माफिया का योगी सरकार को करोड़ों के राजस्व का फटका

kabir Sharma
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अफसरों की नाक के नीचे अवैध होर्डिग्स व यूनिपोल का जाल
सुप्रीमकोर्ट व शासन के कायदे कानून को लेकर बरती जा रही लापरवाही

मेरठ।  होर्डिंग्स माफिया के अहसानों तले दबे अफसर योगी सरकार को करोड़ों के राजस्व का फटका लगा रहे हैं। महानगर के तमाम इलाके बड़ी संख्या में होर्डिंग्स और यूनिपोल से पटे हुए हैं। केवल यूनिपोल ही नहीं लगाए गए हैं उनको लगाने में जिन सुरक्षा मानकों की हिदायत शासन ने दी गयी है उनकी भी अनदेखी की जा रही है। ऐसा लगता है कि अफसरों को किसी बड़े हादसे का इंतजार है। असुरक्षित यूनिपोल और भारी भरकम होर्डिग्स से जब तक कोई हादसा नहीं हो जाता, तब तक अफसरों की भी नींद टूटने वाली नहीं है, जहां तक होर्डिंग्य माफिया का सवाल है तो वह तो अफसरों से सेटिंग गेटिंग के चलते मनमानी पर उतरा हुआ है। ऐसे तमाम होर्डिंग्स व यूनिपोल हैं जिनसे मौत झांक रही है।

नगरायुक्त, मंडलायुक्त व प्रमुख सचिव को कराया अवगत

हादसों को न्यौता दे रहे इन होर्डिंग्स व यूनिपोल को लेकर अफसरों की कारगुजारी और गंगानगर निवासी बाईपास पर अवैध होटल संचालक होर्डिग्स माफिया की कारगुजारियों की जानकारी देते हुए जांच कर अवैध होर्डिंग्स के खिलाफ अभियान चलाए जाने तथा होॢडग्स माफिया के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज जाने की मांग की गयी है। दरअसल एलएलआरएम मेडिकल के सामने हादसों को न्यौता दे रहा ऐसा ही एक होर्डिग्स सड़क पर आ गिरा था। अच्छी बात यह रहीं कि उसकी चपेट में कोई आया नहीं। अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। इसी हादसे के चलते नगरायुक्त, मंडलायुक्त व प्रमुख सचिव को पत्र भेजकर अवगत कराया गया है। पत्र में कहा गया है कि नगर निगम क्षेत्र में अवैध यूनिपोल के विरुद्ध शिकायत, करोड़ों के राजस्व घोटाले, सुरक्षा मानकों के उल्लंघन तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय/उच्च न्यायालय एवं उत्तर प्रदेश शासन के आदेशों के अनुपालन में कार्यवाही का आग्रह किया किया गया है। पत्र में यह भी जानकारी दी गयी है कि महानगर क्षेत्र में अवैध यूनिपोल (विज्ञापन पोल) के संबंध में पूर्व में भी शिकायतें की जा चुकी हैं, किन्तु अब तक कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं की गई है, जिससे स्थिति अत्यंत गंभीर एवं जन-जीवन के लिए खतरनाक हो गई है। यह तथ्य अत्यंत चिंताजनक है कि मेरठ नगर निगम क्षेत्र में बड़ी संख्या में यूनिपोल पूर्णत: अवैध रूप से स्थापित हैं। एक ही स्वीकृति संख्या (परमिट नंबर) के आधार पर अनेक स्थानों पर यूनिपोल लगाए गए हैं, जो स्पष्ट रूप से नियमों एवं नीतियों का उल्लंघन है।

राजस्व घोटाला एवं भ्रष्टाचार

यह भी स्पष्ट रूप से संज्ञान में आया है कि संबंधित ठेकेदारों, विज्ञापन एजेंसियों एवं नगर निगम के कर्मचारियों/अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध यूनिपोल लगाकर करोड़ों रुपए के विज्ञापन प्रदर्शित किए जा रहे हैं, जिन पर कोई वैध शुल्क/कर जमा नहीं किया जा रहा। इस प्रकार उत्तर प्रदेश सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व की हानि पहुंचाई जा रही है तथा शासन की छवि को धूमिल किया जा रहा है। यह कृत्य भ्रष्टाचार, आपराधिक कदाचार एवं वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है।

सुरक्षा मानकों का उल्लंघन

यूनिपोल स्थापना हेतु निर्धारित मानकों—जैसे संरचनात्मक स्थिरता (स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी), फाउंडेशन की मजबूती, यातायात सुरक्षा, विद्युत सुरक्षा, दूरी मानक आदि—का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। बीती १८ अप्रैल २०२५ को आई तेज आंधी के दौरान अनेक यूनिपोल गिर गए थे, जिससे नागरिक घायल हुए एवं वाहनों को क्षति पहुंची। मेडिकल कॉलेज के मुख्य द्वार के सामने हल्की हवा में ही यूनिपोल गिर जाना इस गंभीर लापरवाही का प्रत्यक्ष उदाहरण है।
कोर्ट के आदेशों को दिया हवाला
नगरायुक्त, मंडलायुक्त व प्रमुख सचिव को प्रेषित पत्र में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा म्युनिस्पल कारपोरेशन ऑफ ग्रेटर मुंबई बनाम भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड सहित विभिन्न मामलों में अवैध होर्डिग्स/विज्ञापन संरचानाओं को हटाने एवं सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।

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उच्च न्यायालयों के निर्देश

अवैध होर्डिग्स जिस प्रकार के मेरठ महानगर में लगाए गए हैं उस तर्ज पर लगा गए होर्डिग्स को लेकर अनेक उच्च न्यायालयों के निर्देश में कहा गया है कि बिना अनुमति कोई विज्ञापन संरचना स्थापित न हो, सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य हो, अवैध होर्डिंग्स को तत्काल हटाया जाए व ोषी अधिकारियों पर दंडात्मक कार्यवाही की जाए। वहीं दूसरी ओर उत्त प्रदेश शासन के दिशा निर्देशों की यदि बात की जाए तो प्रत्येक विज्ञापन/यूनिपोल के लिए पृथक अनुमति एवं यूनिक आईडी आवश्यक है। निर्धारित शुल्क/कर की वसूली अनिवार्य है। संरचनात्मक सुरक्षा प्रमाण पत्र की अनिवार्यता, सड़क, चौराहों एवं सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए। अवैध विज्ञापन संरचनाओं को तत्काल हटाकर संबंधित से वसूली एवं दंडात्मक कार्यवाही की जाए। किन्तु मेरठ नगर निगम क्षेत्र में उपरोक्त सभी आदेशों एवं नीतियों की खुलेआम अवहेलना की जा रही है।

ये करें अधिकारी

मेरठ नगर निगम क्षेत्र में लगे सभी यूनिपोल का तत्काल भौतिक सत्यापन कराया जाए। एक ही अनुमति संख्या पर लगे बहु-स्थानों के यूनिपोल की जांच कर अवैध यूनिपोल तत्काल हटाए जाएं। सभी यूनिपोल की स्वतंत्र एजेंसी से संरचनात्मक सुरक्षा जांच कराई जाए। अवैध यूनिपोल के माध्यम से हुए करोड़ों के राजस्व नुकसान का आकलन कर संबंधित ठेकेदारों, विज्ञापन कंपनियों एवं अधिकारियों से वसूली की जाए। संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम एवं अन्य प्रासंगिक धाराओं में आपराधिक कार्यवाही की जाए। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु जवाबदेही तय कर सख्त निगरानी तंत्र स्थापित किया जाए। पत्र में यह भी कहा गया है कि यह मामला जनहित

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