मलिक व धनखड़ -चुप्पी भली

kabir Sharma
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नई दिल्ली/ जयपुर। दाे घटनाओं के बाद भाजपा में जाटों के भविष्य को लेकर तमाम तरह की बातें कहीं जाने लगी हैं। तीसरी और प्रमुख घटना राजस्थान में संगठन के बेहद तेज-तर्रार माने जाने वाले वरिष्ठ नेता व संगठन के वरिष्ठ प्रवक्ता कृष्ण कुमार जानू को संगठन से छह साल के लिए बाहर का रास्ता दिखा देना है। कृष्ण कुमार जानू का कसूर सिर्फ इतना बताया जा रहा है कि उन्होंने पार्टी लाइन से हटकर पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे और पूर्व राज्यपाल सतपाल मलिक के अंतिम संस्कार में कथित तिरस्कार को लेकर अपनी ही पार्टी पर निशाना साधा था। उन्होंने यहां तक कह दिया कि सतपाल मलिक क अंतिम संस्कार जिसको व डिजर्व करते थे, उस तरीके से नहीं किया गया। सतपाल मलिक के अंतिम संस्कार से भाजपा के बड़े नेताओं की दूरी भी उन्होंने गैर मुनासिब बतायी थी। उन्होंने भले ही घुमाफिराकर ही भाजपा के टॉप नेतृव्त को कठघरे में खड़ा कर दिचा। सत्ताधारी भाजपा में में इस प्रकार की परिपाटी कभी नहीं रही, कि पार्टी लाइन से हटकर पार्टी की टॉप लीडरशिप को काई कठघरे में खड़ा करे। केवल सतपाल मलिक ही नहीं। कृष्ण कुमार जानू यहीं तक नहीं रूके उपूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के मुद्दे पर खरी-खरी बोलकर उन्होंने आग मेे घी डालने सरीखा काम किया। जिसका नतीजा अनुशासनहीनता के आरोप में उन्हें छह साल के लिए संगठन से बाहर का रास्ता दिखा देना रहा। राजनीतिक विश्लेषकाें की मानें तो जानू को बाहर का रास्ता दिखाकर टॉप लीडरशिप ने संदेश दिया है कि यदि पार्टी लाइन से अलग जाकर किसी ने मुंह खोला तो उसकी सत्ताधारी संगठन में कोई जगह नहीं, मसलन खाता ना बही जो टॉप लीडरशिप कहें वो सही वहीं दूसरी ओर इसको सतपाल मलिक व जगदीप धनखड़ को लेकर मुंह खोलने को विपक्षी दलों की मदद के रूप में देखा जा रहा है, वो ऐसे कि कपिल सिब्बल ने पूर्व उपराष्ट्रपति को लेकर जो कुछ कहा उसको लेकर भी कृष्ण कुमार जानू के बयान से जोड़ कर देखा जा रहा है। कृष्ण कुमार जानू ने यहां तक कह दिया कि संगठन में जाटों की अनदेखी की जा रही है।

इस बयान के बाद उनको बाहर का रास्ता दिखाने की अटकलें लगायी जा रही थीं और ये अटकलें भर नहीं थी ऐसा कर दिया गया। हालांकि संगठन की ओर कहा गया है कि जानू द्वारा जून में जारी कारण बताओ नोटिस का असंतोषजनक जवाब देना बताया है। बीजेपी राजस्थान में एक बार फिर आंतरिक कलह की आग भड़क उठी है। पार्टी के तेज-तर्रार प्रदेश प्रवक्ता और वरिष्ठ प्रवक्ता कृष्ण कुमार जानू को शुक्रवार, 8 अगस्त 2025 को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। आधिकारिक तौर पर बीजेपी ने इस कार्रवाई का कारण जानू द्वारा जून में जारी कारण बताओ नोटिस का असंतोषजनक जवाब देना बताया है।

हालांकि जानू प्रकरण को साल 2027 में उत्तर प्रदेश के प्रस्ताविध विधान सभा के चुनावों को भी जोड़कर देखा जा रहा है, खासतौर से शुगर बैल्ट माने जाने वाले वेस्ट यूपी मेंज जाटों की नाराजगी के भी संदर्भ में राजनीतिक विश्लेषक देख रहे हैं, लेकिन उनका यह भी मानन है कि रालोद सुप्रीमों जयंत चौधरी को इसी काम के लिए रिजर्व में रखा गया है ताकि डेमेज कंट्रल किया जा सके। वेस्ट यूपी के जाटों की इस मामले से नाराजगी की जयंत चौधरी कितनी भरपाई कर पाए इसका पता वेस्ट यूपी में मिलने वाली सीटोे के बाद ही लग पाएगा। कुछ का यह भी मानना है कि जयंत चौधरी का भाजपा मे भविष्य उत्तर प्रदेश विधानसभा में वेस्ट यूपी से मिलने वाले सीटे के बाद ही तय हो सकेगा। कुछ यह भी मान रहे हैं कि जयंत चौधरी की एंट्री से जिन कदावर भाजपा नेताओं को राजनीतिक नुकसान हुआ है हो सकता है कि विधानसभा चुनाव में वो हिसाब चुकता करने की बाट जोह रहे हो। हालांकि ये तमाम बातें कयास भर हैं, कयासों पर किसी नतीजे पर पहुंचना गैर मुनासिब हाेगा। बेहतर तो यही होगा कि यूपी विधानसभा चुनाव में वेस्ट यूपी से भाजपा को मिलने वाली सीटोंं के परिणाम तक इंतजार किया जाए, लेकिन जानू प्रकरण से यह साफ हो गया है कि संगठन में जाटों को लेकर कुछ ठीक नहीं है और यह ठीक नहीं, यह बात नाम ना छापे जाने शर्त पर कुछ भाजपाई भी मान रहे हैं। वैसे इस सारे फसाद की वजह जानू का पिछले दिनों वायरल हुआ एक वीडिया हैं जिसमें उन्होंन र्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे और पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के अंतिम संस्कार में कथित तिरस्कार को लेकर पार्टी पर हमला बोला था। वो वीडियों संगठन की टॉप लीडरशिप को गैर मुनासिब लगा, जिसका नतीजा सबके सामने है। उन्होंने पूर्व राज्यपाल और बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सत्यपाल मलिक के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार में राजकीय सम्मान न दिए जाने को तिरस्कारपूर्ण करार दिया। माना जा रहा है कि संगठन की नाराजगी की यह बड़ी वजह बना।

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