

सीएम ग्रिड के नाम पर रहते हैं गायब, करोड़ों के विकास कार्यों का पलीता, मनमानी पर उतरे हैं ठेकेदार, नहीं की जा रही मॉनिटरिंग
मेरठ। नगर निगम से अफसर गायब है। पार्षद और महानगर की जनता को कई बार परिक्रमा के बाद भी निगम अफसर नहीं मिल रहे हैं। मंडलायुक्त ने इस मामले में नगरायुक्त को जांच कर कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। वहीं दूसरी ओर महापौर भी कह चुके हैं कि निगम के अफसर निरंकुश हो चुके हैं। निगम में पूरी तरह से अराजकता सरीखे हालात हैं। स्थिति यह है कि ना तो निगम अफसर पार्षदों को मिल रहे हैं और ना ही जनता के काम हो रहे हैं। निगम अफसरों के रवैय से खिन्न होकर पार्षदों ने अब उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। तमाम दलों के पार्षदों व पूर्व पार्षद इस मामले को लेकर मंडलायुक्त व जिलाधिकारी तक जा पहुंचे। निगम अफसर की कार्यप्रणाली की उनसे शिकायत की और यह भी बताया कि निगम अफसर महानगर के विकास में पलीता लगाने पर उतारू हैं। ये तमाम पार्षद गुरूवार को पूर्व पार्षद अब्दुल गफ्फार के नेतृत्व में आयुक्त व जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन दिया।
करोड़ों रुपए के विकास के कार्य प्रभावित
आयुक्त और जिलाधिकारी को दिए गए ज्ञापन में पार्षदों ने बताया कि नगर निगम के बड़े अफसरों के रवैये से पंद्रहवें वित्त आयोग और नगर निगम बोर्ड फंड से कराए जा रहे कई सौ करोड़ के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। अब्दुल गफ्फार ने बताया कि विकास के तमाम काम ठेकेदार या फिर किसी कार्यदायी ऐजेंसी से कराए जाते हैं। इन कामों की मानिटरिंग मुख्यत नगर निग मे अफसर करते हैं। जहां तक पार्षदों की बात है तो वो केवल इन कामों को देख सकते हैं, लेकिन यदि कोई कार्य ठीक नहीं हो रहा है तो उसको लेकर निगम के अफसर ही ठेकेदार को निर्देश दे सकते हैं या कार्रवाई कर सकते हैं ऐसी तमाम बातें हैं जो केवल निगम अफसरों के अधिकार क्षेत्र की हैं, पार्षदों को उतने अधिकार नहीं। लेकिन जब निगम अफसर पार्षदों से मिलेंगे ही नहीं। नगर निगम स्थित अपने कार्यालय में बैठेगे ही नहीं तो फिर ठेकेदार तो मानमानी करेंगे ही और इसका सीधा साइड इफैक्ट महानगर के विकास पर पड़ेगा। जिलाधिकारी को बताया गया कि अफसरों को तवादला हो जाएगा तो वहां तो यहां से चले जाएंगे , लेकिन विकास के जो काम निगम अफसरों की लापरवाही व अर्कमणता की भेंट चढ़ जाएंगे उसकी कीमत मेरठ वालों को चुकानी हाेगी। डीएम काे बताया कि जब भी निगम में किसी अफसर से मिलते जाते हैं तो बताया जाता है कि सीएम ग्रिड की साइट पर हैं। बताए गए स्थान पर पहुंचते हैं तो वहां पता चलता है कि अमुक अफसर तो आज आए ही नहीं। पार्षदों का आरोप है कि अफसरों में इतनी ज्यादा अराजकता है कि कॉल तक रिसीव नहीं करते। जब जनता के नुमाइंदों की काॅल रिसीव नहीं की जाएगी तो फिर जनता से ये अफसर मिलेंगे ऐसा सोचना भी बेमाने हाेगा।
कई सौ करोड़ के कामों पर अफसरों की लापरवाही का ग्रहण
