कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष इसमें शामिल, पक्षपात पूर्ण रवैये से सदन चलाने का आरोप, 118 सांसदों के हस्ताक्षर, तृणमूल कांग्रेस (ममता बनर्जी) अलग
नई दिल्ली। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा। इससे सदन में राजनीतिक घमासान के और ज्यादा बढ़ने के असार नजर आ रहे हैं। सत्ताधारी और विपक्षियों के बीच सदन में ज्यादा तलखी देखने को मिल सकती है।कांग्रेस के नेतृत्व में INDIA गठबंधन (विपक्ष) ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) का नोटिस 10 फरवरी 2026 को लोकसभा महासचिव को सौंपा था। यह प्रस्ताव संविधान के अनुच्छेद 94(c) और लोकसभा नियमों के तहत दिया गया है। इस पर 9 मार्च को चर्चा और वोटिंग होगी।
ये है स्पीकर पर आरोप
कांग्रेस स्पीकर ओम बिरला पर अधिक हमलावर है। लेकिन अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने के बाद ये हमले चर्चा के दौरान बढ़ने तय माने जा रहे हैं। विपक्ष खासतौर से कांग्रेस का स्पीकर ओम बिरला पक्षपातपूर्ण तरीके से सदन संचालित कर रहे हैं। सत्ता पक्ष के सांसदों को ज्यादा बोलने का समय दिया जाता है, जबकि विपक्षी सांसदों (खासकर महिला सांसदों) को रोका-टोका जाता है, उन्हें बोलने नहीं दिया जाता, और झूठे आरोप लगाकर बदनाम किया जाता है। नोटिस पर हस्ताक्षर: कुल 118 सांसदों के (कांग्रेस, सपा, लेफ्ट, RJD आदि से)। राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने हस्ताक्षर नहीं किए। तृणमूल कांग्रेस (ममता बनर्जी) ने समर्थन नहीं किया और अलग रुख अपनाया।
नया नोटिस सौंपा गया
नोटिस में शुरुआत में कुछ खामियां थीं (जैसे तारीख गलत), लेकिन स्पीकर ने खुद सुधार का निर्देश दिया, जिसके बाद नया नोटिस सौंपा गया। नियमों के अनुसार, 50 सदस्यों का समर्थन और 14 दिन का नोटिस जरूरी है।
मुख्य आरोप और विवरण:
- विपक्ष का आरोप:
- प्रक्रिया:
स्पीकर ओम बिरला का रुख:
- मोरल ग्राउंड्स पर फैसला: प्रस्ताव पर चर्चा और फैसला होने तक वे लोकसभा की कार्यवाही में शामिल नहीं होंगे। वे सदन नहीं आएंगे और कुर्सी पर नहीं बैठेंगे।
- बजट सत्र का पहला चरण 13 फरवरी को समाप्त हुआ था। दूसरा चरण 9 मार्च 2026 से शुरू होगा, और लोकसभा में इस प्रस्ताव पर चर्चा और वोटिंग उसी दिन (9 मार्च) होने की संभावना है।
- स्पीकर ने कहा: जांच हो और उचित कार्रवाई हो।
सरकार और NDA का पक्ष:
- केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा: स्पीकर का काम कार्यवाही चलाना, सरकार को आगे बढ़ाना और विपक्ष को बोलने का मौका देना है। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसा कि स्पीकर के चैंबर में घुसकर प्रदर्शन किया, लेकिन बिरला ने संयम दिखाया। अगर सोमनाथ चटर्जी जैसे स्पीकर होते तो सस्पेंड कर देते।
- NDA के पास बहुमत है, इसलिए प्रस्ताव पास होने की संभावना बहुत कम है। यह विपक्ष की रणनीति ज्यादा लग रही है संसद में हंगामा बढ़ाने और स्पीकर पर दबाव बनाने की।
इतिहास में ऐसा पहली बार नहीं:
- ओम बिरला के खिलाफ यह चौथा अविश्वास प्रस्ताव है (पहले भी कांग्रेस ने लाए थे)।
- पहले स्पीकरों के खिलाफ भी ऐसे प्रस्ताव आए, लेकिन कोई स्पीकर पद से नहीं हटा (ज्यादातर खारिज हो गए या वोटिंग में हार गए)।