
बृंदावन/मथुरा। रात जैसे ही घड़ी सूई एक के ऊपर आयी यानि बारह बजे मंदिरों में शंख नगाड़े बज उठे। कान्हा का जन्म हो चुका था। नंद को आनंद भयो जय कन्हैया लाल की.. गाते हुए झूम रहे थे। मथुरा स्थित विश्व प्रसिद्ध बंदीगृह मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ नंद को आनंद भयो जय कन्हैया लाल की… गाते हुए झूम रही थी। बंदी गृह में लाला ने जन्म ले लिया था। देवकी और वासुदेव लाला के जन्म से बहुत खुश था। यह लाला नहीं बल्कि साक्षात ब्रह्म भगवान विष्णु के अवतार हैं। आकाश से देव पुष्पवर्षा कर रहे थे, लेकिन अगले ही पल देवकी और वासुदेव की आंखें गीली हो गई। उन्हें कंस डर सताने लगा कि वो आएगा और लाल काे छीनकर इसका भी वध कर देगा, उसी समय आकाशवाणी होती है कि लाल को गोकुल पहुंचा दो।भारी बारिश होती है। यमुना जी उफान मार रही हैं, एक टोकरी में लाला को रखकर वासुदेव जी गोकुल के लिए यमुना जी से होकर चलते हैं, लेकिन आगे बढ़ना आसान नहीं होता, ऐसा लगता है कि मानों आज यमुना जी उफन कर आसमान छू लेंगी। जैसे ही यमुना जी लाला के पांव तक पहुंची हैं अगली ही पल वो शांत हो जाती हैं, दरअसल यमुना जी को साक्षात ईश्वर के पांव छूने थे। वासुदेव जी लाल को गोकुल पहुंचा देते हैं। मथुरा के विश्व प्रसिद्ध इस मंदिर में यह झांकियों में दिखाया जा रहा था।
वहीं दूसरी ओर बृंदावन की छटा निराली थी, प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में लोग खुशी से झूम रहे थे। इस्कान मंदिर में चारों ओर भगवान के जन्म की खुशियां मनायी जा रही थीं। वृंदावन में मानों पूरा विश्व उतर आया हो, केवल भारत ही विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु जमा हो गए थे। जहां देखो उत्सव सरीखा माहौल नजर आ रहा था। कण-कण में साक्षात ईश्वर नजर आ रहे थे। बृज भूमि भगवान के जन्म से धन्य-धन्य हो गई। यहां तमाम आश्रमों व होटलों में भी प्रभु के जन्म से उत्सव सरीखा माहौल बना हुआ है। बांके बिहारी जी को लेकर तमाम गीत गाए जा रहे हैं। कुछ लो नंद को आनंद भयो जन कन्हैया लाल की.. गा रहे हैं। हर ओर उत्सव है। वृदांवन स्वर्ग सरीखा नजर आ रहा है।