
प्राधिकरण अफसरों से मिलकर बिछाया जा रहा है अवैध कालोनियों का जाल, सत्तर फीसदी जमीन पर अवैध कालोनिया आबाद
मेरठ। भूमाफिया संगठित गिराेह की तर्ज पर लगातार अपने पांव पसार रहे हैं। ज्यादातर का कनेक्शन सत्ताधारियों से है, जिसके चलते लगता है कि इन्हें लूट की खुली छूट मिल गयी है। रही सही कसर मेरठ विकास प्राधिकरण के जोनल ऑफिसर अर्पित यादव सरीखे कर देते हैं। अर्पित यादव ही नहीं प्राधिकरण में भूमाफियाओं के उससे भी बड़े मददगार कभी टीपी ( टाउन प्लानर) विजय सिंह हुआ करते थे। अर्पित यादव और विजय सिंह की जुगल जोड़ी ने ही महानगर में अवैध कालानियों व निर्माणों का जाल बिछवाने का काम किया। इन्होंने कोई ऐसी जगह नहीं छोड़ी जहां अवैध निर्माण या कालोनियां नहीं काटी गयी हों। हालांकि विजय सिंह का यहां से तवादल हो गया है, लेकिन अर्पित यादव की छत्रछाया में लावड़ रोड, मवाना रोड, रोहटा रोड, बागपत रोड, भाेला रोड पल्लवपुरम, भावनपु सरीखे तमाम इलाकों में अवैध कालोनियां आबाद हैं। लावड रोड की यदि बात करें तो इस इलाके को अवैध कालोनियों की मंड़ी कहा जा सकता है। यहां तमाम बड़ी-बड़ी अवैध कालोनिया हैं। इस इलाके में अवैध कालोनियां ही यहां तथाकथित बिल्डराें ने बड़े कांप्लैक्स तक बना डाले हैं। भूमाफियाओं के खिलाफ जनवाणी की मुहिम के बाद सोफीपुर शामशान घाट की दिवार के बराबर में ऐसे ही एक बड़े कांप्लैक्स प्लैक्स पर पूर्व वीसी अभिषेक पांडे ने कार्रवाई की थी, तब ये यह कांप्लैक्स उजाड़ ही पड़ा है। इसको बनाने वाले तथाकथित भूमाफिया दोबारा से इसको आबाद करने की हिम्मत नहीं जुटा सके। हालांकि सूत्रों की मानें तो इसको ध्वस्त किया जाना था, लेकिन बाद में सील की कार्रवाई कर छोड़ दिया गया, यह बात अलग है कि सील की टेप का वहां कोई अतापता नहीं है।
कुछ ऐसा होता है भूमाफियाओं का गिरोह
यहां अवैध कालोनिया काटने धंधा करने वाले एक संगठित गिराह की तर्ज पर काम करते हैं। इसमें अवैध कालोनी (कच्ची कालोनी ) काटने वाला खुद होता है। इसके अलावा सत्ताधारी दल का बड़ा नेता। कुछ बाउंसर जो अवैध कालोनी के आसपास फटकने वाले किसी भी खतरे के पीछे पिस्टल लेकर दौड़ते हैं और सबसे बड़े मददगार मेरठ विकास प्राधिकरण के कुछ भ्रष्ट अफसर। प्राधिकरण के अफसरों के अलावा इनकी पकड़ पीवीवीएनएल के अफसरों तक होती है। भले ही नियम हो कि किसी भी अवैध कालोनी को बिजली का कनेक्शन नहीं दिया जाएगा, लेकिन इनका पैसा बोलता है। ये जिसका हड्डी डाल देते हैं वो इनके आगे दुम हिलाने लगता है। शायद यही वजह है जो किसी भी महकमे में इनका काम नहीं रूकता है।
सिर्फ छोटी कालानियों पर गरजती है जेसीबी
अवैध कालोनी ही नहीं लावड़ रोड पर अवैध विवाह मंडप, मार्केट और कई कालोनियों का काम फ्लोर पर है। यहां अब तक दर्जन भर से ज्यादा तो बड़ी कालाेनिया काटी जा चुकी हैं और ये दर्जन भर कालोनिया एक छोटे से पार्ट में काटी गई है और इनसे दो गुनी ज्यादा का काम चल रहा है। जोनल अधिकारी व प्राधिकरण के प्रवर्तन प्रभारी अर्पित यादव को दो तीन बीधा की अवैध कालोनी तो नजर आती हैं, लेकिन पचास या फिर उससे ज्यादा बीधा की बड़ी कालोनियां उन्हें नजर नहीं आती हैं। हो यह रहा है कि छोटी-छोटी कालोनियाें पर कार्रवाई कर वहां खड़े होकर फोटो खिचवाकर वो शासन तथा मीडिया को भेजी जाती हैं और गोदी मीडिया में शुमार हो चुके कुछ मीडिया घरानों की फॉर सेल रिपोर्टर भी इन तथाकथित ध्वस्तीकरण रिपोर्टस को प्रमुखता से समाचार पत्र में जगह देते हैं। हालांकि यह जरूरी नहीं कि कुछ गोदी पत्रकारों की कारगुजारी की जानकारी इनके मालिकों तक हो, लेकिन आमतौर पर हो यही रहा है कि गोदी पत्रकार प्राधिकरण की ऐसे ही रिपोर्टस को तवज्जो दे रहे हैं।