यही चाहते हैं कि किसी भी प्रकार से 22 फरवरी का कार्यक्रम ठीकठाक निपट जाए, कुछ भी ऐसा ना हो जिससे चले कि मेरठ में सब कुछ ठीक नहीं है। अब खुद ही व्यापारी नेता यह भी मान रहे हैं कि कोर्ट के आदेश की काट केवल कोर्ट से ही निकल सकती है। इसको लेकर भले ही कोई कुछ भी कहे उसको तवज्जो दिया जाना मसल 661/6 कांप्लैक्स के हालात को न्यौता देना है। इस बीच कुछ व्यापारियों की राय है कि इस मामले में बजाए इधर उधर भटकने के क्यों ना सीधे लोकेश खुराना से ही संपर्क किया जाए। जिनकी पैरवी के चलते सुप्रीमकोर्ट ने इतने कठोर आदेश जारी किए हैं।
व्यापारी भी एक राय नहीं
इस मामले में दरअसल हो यह रहा है कि व्यापारी कोई एक राय नहीं बना पा रहे हैं, सेंट्रल मार्केट बंद किए जाने को लेकर जब एक राय बनी थी तो उसको खुलवा दिया गया। चंद व्यापारियों का मानना है कि यदि सेंट्रल मार्केट की बेमियादी बंदी के बाद दो दिन के लिए २१ व २२ फरवरी को मेरठ भी बंद करा दिया जाता तो जनप्रतिनिधियों की मार्फत से सरकार पर प्रेशर बनता। उसके बाद संभवत कोई रास्ता निकल पता, लेकिन अब हो यह रहा है कि व्यापारियों के कई गुट हो गए हैं। जिसका सीधा नुकसान केवल व्यापारियों को ही होने जा रहा है।