लाखों ने रखा सकट का व्रत

kabir Sharma
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देश भर के मंदिरों में पूजा अर्चना, माताओं ने भगवान गणेश की पूजा की, पुत्र की लंबी आयु का मांगा वरदान

नई दिल्ली। आज से नहान के बाद हिन्दू धर्म में त्यौहार मनाने की लगी रोक हट गयी है। यह रोक सकट चौथ के साथ ही हट जाती है। इसीलिए कहा जाता है कि आया सकट खुली अटक। इस मौके पर देश के तमाम मंदिरों में भगवान श्रीगणपति गणेश की पूजा अर्चना की जा रही है। जिनके पुत्र होते हैं ऐसी महिलाएं जरूर इस व्रत को करती हैं। माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला यह व्रत मुख्य रूप से माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और हर संकट से रक्षा के लिए रखती हैं। इसे संकष्टी चतुर्थी, तिलकुटा चौथ, तिल चौथ और माघी चौथ के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान गणेश और सकट माता की विशेष पूजा की जाती है।

माताएं निर्जल रखती हैं ब्रत

सकट चाैथ का व्रत माताएं आमतौर पर निर्जल रख रकती हैं। चतुर्थी तिथि आज सुबह आठ बजकर एक मिनट से शुरू हो गयी। यह कल मंगलवार सुबह 6:52 बजे तक रहगी। क्योंकि चंद्रोदय चतुर्थी तिथि में हो रहा है। चंद्रोदय के समय की यदि बात करें तो रात्रि लगभग 8:54 बजे (शहर के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है)। व्रत का पारण चंद्र दर्शन और अर्घ्य देने के बाद किया जाता है।

यह विधि

सुबह स्नान कर साफ वस्त्र पहनें, संकल्प लें। शाम को भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित कर दूर्वा, फूल, रोली, अक्षत, तिल-गुड़ के लड्डू (तिलकुट) का भोग लगाएं। घी का दीपक जलाएं, आरती करें और व्रत कथा पढ़ें या सुनें। चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूरा करें। प्रसाद में तिल और गुड़ का विशेष महत्व है।मान्यता है कि भगवान गणेश इस दिन सभी बाधाओं को हरते हैं। एक लोकप्रिय कथा के अनुसार, एक कुम्हार की मिट्टी की मूर्तियां भट्टी में टूट जाती थीं, लेकिन सकट चौथ पर पूजा करने से उसका संकट दूर हुआ। दूसरी कथा में साहूकारनी को तिलकुट चढ़ाने से पुत्र प्राप्ति हुई। माताएं यह व्रत संतान की खुशहाली के लिए रखती हैं।

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