आगरा की श्रीराम कंस्ट्रक्शन पर नहीं मेनपावर सप्लाई का लाइसेंस, निगम के अधिकारी फिर भी मेहरबान, मजिस्ट्रेटी जांच करा कर हो कठोर कार्रवाई
मेरठ। आगरा की श्रीराम कंपनी के पास मैनपावर सप्लाई किए जाने का लाइसेंस नहीं है, लेकिन नगर निगम मेरठ के अधिकारियों की मेहरबानी के चलते तमाम कायदे कानून ताक पर रखकर इस कंपनी से मैनपावर सप्लाई का अनुबंध नगर निगम प्रशासन ने किया हुआ है। नगर निगम प्रशासन की इस कारगुजारी का मामला मंडलायुक्त तक पहुंच गया और केवल श्रीराम कंपनी ही नहीं बल्कि नगर निगम के जो अधिकारी इस खेल में शामिल हैं उन पर भी कार्रवाई संभव है।
अफसरों ने रख दिए कायदे कानून ताक पर
नगर निगम मेरठ और आगरा की श्रीराम कंपनी के इस घालमेल के मामले का सनसनीखेज खुलासा आरटीटाई एक्टिविस्ट विनेश विद्यार्थी ने किया है। इस संबंध में उन्होंने तमाम साक्ष्यों व तथ्यों की जानकारी देते हुए मंडलायुक्त को पत्र सौंपा, जिसमें उन्होंने जानकारी दी है कि नगर निगम प्रशासन ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरों टोलरेंस की योगी सरकार की नीति के खिलाफ जाकर कार्य किया है। उन्होंने बताया कि नगर निगम से अनुबंधित कंपनीज, अग्रवाल एंड कंपनी तथा श्री राम कंस्ट्रक्शन कंपनी ठेका देने के मामले में श्रम अधिनियम 1970 की धारा 7 व धारा 12 तथा नियम 25 का उल्लंघन अर्से से किया जा रहा है, नगर निगम मेरठ द्वारा 2415 सफाई वर्कर्स की आपूर्ति हेतु अग्रवाल एंड कंपनी से अनुबंध किया गया था, जिस अनुबंध में उल्लिखित धाराओं का उल्लंघन किया गया है, वही प्रश्नगत कंपनी के पास सफाई वर्कर्स सप्लायर का लाईसेंस भी नहीं है, जो सघन जांच का विषय होने के अलावा नगर निगम के भ्रष्टाचार जुड़ा हुआ भी मामला है।
कभी भी 7 तारीख को सेलरी नहीं
मंडालयुक्त को अवगत कराया गया है कि नगर निगम व अग्रवाल एंड कंपनी के बीच सम्पादित अनुबंध की शर्तों में, सफाई वर्कर्स को हर महीने की 7 तारीख तक मानदेय दिए जाने की शर्त उल्लिखित है, किंतु प्रश्नगत तारीख के बाद मानदेय दिया जा रहा है, जिस सम्बन्ध में वादी/ प्रार्थी द्वारा उप श्रमायुक्त से भी कंपनी के खिलाफ कार्रवाई का आग्रह किया जा चुका है।
दिसम्बर 25 का मानदेय आ 12जनवरी तक नहीं दिया जा सका। मुख्य नियोजक/ अग्रवाल एंड कंपनी द्वारा वर्ष 2019 से ही केवल साप्ताहिक अवकाश दिया जा रहा है, वर्ष 2017 से वर्ष 2018 तक, कोई अवकाश नहीं दिया गया, दिसम्बर 2023 से, मातृत्व अवकाश, राष्ट्रीय अवकाश, आकस्मिक अवकाश आदि नहीं दिए जा रहे हैं। मुख्य नियोजक और अग्रवाल एंड कंपनी द्वारा, 2425 सफाई वर्कर्स को, बोनस संदाय अधिनियम 1965 के अनुसार अर्हता के फलस्वरूप कभी बोनस नहीं दिया गया है, किया गया है।
पीएफ जमा ना कराया जाना घोटाले की श्रेणी में
मंडलायुक्त को दिए गए पत्र में बताया गया है कि पीएफ ना जमा करना कर्मचारियों के प्रति अपराध व घोटाले की श्रेणी में आता है। अग्रवाल एंड कंपनी द्वारा हर महीने पी एफ जमा नहीं कराया जा रहा है, पी एफ की ई सी आर की जांच कराई जाये। नगर निगम में जलकल विभाग में 250 वर्कर्स की आपूर्ति का टेंडर हुआ है, जिसकी प्रोपराइटर नीतू अग्रवाल है ( जो अग्रवाल एंड कंपनी के विजय अग्रवाल पत्नी है) द्वारा 250 की स्वीकृति के सापेक्ष 200 वर्कर्स की हाजरी दर्ज हो रही है किंतु भुगतान 250 वर्कर्स का किया जा रहा है, नियोजित वर्कर्स के नाम वाली सूची और पेमेंट शीट की जांच अत्यावश्यक है। श्रीराम कंस्ट्रक्शन कंपनी की प्रोपराइटर नीतू अग्रवाल को कार्यालय जिला मजिस्ट्रेट आगरा द्वारा जारी चरित्र प्रमाण-पत्र, संख्या 2480/न्याय सहायक -3 8 फरवरी 2019 में नीतू अग्रवाल पत्नी विजय प्रकाश अग्रवाल उल्लिखित है, और व्यवसाय ठेकेदारी उल्लिखित है, वहीं दूसरी ओर कार्यालय जिला मजिस्ट्रेट आगरा द्वारा जारी चरित्र प्रमाण-पत्र संख्या 885 /न्याय सहायक -3 24 फरवरी 2021 में नीतू अग्रवाल द्वारा पति के नाम की जगह, पिता का नाम ब्रज मोहन अग्रवाल और व्यवसाय ग्रहणी उल्लिखित है, दोनों चरित्र प्रमाण-पत्र में उल्लिखित तथ्यों की जांच अत्यावश्यक है। आयुक्त ने इस मामले को जांच के लिए नगरायुक्त को भेजा है। विनेश विद्यार्थी ने यह भी बताया कि उन्होंने नगरायुक्त से भी इस संबंध में बात की है।
ये रहे मौजूद
ज्ञापन पत्र में पर हिंद मजदूर सभा जिला काउंसिल के मंत्री विनेश विद्यार्थी, अंकुश महरोल, राजू मनोठिया महामंत्री, श्रमिक प्रतिनिधि भारतीय संविदा आऊटसोर्सिंग कर्मचारी संघ शाखा नगर निगम के हस्ताक्षर हैं।