उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल ने वित्त मंत्री के नाम सौंपा 13 सूत्रीय ज्ञापन, केंद्रीय बजट 2026-27 में व्यापारियों को राहत देने की पुरजोर मांग, बड़ी संख्या में पदाधिकारी रहे मौजूद
नई दिल्ली/ मेरठ।उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश (रजि.) के बैनर तले मंगलवार को प्रान्तीय अध्यक्ष लोकेश कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में व्यापारियों ने भारत सरकार की वित्त मंत्री के नाम एक ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से केंद्रीय बजट 2026-27 में उद्योग एवं व्यापार के हित में आवश्यक सुधारात्मक एवं राहतकारी प्रावधान किए जाने की मांग की गई। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि स्वतंत्रता के बाद से उद्योग एवं व्यापार वर्ग देश की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने, रोजगार सृजन तथा सरकार के राजस्व में निरंतर महत्वपूर्ण योगदान देता आ रहा है, लेकिन वर्तमान में बढ़ती महंगाई, ऊँची ब्याज दरें, जटिल नियम-कानून, जीएसटी की समस्याएँ एवं तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों के कारण व्यापारी एवं उद्यमी वर्ग गंभीर संकट से गुजर रहा है।
ज्ञापन में ये हैं मांगे
लोकेश कुमार अग्रवाल ने बताया कि ज्ञापन में शामिल मांगों में उद्योग एवं व्यापार के लिए दिए जा रहे बैंक ऋणों की वर्तमान ऊँची ब्याज दरों में कटौती की जाए, ऋण खातों को मात्र 3 माह में एनपीए घोषित किए जाने के स्थान पर यह अवधि कम से कम 6 माह की जाए तथा एनपीए हो चुके खातों के लिए विशेष पुनर्स्थापना योजना लागू की जाए, आवासीय क्षेत्रों में वर्षों से वैध रूप से संचालित उद्योग एवं व्यापारिक प्रतिष्ठानों को सील/ध्वस्त करने की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए उन्हें स्थायी वैधानिक मान्यता देने हेतु राष्ट्रीय नीति बनाई जाए, जीएसटी के अंतर्गत वर्तमान ₹10 लाख दुर्घटना बीमा को संशोधित कर किसी भी कारण से मृत्यु की स्थिति में ₹10 लाख बीमा लाभ का प्रावधान किया जाए तथा बढ़ते साइबर अपराधों को रोकने के लिए सशक्त, प्रभावी एवं व्यापारी हितैषी राष्ट्रीय कार्य योजना लागू की जाए।
व्यापारियों के खाते ना हो फ्रीज
ज्ञापन में कहा गया है कि साइबर अपराध की स्थिति में निर्दोष व्यापारियों के बैंक खाते फ्रीज न किए जाएँ तथा केवल अपराधी के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। वृद्ध व्यापारियों के जीवन-यापन हेतु न्यूनतम ₹40,000 प्रतिमाह पेंशन योजना लागू की जाए। इसके अलावा जीएसटी में पंजीकृत व्यापारियों को डिजिटल कार्यों हेतु निःशुल्क लैपटॉप एवं आवश्यक सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराए जाएं। जीएसटी में विलंब से भुगतान पर लगने वाले 18% ब्याज को घटाकर अधिकतम 6% किया जाए। साझेदारी फर्मों पर आयकर की वर्तमान 30% दर को घटाकर अधिकतम 20% किया जाए, जिससे छोटे एवं मध्यम व्यापारियों को प्रोत्साहन मिल सके। जीएसटी स्लैब परिवर्तन के कारण व्यापारियों का 7% से 10% तक लंबित इनपुट टैक्स क्रेडिट बिना विलंब के सीधे उनके बैंक खातों में रिफंड/ट्रांसफर किया जाए। प्रान्तीय अध्यक्ष लोकेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि ये सभी मांगें देश के करोड़ों व्यापारियों एवं उद्यमियों के अस्तित्व, सम्मान एवं आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी हुई हैं। यदि इन्हें केंद्रीय बजट 2026-27 में शामिल किया जाता है तो इससे व्यापार जगत को राहत मिलेगी और देश की अर्थव्यवस्था को नई गति प्राप्त होगी।
ये रहे मौजूद
ज्ञापन सौंपते समय राजकुमार त्यागी, रमेश गर्ग, इसरार सिद्दीकी, अंकुर कुच्छल, इमरान इलाही, साजिद, फरमूद, पुनीत, निमेष, वसीम एवं फैजान मौजूद रहे।