महानगर के विकास के लिए पंद्रहवें वित्त आयोग और नगर निगम बोर्ड फंड से कई सौ करोड़ व्यय किए जा रहे हैं। ये काम किसी भी दशा में समय से पूरे नहीं हो सकेगे। इसकी बड़ी वजह ठेकेदारों द्वारा किए जा रहे कामों की अफसर माॅनिटरिंग नहीं कर रहे हैं। सीएम ग्रिड योजना के तहत चल रहे कामों के नाम पर निगम के अफसरों ने महानगर के विकास के लिए खर्च किए जा रहे कई सौ करोड़ के कामों से पूरी तरह से कन्नी काट ली है। अब्दुल गफ्फार ने डीएम को बताया कि जब अफसर साइट पर ही नहीं जाएंगे तो ठेकेदार समय काम कैसे पूरे करेगा। इसका दोहरा नुकसान होगा। एक तो काम समय से पूरा नहीं होगा और दूसरे काम की लागत भी बढ़ जाएगी। इसके लिए सिर्फ और सिर्फ नगर निगम प्रशासन के आला अफसर जिम्मेदार हैं।
सीएम ग्रिड योजना से हटाए जाएं निगम अफसर
मंडलायुक्त और जिलाधिकारी से आग्रह किया गया है कि सीएम ग्रिड योजना के तहत मेरठ में कराए जा रहे कार्यों से नगर निगम के अफसरों को हटाया जाए। क्योंकि सीएम ग्रिड योजना के तहत कराए जाने वाले कामों को लेकर ठेकेदार के काम पर जिस तरह से सवाल उठ रहे हैं और निगम अफसर उस ओर तवज्जाे नहीं दे रहे हैं उससे इतना तय है कि ना तो सीएम ग्रिड योजना के तहत कराए जा रहे काम ठीक प्रकार से हो पाएंगे और ना ही नगर निगम बोर्ड के फंड तथा पंद्रहवें वित्त आयोग से कराए जा रहे कई सौ करोड़ के कार्य ठीक प्रकार हो पाएंगे। आयुक्त व जिलाधिकारी से मांग की गई कि सीएम ग्रिड योजना में कराए जाने वाले कामो की जिम्मेदारी पीडब्लूडी या अन्य किसी विभाग को दी जाए।
महानगर के नालाें से हटवाए जाएं अवैध कब्जे
मेरठ। सर्वदलीय पार्षद दल ने मंडलायुक्त से मांग की है कि महानगर के नालों पर किए जा रहे अवैध कब्जों को हटाने के लिए पुलिस प्रशासन व नगर निगम की संयुक्त टीम बनाकर अभियान चलाया जाए। एक संगठित गिरोह की तर्ज पर नालों की पटरियों पर पूरे महानगर में कब्जे कराए जा रहे हैं। कब्जे कराने वाले जो लोग काविज हो रहे हैं उनसे मोटी रकम वसूलते हैं। नाले की पटरियों पर अवैध रूप से जिनको कब्जे कराए जा रहे हैं उनसे ली जाने वाली रकम की एवजी में यह भरोसा दिलाया जाता है कि उनको कोई हटाएगा नहीं। नगर निगम के अफसरों से बात हो चुकी है। पूर्व पार्षद अब्दुल गफ्फार ने बताया कि पूरे महानगर में नाले की पटरियों की करोड़ों रुपए कीमत की जगह कब्जा करा दी गयी है। निगम अफसरों से इस संबंध में कई बार शिकायत भी की जा चुकी है, लेकिन उसके बाद भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। डीएम ने बताया कि इस संबंध में नगरायुक्त से रिपोर्ट मांगी गयी है।
ये हो रहा है नुकसान
मंडलायुक्त को बताया गया कि नालों की पटरियों पर अवैध कब्जों के कारण उस इलाके में रोड पर जाम लगा रहता है। कई बार तो रास्तों से गुजरना तक दुश्वार होता है। इसके लिए केवल पब्लिक ही नहीं पुलिस को भी मुसीबत उठानी पड़ती है। सबसे ज्यादा हलकान तो ट्रेफिक पुलिस वाले होते हैं। सलाह दी गई कि नाले की पटरियों से कब्जे हटवा कर वहां रास्ते बनाए जाएं। इससे दो फायदे होंगे। एक तो नाले की पटरियों से अवैध कब्जे हट जाने से करोड़ों रुपए कीमत की सरकारी जमीन कब्जा मुक्त हो जाएगी। दूसरे महानगर की यातायात की समस्या का स्थायी समाधान भी हो जाएगा। मंडलायुक्त ने इस संबंध में कार्रवाई कराए जाने का आश्वासन दिया।