
टैक्स लेगा नगर निगम काम कराएंगे कालोनी वाले, मुसीबत से महापौर भी नहीं दिला सके निजात, मार्च के बजट के नाम पर मुसीबत के मारों को दिया टाल
जब पानी की निकासी का रास्ता ही नहीं है तो फिर कैसे होगा समाधान-टैक्स ले रहे नगर निगम के अफसर और रास्ता बनवा रहे अपने खर्च पर लोग
मेरठ। शहर के टीपीनगर मलियाना इलाके की शिव गंगा और गंगा कालोनी में गंगा और शिव गंगा कालोनी में रहने वालों से हाउस टैक्स तो नगर निगम के अफसर वसूलेंगे, लेकिन कालोनी में आयी मुसीबत से छुटकारा पाने के लिए जो खर्चा होगा उसको कालोनी के लोग अपनी जेब ढीली कर कराएंगे। लोगों ने बताया कि महापौर ने तो मार्च में बजट के नाम पर हाथ खड़े कर दिए, लेकिन कालोनी की हो हालत है, उसके लिए मार्च तक के लिए तो नहीं रूका जा सकता। लोगों ने बताया कि अब उन्होंने अपने खर्च से ही कालोनी में रास्ता बनाने के लिए ट्रैक्टर-ट्राली से मिट्टी गिरवाना शुरू कर दिया है। जो ट्रैक्टर-ट्राली मिट्टी डालने आए थे, शुरू में तो वो भी पानी में फंस गए। उन्हें बामुश्किल निकाला जा सका। लोगों ने बताया कि वो जानते हैं कि मिट्टी का डलवाना स्थायी समाधाना नहीं है, लेकिन फिलहाल इसके अलावा कोई रास्ता भी नहीं है। कम से कम आने जाने के लिए रास्ता तो बने। कालोनी के लोगों ने बताया कि इसके अलावा उनके पास कोई दूसरा चारा भी नहीं है। इस संबंध में वार्ड दो के पार्षद दीपक प्रजापति से संपर्क का प्रयास किया तो उनसे बात नहीं हो सकी।
महापौर ने भी लौटाया मायूस
नगर निगम के वार्ड दो के मलियाना इलाके की गंगा कालोनी और शिव गंगा कालोनी में रहने वालों पर आयी मुसीबत से महापौर भी कोई निजात नहीं दिला सके और उन्होंने भी जो लोग इस मुसीबत से छुटकारे की उम्मीद के साथ उनसे मिलने पहुंचे थे, उन्हें मार्च माह के किसी बजट का लॉलीपॉप थमाकर वापस भेज दिया। लोगों ने बताया कि वो बड़ी उम्मीद से महापौर के पास गए थे। उन्हें उम्मीद थी कि महापौर के आधीन ही जब सारे अफसर हैं तो फिर कोई ना कोई रास्ता महापौरा जरूर निकलवाएंगे, लेकिन ऐसा हो ना सका। लोगों का कहना है कि उनकी बात तो सुनी गयी, लेकिन त्वरित किसी समाधाना के नेताओं की तर्ज पर उन्हें लॉलीपॉप थमा दिया गया।
लोगों ने किया नाराजगी का इजहार
निगम के वार्ड दो मलियाना बस्ती में शिव गंगा और गंगा कालोनी के लोगों की मुसीबत को मीडिया ने प्रमुखता से उठाया था। समाचार को लेकर शिव गंगा और गंगा कालोनी के बाशिंदे महापौर हरिकांत अहलूवालिया से मिलने गए थे। कालोनी के ओमपाल शर्मा ने बताया कि उन्होंने प्रकाशित समाचार को महापौर के सामने पटक दिया था। और कहा कि उनके दुख दर्द की जानकारी धाना न्यूज को तो है, लेकिन नगर निगम के अफसरों को नहीं है। वहां से आए लोगों ने महापौर के समक्ष नाराजगी का इजहार करते हुए कहा कि नगर निगम जब टैक्स ले सकता है तो उनकी मुसीबत क्यों नहीं दूर कर रहा है। जिसको टैक्स देंगे उसी से तो अपनी मुसीबत के बारे में कहेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि निगम का जाते हैं तो वहां कोई अफसर मिलता नहीं। जब अफसर मिलेंगे ही नहीं तो फिर किससे अपना दुख दर्द कहें और कौन उनका दुख दर्द सुनेगा। महापौर ने तो यह कहकर कि मार्च में ही कुछ होगा, जो मिलने आए उनके सामने हाथ जोड. लिए। राहत की उम्मीद लिए महापौर से मिलने पहुंचे ये लोग उनके रवैये से हताश होकर खाली हाथ लौट आए। हालांकि इनमें जिन्हें भाजपा