शंकराचार्य का अनशन बना है गले की फांस, भाजपा की छवि बना दी सनातन विरोधी, कई बड़े संतों ने की घटना की निंदा
नई दिल्ली/बनारस। माध मेले के दौरान जो कुछ घटनाक्रम हुआ उसके बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का अनशन गले की फांस बनता जा रहा है। इस पूरे मामले में में बनारस के टॉप अफसरों की कारगुजारी ने सूबे के सीएम के लिए नयी मुसीबत खड़ी कर दी है। वहीं दूसरी ओर इस मामले के चलते तमाम साधु संतों के अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में उतर आने के बाद बनारस के तमाम आला अधिकारियों ने भाजपा की छवि को सनातन विराेधी बनाने का काम किया है।
पहले से रही है पेश्वाई की रवायत
कुंभ और माघ मेले सरीखे आयोजनों में साधु संतों और नागाओं की पेश्वाई की पुरानी रिवायत चली आ रही है। इसमें तमाम साधु संत और नागाओं की अखाड़े अपने-अपने रथों और पालकियों में सवार होकर स्नान के लिए पहुंचा करते हैं। प्रशासन व पुलिस का केवल इतना काम होता है कि साधु संतों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना ना करना पड़े। पेश्वाई स्नान के लिए अधिकारी बाकियों को स्नान रोक देते हैं, लेकिन यहां उलटा कर दिय गया। अफसरों ने शंकराचार्य का स्नान ही रोक दिया। जिस पालकी से शंकराचार्य आ रहे थे, उसको भी रोक दिया गया। नतीजा सबके सामने हैं।
वायरल वीडियो से अफसर बेपर्दा
बनारस माघ मेले की घटना के बाद शंकराचार्य के साथ जो बटुक चल रहे थे अफसरों के इशारे पर पुलिस द्वारा उनके साथ अपमानजनक व्यवहार ने इस आग में घी डालने का काम किया। बनारस में यदि पुलिस ने संयम से काम लिया होता तो शायद हालात इतने ज्यादा खराब ना होते ना ही सरकार पर विपक्षी दल हमलाबर होता, लेकिन अफसरों की ना समझी और पुलिस के उतावलेपन ने सारा गुड गोवर करने का काम किया।
विपक्ष योगी सरकार पर हमलावर
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का अनशन और घटना को लेकर कांग्रेस, सपा और आम आदमी पार्टी का योगी सरकार पर हमला एक सोची समझी राजनीति है। लेकिन इसका मौका देने का काम बनारस प्रशासन के अफसरों ने ही किया है। विपक्ष के हमले केवल योगी सरकार तक या भाजपा तक ही सीमित नहीं रहे बल्कि प्रधानमंत्री मोदी पर भी इस मामले को लेकर विपक्षी दल हमलावर हैं। इस घटना के साथ ही तमाम पुरानी घटनाएं जोड़ दी हैं जिसमें मंदिरों को तोड़ा गया। माता अनुसूया की प्रतिमा को खंड़ित किया गया। विपक्ष के हमले का भाजपा पर कोई पलटवार नहीं हैं। यहां तक तक नेशनल टीवी डिवेटों में अब भाजपा के प्रवक्ता आने से बच रहे हैं। इस मामले में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत तथा कई ब्राह्मण संगठन भी कूद गए हैं।