ट्रंप के बैकफुट से बाजार में रि-बाउंस

kabir Sharma
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तनाव से जार-जार रो रहा बाजार, स्ट्रेट होर्मूज बंद होने से भारी गिरावट, ट्रंप के ईरानी बिजली सयंत्राें पर हमले से बैकफुट से कुछ शेयरों में रि-बाउंस

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का सबसे ज्यादा खामियाजा निवेशकों को उठाना पड़ रहा है। यह हाल केवल भारत नहीं बल्कि दुनिया भर के बाजारों का है। स्ट्रेट होर्मूज बंद किए जाने के बाद तेल की कीमतों में आए उछाल ने और भी ज्यादा हालत खराब कर दी है। एक दिन पहले डोनाल्ड ट्रंप के ईरानी बिजली सयंत्रों पर हमले के बयान के बाद तमाम शेयर एकाएक गोता खाने लगे थे लेकिन अब ट्रंप के यूटर्न के बाद कुछ शेयर रि-बाउंस हुए हैं।

बाजार में भारी उथल-पुथल

मिडिल ईस्ट के तनाव से बाजार में भारी उथल पथल मची है। फरवरी लॉस्ट से शुरू हुए युद्ध के बाद वैश्विक शेयर बाजारों में भारी अस्थिरता पैदा की है। इसका एक बड़ा कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल सप्लाई बाधित होना, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल (Brent crude $100-113 प्रति बैरल के आसपास), मुद्रास्फीति की आशंका और रेट कट की उम्मीदों पर असर डाल रहा है। दरअसल मिडिल ईस्ट के तनाव ने निवेशकों को कहीं का नहीं छोड़ा

ट्रंप ने टाला हमला तो राहत

डोनाल्ड ट्रंप के बयान हमला न किए जाने के बयान के बाद और “constructive talks” का दावा किया। इससे तेल की कीमतें गिर गईं (कुछ रिपोर्ट्स में 8-10% तक ड्रॉप) और स्टॉक्स में रिबाउंड देखा गया। भारत के इतर यदि दुनिया के बाजारों की बात करें तो एशियाई/यूरोपीय Markets: पहले गिरावट (Tokyo, Seoul, STOXX 50 में 1-2% डाउन), लेकिन ट्रंप अपडेट के बाद कुछ रिकवरी। ग्लोबल स्टॉक्स युद्ध शुरू होने से ~5.5% नीचे नजर आया है। भारत के बाजारों की उथल पुथल अभी थमती नजर नहीं आ रही है। भारतीय बाजार (NSE/BSE): पिछले कुछ दिनों में भारी गिरावट – Sensex 7000+ अंक टूटा (कुछ सत्रों में 1800-2500 पॉइंट्स डाउन), Nifty 23,000 के नीचे आया। कुल मिलाकर युद्ध शुरू होने से Nifty ~5-10% करेक्टेड। FIIs ने हजारों करोड़ की बिकवाली की, रुपया रिकॉर्ड लो पर (93+ प्रति डॉलर)। आज/कल के सत्र में तेल गिरने से कुछ पॉजिटिव ओपनिंग की उम्मीद, लेकिन अनिश्चितता बनी हुई। निवेशकों को ~₹14 लाख करोड़+ का नुकसान हुआ है। इसकी भरपाई कब होगी कहा नहीं जा सकता।

बुरा पड़ रहा असर

मिडिल ईस्ट के तनाव का सबसे बुरा असर भारत के तमाम सेक्टर पर पड़ रहा है। ऑटो, एविएशन, FMCG, पेंट, बैंकिंग (उच्च ब्याज दरों की आशंका) से इंकार नहीं किया जा सकता। लोग आने वाली खबरों पर कान लगाए हैं।

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