पंचम काल में भी संत सानिध्य

पंचम काल में भी संत सानिध्य
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पंचम काल में भी संत सानिध्य, मेरठ स्थित 1008 भगवान पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर दुर्गाबाड़ी सदर में विराजमान परम पूज्य मुनिश्री 108 अनुशरण सागर जी महाराज ने जैन धर्मावलंबियों को संबोधित करते हुए कहा कि पंचम काल में भी भक्तों को संतों का सानिध्य प्राप्त हो रहा है, मंदिर जी में भगवान के दर्शन का सौभाग्य मिल रहा है वो सभी पुण्यशाली जीव हैं। संतों के सानिध्य में किसी को कुछ प्राप्त हो या न हो परन्तु मनुष्य संतोषी अवश्य हो जाता है। मुनिश्री ने कहा कि हमें अपने मन के भाव स्थिर रखने चाहिए न कि दर्शन करने भगवान के आये हैं और मन में दूसरों के लिए कषाय भाव हैं। जिस प्रकार हम मंदिर में प्रवेश करने से पहले अपने जूते चप्पल आदि बाहर उतार कर पांव धोकर मंदिर में जाते हैं उसी प्रकार हमें अपने विकारों को त्याग कर ही जिनेन्द्र प्रभु के दर्शन करने चाहिए। हमारी भावना होनी चाहिए कि हमारे सभी आठों कर्मोँ का क्षय हो और हम भी सिद्धत्व को प्राप्त हों। मुनिश्री द्वारा आगामी अष्टाह्निका पर्व पर थापर नगर स्थित दिगंबर जैन मंदिर में श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान कराया जाएगा। मुनिश्री के प्रवचन से सदर जैन समाज के लोग धर्म लाभ उठा रहे हैं। मुनिश्री के प्रवास से सदर का पूरा जैन समाज इन दिनों प्रसन्न है। समाज के लोगों का यह भी प्रयास है कि परम पूज्य मुनिश्री 108 अनुशरण सागर जी महाराज का जितना भी हो सके अधिक समय तक सानिध्य मिले। उनके परम वचन सुनने का सौभाग्य अधिक समय तक मिलता रहे, यह सभी जैन धर्मावलंबि चाहते हैं। परिवार के सभी आयु वर्ग के सदस्य परम पूज्य मुनिश्री 108 अनुशरण सागर जी महाराज के प्रवचन सुनने को लालायित रहते हैं। उनके प्रवचन के लिए सामान्य कामकाज से अधिक से अधिक समय निकालने का सभी का प्रयास है। लोगों का कहना है कि मुनि श्री के प्रवचन से जीवन के संकट दूर हाेते हैं। मन का विकार दूर होता है। यह सभी का सौभाग्य है कि परम पूज्य मुनिश्री 108 अनुशरण सागर जी महाराज के प्रवचन व आर्शीवाद मिल रहा है।

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