डिग्री कॉलेज की प्रवक्ता के झूठ बोलने पर गुजारा भत्ता पाने का अधिकार नहीं-हाइकोर्ट
इलाहाबाद / फतेहपुर: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उच्च शिक्षा प्राप्त एम ए,पी .एच.डी . पत्नी मोनिका गुप्ता जो स्वर्णालता डिग्री कॉलेज उन्नाव में शिक्षिका के रूप में कार्य करके आय अर्जित करने के बावजूद अपने को कोई आमदनी का स्रोत न होकर बताने के मामले में पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। भत्ता दिए जाने की मांग के खारिज आदेश के विरुद्ध पत्नी के द्वारा दाखिल पुनरीक्षण याचिका को हाइकोर्ट ने भी खारिज कर दिया ।न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा ने पत्नी मोनिका गुप्ता निवासी विकास कॉलोनी फतेहपुर की ओर से अधिवक्ता पुलक गांगुली ने बहस में बताया कि याची की शादी 2017 में हुई थी ।पति बैंक आफ इंडिया ,गुजरात मे मैनेजर के पद पर 90 हजार की आमदनी करता है। पति व उसके परिवार के द्वारा दहेज में 10 लाख की मांग को लेकर उसका उत्पीड़न कर मार पीट घर से निकाला गया है और दो- दो दिन तक भूखा रखा गया।विपक्षी पति अंबर गोयल निवासी जिला आनंद, गुजरात की ओर से अधिवक्ता सुनील चौधरी ने याची की पुनरीक्षण याचिका पर आपत्ति करते हुए बताया कि याची ने दहेज उत्पीडन का झूठा मुकदमा विपक्षी पति व उसके परिवार नंदो समेत के ऊपर किया था। उसके बाद गुजारा भत्ता दिलाए जाने की अर्जी दाखिल कर हलफनामा दिया उसके पास आमदनी का कोई स्रोत नहीं है बाद में स्वीकार किया डिग्री कॉलेज में लेक्चरर के रूप में पढ़ाती है ।
विपक्षी पति की ओर से अधिवक्ता सुनील चौधरी ने बताया कि बिना किसी पर्याप्त कारण के याची अलग रह रही है ।याची उच्च शिक्षित एम. ए., पी एच.डी महिला है इसकी आमदनी का पर्याप्त स्रोत है माननीय न्यायालय के समक्ष अस्वच्छ हाथों से आकर कोर्ट को गुमराह किया है । परिवार न्यायालय ने अपने निष्कर्ष में कहा है कि पत्नी का पृथक रहने का कोई उचित एवं पर्याप्त कारण दर्शित कर पाने में असमर्थ रही है और प्रार्थिनी दौरान मुकदमा बतौर शिक्षिका कार्य करके आय अर्जित कर रही थी परंतु उसने उक्त तथ्यों को छुपाते हुए भरण पोषण प्रार्थना पत्र व अंतिम भरण पोषण हेतु प्रार्थना पत्र एवं उसके समर्थन में दिए गए शपथ पत्र में यह गलत रूप से अंकित किया कि उसके पास आय का कोई साधन नहीं है । याची के द्वारा परिवार न्यायालय में स्वच्छ हाथों से वाद प्रस्तुत नहीं किया गया बल्कि स्वेच्छा से विपक्षी का बिना किसी उचित एवं पर्याप्त कारण के परित्याग करके न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करते हुए असत्य कथनों के आधार पर भरण पोषण प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया है। जिस पर परिवार न्यायालय ,फतेहपुर ने पति की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र 340 सीआरपीसी को स्वीकार करते हुए पत्नी के विरुद्ध मुकदमा चलाए जाने का आदेश पारित किया व पत्नी के द्वारा भत्ते की मांग की याचिका को खारिज कर दिया गया ।परिवार न्यायालय के भत्ते की मांग को खारिज आदेश के विरुद्ध हाइकोर्ट में परिवार न्यायालय के द्वारा भत्ता खारिज के आदेश को चुनौती दी गई ।जिसको हाईकोर्ट ने भी विपक्षी पति के अधिवक्ता सुनील चौधरी की बहस को सुनकर पत्नी की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दिया।