हाईकोर्ट से नोटिस, आयुक्त आवास, मंडलायुक्त व नगरायुक्त पार्टी, अगली सुनवाई मार्च में, सेंट्रल मार्केट की दुकानों से बड़ा मामला
इलाहाबाद/ मेरठ। ना तो मालिकाना हक है और ना ही कोई नक्शा पास कराया गया है फिर भी नगर निगम ने पब्लिक के टैक्स के पैसे से अब तक करीब डेढ़ सौ करोड़ फूंक दिया है। इसको लेकर दायर की गई एक रिट के बाद हाईकोर्ट न प्रदेश के आवास आयुक्त, मेरठ के मंडलायुक्त और नगरायुक्त को नोटिस जारी किए हैं। नोटिस अपलोड भी हो गए हैंं। इस मामले में हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 25 मार्च को होनी है। नोटिस 9 दिसंबर को जस्टिस दिनेश पाठक की कोर्ट से जारी किए गए हैं। जैसा की एडीएम एलए के कार्यालय ने अवगत कराया है। इसके अलावा अलीगढ़ निवासी जिस शख्स की यह भूमि है उसको किसी भी प्रकार के धन का हस्तांतरण नहीं किया गया है जिससे साबित किया जा सके कि उक्त शख्स ने मालिकाना हक नगर निगम मेरठ को दे दिया है।
यह है पूरा मामला
शास्त्रीनगर के नई सड़क इलाके में खसरा नंबर 6041जो 9 एकड़ से अधिक का रकबा है, इसका मालिकाना हर अलीगढ़ के किसी बड़े कारोबारी का बताया जाता है, लेकिन नगर निगम ने इस पर बलात कब्जा कर वहां पर बगैर कोई नक्शा पास कराए अवैध निर्माण शुरू कर दिया है। इस मामले को लेकर एक शिकायती पत्र सीएम कार्यायल व मुख्य सचिव मनोज कुमार को नगर निगम के पूर्व नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. प्रेम सिंह ने एक पत्र भेजा गया है। जिसमें बताया गया है कि उक्त भूमि का मालिकाना हक ना होते हुए भी नगर निगम वहां पर कामर्शियल भवन बना रहा है। इसको लेकर आवास विकास परिषद नगर निगम को बगैर नक्शा पास कराए निर्माण करने के लिए नोटिस भी दे चुका है। पूर्व नगर स्वास्थ्य अधिकारी के पत्र मे सुप्रीमकोर्ट के उस आदेश का हवाला दिया गया है जिसमें आवासीय इलाके में किसी प्रकार के व्यवसायिक निर्माण पर मनाही है। इसके बाद भी नगर निगम द्वारा आवासीय क्षेत्र में यह निर्माण किया जा रहा है। यह भी अवगत कराया गया है कि इस भूमि का आज तक कोई गजट नोटिफिकेशन नहीं किया गया है। निगम के पूर्व नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने सीएम व मुख्य सचिव को भेजे पत्र में सुप्रीमकोर्ट के 17 दिसंबर साल 2024 के आदेशों का हवाला देते हुए अवगत कराया है कि इस प्रकार के सभी अवैध निर्माण ध्वस्त किए जाएं, लेकिन आवास विकास परिषद ने ध्वस्तीकरण की कोई कार्रवाई इसके खिलाफ नहीं की है। वहीं दूसरी ओर सुप्रीमकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए खसरा नंबर 6041 में किए जा रहे अवैध निर्माण के खिलाफ एक अवमानना याचिका हाईकोर्ट में आरटीआई एक्टिविस्ट राहुल ठाकुर ने दायर की है। इस याचिका पर बीती 9 दिसंबर को हाईकोर्ट ने प्रदेश के आवास आयुक्त, मंडलायुक्त और नगरायुक्त को अवमानना के नोटिस जारी कर दिए हैं।
सेंट्रल मार्केट की 22 दुकानें ध्वस्त तो निगम का निर्माण क्यों नहीं
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सुप्रीमकोर्ट के आदेश के चलते शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में आवासीय भूखंड़ पर बनायी गयी बाइस दुकानों को ध्वस्त किया जा सकता है तो फिर 60/41 भूखंड पर किए गए अवैध कब्जे को ध्वस्त क्यों नहीं किया जा रहा है। बाइस दुकानो के पास तो मालिकाना हक भी था, नगर निगम के पास तो मालिकाना हक भी नहीं है। राहुल ठाकुर ने बताया कि इसको लेकर अवमानना की याचिका दायर की गई जिसको लेकर ९ दिसंबर को हाईकोर्ट ने प्रदेश के प्रमुख सचिव आवास, मंडलायुक्त मेरठ और नगरायुक्त के खिलाफ नोटिस जारी किए गए हैं।
वर्जन
हाईकोर्ट के नोटिस को लेकर जब मंडलायुक्त से बात के लिए संपर्क किया गया तो कॉल कैंप कार्यालय पर मौजूद खुद को स्टैनो बताने वाले उमेश ने रिसीव की। उन्होंने बताया कि अभी इस प्रकार का कोई नोटिस नहीं मिला है। प्रमुख सचिव आवास विकास व नगरायुक्त को उनके वाटसअप पर मैसेज भेजकर इस संबंध में वर्जन मांगा गया।