खालिद को न्यूयार्क के मेयर का खत

kabir Sharma
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तिहाड़ जेल में रखे गए हैं एक्टिविस्ट खालिद, न्यूयार्क के मेयर के शपथ के वक्त वायरल हुआ खत, भाजपा ने बताया आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप

नई दिल्ली/न्यूयार्क। न्यूयार्क सिटी ने नए मेयर जोहरान मामदानी जिस वक्त कुरआन हाथ में थाम कर शपथ ले रहे थे, उसी वक्त उनकी ओर से तिहाड़ में रखे गए एनएनयू के छात्र नेता को लिखा गया खत भी दुनिया खासतौर से भारतीयों के सामने आया। पत्र में लिखा है: “डियर उमर, मैं अक्सर तुम्हारी उन बातों को याद करता हूं जो कड़वाहट के बारे में हैं, और यह महत्वपूर्ण है कि इसे खुद पर हावी न होने दें। तुम्हारे माता-पिता से मिलकर खुशी हुई। हम सब तुम्हारे बारे में सोच रहे हैं।” न्यूयार्क के मेयर ने यह खत अपनी हैडराइटिंग में लिखा है, जिसके बड़े मायने हैं। न्यूयार्क सिटी जैसे दुनिया के सबसे शानदार शहर का मेयर यदि किसी को खुद खत लिखता है तो वो वाकई बड़ी बात है। याद रहे कि एनएनयू के छात्र नेता और एक्टिविस्ट पर दिल्ली में दंगे भड़काने के आरोप लगे हैं।

उमर की दोस्त ने किया मामदानी का खते शेयर

तिहाड़ में रखे गए खालिद को मामदानी के द्वारा लिखे गए खत को खलिद की साथी ज्योत्सना लाहिड़ी ने 1 जनवरी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किया, ठीक उसी दिन जब मामदानी ने न्यूयॉर्क के मेयर के रूप में शपथ ली। मामदानी अमेरिका के सबसे बड़े शहर के पहले मुस्लिम और दक्षिण एशियाई मूल के मेयर हैं। खालिद पर यूएपीए (अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट) सहित कई गंभीर धाराएं लगी हैं। खालिद ने इन आरोपों से इनकार किया है और उनकी जमानत अर्जियां बार-बार खारिज हुई हैं। हाल ही में दिसंबर 2025 में उन्हें बहन की शादी के लिए 14 दिन की अंतरिम जमानत मिली थीं, लेकिन अब वो तिहाड़ में हैं।

पीएम मोदी के अमेरिका पहुंचने से पहले मामदानी ने खालिद का खुलकर स्पोर्ट किया था। उन्होंने न्यूयॉर्क में आयोजित ‘हाउडी, डेमोक्रेसी?!’ कार्यक्रम में मामदानी ने खालिद की जेल से लिखी चिट्ठियों के अंश पढ़े थे। तब उन्होंने खालिद को लिंचिंग और नफरत के खिलाफ अभियान चलाने वाला स्कॉलर बताया। साथ ही भारत सरकार के खालिद के साथ रवैये को गैरजिम्मेदारा और चिंताजनक बताया। लंबी हिरासत बगैर किसी ट्रांयल को अन्याय बताया।

आतंरिक मामलों में दखल का आरोप

न्यूयार्क के मेयर को भाजपा ने इसे भारत के आंतरिक मामलों में दखल बताया। मामदानी को भारत की संप्रभुता को चुनौती करार दिया, लेकिन मानवाधिकार समूहों और विपक्षी दलों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक कैदियों के समर्थन का प्रतीक बताया है। यहां यह भी याद रहे कि अमेरिकी कांग्रेस के आठ सदस्य भी खालिद की बगैर ट्रायल लंबी कैद का मामला उठा चुके हैं।

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