का कार्यकर्ता कहा जा सकता है वो नगर निगम के अफसरों और महापौर का बचाव करते दिखे। वो लोगों को यही समझाने में लगे थे कि समस्या पुरानी है इसका समाधाना होने में कुछ वक्त लग सकता है फिर महापौर ने मार्च माह में बजट आने पर इस समस्या का समाधान करा देने का वादा किया तो है। महापौर के बचाव के नाम पर कालोनी के लोग दो फाड़ नजर आए। जितनी बड़ी इन कालोनियों की मुसीबत है उसके बाद यहां के लोगों को तुरंत मदद की दरकार हैं। वो चाहते हैं कि जब बजट आएगा तब आएंगा, अभी तो कुछ ऐसा कर दिया जाए जिससे कालोनियों में भरे पानी की निकासी हो सके। लेकिन महापौर को जो रवैया नजर आ रहा है, उसके चलते लग नहीं रहा है कि मार्च से पहले कुछ होगा। लोगों का इतना कहना था कि निगम प्रशासन फिलहाल ऐसा कुछ करा दे कि पानी की निकासी होने लगे। घरों में जो पानी भरता है वो ना भरे, लेकिन नगर निगम प्रशासन के भरोसे ऐसी कुछ भी उम्मीद लोग नहीं कर रहे हैं।
महीनों से है मुसीबत
गंगा और शिव गंगा कालोनी की महिलाओं ने बताया कि यहां रहने वाले महीनों से इस मुसीबत से दो चार हैं। बिल्डर ने सेटिंग गेटिंग के चलते कालोनी तो काट दी, लेकिन सीवरेज सिस्टम जैसी बेहद जरूरी सुविधा देना भूल गया। दोनों ही कालोनियों में रहने वालों के लिए बिल्डर ने यह मुसीबत बतौर यहां रहने की सजा के तौर पर छोड़ दी। बिल्डर से सीवरेज सुविधा नहीं दी तो लोगों ने खुद ही सुविधा का रास्ता निकाल लिया। घरों से जो पानी निकलता है उसको पास के एक बड़े खेत में बने गहरे गड्ढे में छोड़ देते थे। अरसे से ऐसे ही गुजारा चल रहा था, लेकिन अब जब उस खेत में भी कालोनी काटने वाले बिल्डर आ गए तो उन्होंने जिस गड्ढे में गंगा और शिव गंगा कालोनी का पानी भर रहा था, उसका भराव करा दिया।
कालोनी में भरने लगा पानी
खेत के गड्ढे का भराव होने के चलते दोनों कालोनियों का जो पानी खेत में जा रहा था, वो पानी अब निकासी का रास्ता बंद होने से खेत में भरने लगा। पहले तो लोगों को इस मुसीबत का अंदाजा नहीं हुआ, लेकिन जब घरों से निकलने वाला पानी कालोनी में भरने लगा और आने जाने के रास्ते पानी में डूब गए और रास्तों के बाद पानी जब घरों में पहुंचने लगा तब कहीं जाकर पता चला कि यह मुसीबत कितनी बड़ी है। पानी भर जाने की वजह से ना तो बच्चे स्कूल जा पा रहे थे ना ही घरों में सही प्रकार से साफ सफाई हो पा रही थी। यहां तक कि मरीजों को डाक्टरों तक के यहां नहीं ले जा पा रहे थे। इसके अलावा भी कई बड़ी मुसीबत कालोनी में पानी भर जाने की वजह से सिर पर मंडराने लगीं। कुछ समझ नहीं आया करें तो क्या करें।
रास्ते में पानी में गिरने लगे लोग
कालोनी के रास्तों में पानी भर जाने की वजह से सबसे बड़ी मुसीबत लोगों का आते जाते वक्त पानी में गिर जाना है। ऐसा भी नहीं कि लोग काम धंधे पर नहीं जाएंंगे। इसके अलावा भी और तमाम काम होते हैं, जिनकी वजह से आना जाना लगा रहता है। घर में बाहर से भी लोग आते हैं। कालोनी के लोग भी एक दूसरे के यहां आते जाते हें, लेकिन रास्तों में भरे पानी की वजह से कई बार लोग इसमें गिर भी गए। सबसे ज्यादा कालोनी की महिलाओं और बच्चों को मुसीबत उठानी पड़ी। तमाम महिलाओं और बच्चों ने बताया कि वो पानी में गिर गए। कालोनी की हेमलता, निशा, सलोनी, ब्रह्मकली, विपिन चिकारा, नीरज गांधी, मास्टर राजेन्द्र व विनीत वर्मा आदि ने बताया कि तमाम ऐसे लोग रहे जो बाइक व स्कूटी से पानी में गिर गए।