ईरान के सवाल पर दुनिया दो फाड़, थर्ड वर्ल्डवार की ओर बढ़ रही दुनिया, प्रदर्शनकारियों पर ड्रोन से बरस रही मौत, अब तक एक हजार की मौत
नई दिल्ली/तेहरान। ईरान में प्रदर्शनकारियों पर ड्रोन से मौत बरस रही है। अब करीब एक हजार प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है, हालांकि गैर सरकारी आंकड़ा तीन हजार की मौत का है। ईरान के हालात पर दुनिया दो फाड़ हो चुकी है। अमेरिका ने ईरान पर पच्चीस फीसदी टैरिफ थोप दिया है। इसकी रूस व चीन ने कठोर निंदा करते हुए अमेरिका को मौका परस्त करा दिया है, जबकि यूरोपीय देश और इंग्लैंड ने ईरानी प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है। उन पर की जा रही सख्ती की निंदा की है। ईरान का एक बड़ा तबका साठ दशक वाले माहौल की पैरवी में उतरा हुआ है। ईरान में कभी भी कुछ भी हो सकता है। वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने ईरान पर पच्चीस फीसदी टैरिफ लगा दिया है। कहा जा रहा है कि ईरानी खासतौर से ईरानी महिलाएं अब धार्मिक कट्टरता से उबल गयी हैं और खुली आजादी में सांस लेने की ठान ली है।
नाजुक हैं अंदरूनी हालात
ईरान के अंदरूनी हालात बेहद नाजुक हैं। ईरान की धार्मिक सरकार के खिलाफ आर्थिक संकट, महंगाई और दमन के खिलाफ उठी यह बगावत अब इतिहास की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुकी है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, सुरक्षा बलों की क्रूर कार्रवाई में एक हजार से अधिक प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं (कुछ रिपोर्ट्स में यह आंकड़ा 3,000 तक पहुंचने का दावा), जबकि 10,000 से ज्यादा लोग गिरफ्तार किए गए हैं। इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं कई दिनों से बंद हैं, जिसकी वजह से प्रदर्शनों और ईरानी सरकार की सख्ती पर ताजा अपडेट नहीं मिल पा रहा है।
दुनिया के देशों की नजर
ईरानी के हालात पर दुनिया के सभी देशों की नजर है। भारत ने इस पर चिंता जतायी है। यूरोपीय संघ और ब्रिटेन ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है। रूस और चीन ने अमेरिकी टैरिफ की निंदा की है। यूएनओ व मानवाधिकार संगठनों ने ईरान से इंटरनेट बहाल करने और हिंसा रोकने की मांग की है। ईरान के हालात का असर असर वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर पड़ना तय है।
पूरा ईरान चपेट में
पूरा ईरान हिंसा की चपेट में आ गया है। तेहरान, इस्फहान, तबरीज, शिराज समेत दर्जनों शहरों में लाखों लोग सड़कों पर हैं। प्रदर्शनकारी “आजादी” और “डिक्टेटर” तानाशाह मुर्दाबाद के नारे लगा रहे हैं। ईरान की मुख्य विपक्षी संगठन पीपुल्स मोजाहेदीन ऑफ ईरान (MEK) ने दावा किया है कि मौतों की संख्या 3,000 से अधिक हो चुकी है, और इसे “मानवता के खिलाफ अपराध” करार दिया है। सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर असली गोलियां, आंसू गैस और ड्रोन हमले किए हैं। कई गवाहों ने बताया कि “वे आंखों पर निशाना लगा रहे थे”। इंटरनेट ब्लैकआउट के कारण दुनिया को सीधी तस्वीरें मिलना मुश्किल हो गया है, लेकिन बाहर से आई कुछ वीडियो और फोन कॉल्स में हिंसा की भयावहता साफ दिख रही है।